India not being part of Pax Silica: कसा है. कांग्रेस ने कहा, 'माई डियर फ्रेंड ट्रंप कहकर कभी गदगद होने वाले प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं'.
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India US Tension: भारत-अमेरिका के रिश्ते इस साल काफी उतार-चढ़ाव से भरे रहे. भारत को 'जलाने' के लिए पहले पाकिस्तान को दुत्कारने वाले ट्रंप उसे पुचकार रहे हैं. टैरिफ से भारत को झुकाने की हसरत पूरी नहीं हुई तो ट्रंप ने व्हाइट हाउस को 'साजिशघर' बनाते हुए अनोखी स्कीम चलाकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की. ट्रंप ने दिल्ली को झुकाने के लिए 'साम-दाम-दंड-भेद' सब अपनाया. उससे भी कुछ नहीं बिगड़ा. लेकिन मौका हाथ लगते ही उन्हीं पुरानी बातों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने पीएम मोदी को घेरते हुए केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
मोदी-ट्रंप की दोस्ती पर तंज
कांग्रेस ने केंद्र की कार्य प्रणाली को लेकर पीएम मोदी को घेरा और उनके विजन पर सवाल उठाया. केंद्र के कामकाज पर तंज कसते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, ' अमेरिका का भारत पर टैरिफ लगाना यह बताता है कि 'नमस्ते ट्रंप' और 'हाउडी मोदी' का दौर खत्म हो चुका है. खासकर 10 मई, 2025 से भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते बहुत नाज़ुक हो गए हैं, और हम गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.'
कांग्रेस महासचिव (कम्युनिकेशन) जयराम रमेश ने X पर लिखा, 'दो दिन पहले अमेरिका ने चीन का मुकाबला करने के मकसद से नौ देशों के एक गठबंधन की घोषणा की और भारत को उसमें शामिल नहीं किया. ये बताता है भारत-अमेरिका के रिश्ते ठीक नहीं हैं. ट्रंप 62 बार अपना दावा दोहरा चुके हैं और प्रधानमंत्री मोदी चुप हैं. अमेरिका, नई दिल्ली के साथ मजबूत रिश्ते चाहता था. भारत भी अमेरिका के साथ करीबी रिश्ते चाहता था. आज स्थिति गंभीर है.'
#WATCH | Delhi | On US tariff issue, Congress leader Jairam Ramesh says, "It has now become abundantly clear that the era of 'Namaste Trump' and 'Howdy Modi' has come to an end... Since May 10, 2025, the relationship between India and the United States has been extremely fragile,… pic.twitter.com/rHVDhLZL2U
— ANI (@ANI) December 13, 2025
क्या है पैक्स सिलिका?
पैक्स सिलिका AI और सप्लाई चेन सुरक्षा पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की पहल है, जिसे सहयोगी देशों और भरोसेमंद पार्टनर्स के बीच नई आर्थिक सुरक्षा सहमति काम किया जा रहा है. यह समझौता आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटिंग की नींव पर बना है. अमेरिकी अगुवाई वाली ये पहल एक सुरक्षित, लचीले और इनोवेशन-संचालित प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम पर आधारित हैं. जिसमें रेयर अर्थ मिनरल्स और एनर्जी कंपोंनेंट्स से लेकर सेमीकंडक्टर, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स तक पूरी वैल्यू चेन को शामिल किया गया है.
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इसका मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए जरूरी मटीरियल और क्षमताओं को सहेजना और सहयोगी देशों में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी विकसित कराना और उसे लागू करवाने में मदद देना है. जिसमें भारत के न होने को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है. इस संगठन में अमेरिका के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इजरायल, यूएई और ऑस्ट्रेलिया हैं.