जब सुप्रीम कोर्ट में पड़ी राजस्‍थान के वरिष्‍ठ अधिकारी को डांट, पूछा- 'आपने किस तरह के कपड़े पहने हैं?'

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजस्थान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के परिधान पर कड़ी आपत्ति करते हुए उसे आड़े हाथ लिया. इसके साथ ही कोर्ट ने अधिकारी को उचित परिधान संहिता का पालन करके आने के लिए कहते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी.

जब सुप्रीम कोर्ट में पड़ी राजस्‍थान के वरिष्‍ठ अधिकारी को डांट, पूछा- 'आपने किस तरह के कपड़े पहने हैं?'
सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो...
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नई दिल्‍ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजस्थान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के परिधान पर कड़ी आपत्ति करते हुए उसे आड़े हाथ लिया. इसके साथ ही कोर्ट ने अधिकारी को उचित परिधान संहिता का पालन करके आने के लिए कहते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी.

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार के शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को नौकरशाहों द्वारा पहने जाने वाले परिधान के नियमों पर गौर करने का निर्देश दिया.

आपने किस तरह के परिधान पहने हैं- सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारी से पूछा
न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने इस अधिकारी के कपड़ों पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, 'आप किस तरह के परिधान पहने हैं? नौकरशाहों के लिये ड्रेस कोड है. क्या आपने इन्हें पढ़ा है? यदि आपको नियमों की जानकारी नहीं है और नहीं जानते कि न्यायालय में उपस्थित होते वक्त एक अधिकारी की पोशाक क्या होनी चाहिए तो आप अतिरिक्त मुख्य सचिव होने लायक नहीं हैं.' 

अधिकारी ने कोर्ट से मांगी माफी
पीठ ने अतिरिक्त मुख्य सचित मंजीत सिंह से पूछा, 'क्या आप चप्पल, धोती या सामान्य वस्त्र पहने किसी व्यक्ति को अपने कार्यालय में आने देते हैं.' सिंह पैंट और शर्ट पहन कर आए थे. पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी और वकील एैश्वर्य भाटी से कहा कि वे कोर्ट को कल अधिकारियों के ड्रेस कोड से अवगत कराएं. अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इस पर न्यायालय से क्षमा याचना की. इसके बाद पीठ ने कहा कि वह इस मामले में गुरुवार को सुनवाई करेगी.

अपील पर सुनवाई कर रही थी कोर्ट
यह पीठ राजस्थान उच्च न्यायालय के 13 मार्च 2015 के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी. इस फैसले में उच्च न्यायलय ने बीकानेर जिले में नापासार गांव को नगर पालिका घोषित करने संबंधी घोषणा वापस लेने वाली राज्य सरकार की 18 सितंबर, 2009 की अधिसूचना निरस्त कर दी थी. शीर्ष अदालत ने पिछले महीने अपने आदेश में राज्य सरकार को यह अधिसूचना और बाद में नगर पालिका का दर्जा वापस लेने के दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए थे. 

राज्य सरकार द्वारा संबंधित दस्तावेज पेश नहीं करने से नाराज शीर्ष अदालत ने 13 मार्च को अपने आदेश में राज्य सरकार से सहयोग नहीं मिलने पर अपनी नाराजगी दर्ज की थी. इसके बाद ही न्यायालय ने राज्य सरकार के सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था.

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