Putin first visit to India: पुतिन पहली बार वर्ष 2000 में भारत आए थे. उस वक्त उनके साथ पत्नी ल्यूडमिला भी थीं. जिनके साथ वे ताजमहल देखने आगरा गए थे.
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What happened in Putin's first visit to India: भारत-रूस शिखर सम्मेलन में शामिल होने गुरुवार रात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब दिल्ली पहुंचे तो यह सिर्फ सामरिक साझेदारी का नया चैप्टर शुरू होना नहीं था. यह उस कहानी का आगे बढ़ना था, जिसकी शुरुआत ठीक 25 साल पहले हुई थी. वर्ष 2000 की उनकी पहली भारत यात्रा आज भी भारत–रूस संबंधों के बदलते स्वरूप का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है. उस वक्त रूस वैश्विक शक्ति के रूप में फिर से उभरने की कोशिश कर रहा था. वहीं परमाणु परीक्षण करने की वजह से भारत अंतरराष्ट्रीय अलगाव झेल रहा था. लेकिन पुतिन की उस तीन दिवसीय उपस्थिति ने दोनों देशों की कूटनीति की दिशा बदल दी.
पत्नी ल्यूडमिला के साथ पहली बार पहुंचे भारत
व्लादिमीर पुतिन पहली बार दिसंबर 2000 में अपनी पत्नी ल्यूडमिला के साथ भारत आए थे. उस वक्त उनकी उम्र 47 वर्ष थी. उनके आगमन पर जोरदार तरीके से उनका स्वागत किया गया. जिसने दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों को दोबारा जीवित कर दिया. राष्ट्रपति भवन में के.आर. नारायणन ने उन्हें 'जरूरत में साथ देने वाला मित्र' कहकर संबोधित किया. वहीं पुतिन ने संसद के सेंट्रल हॉल में हाथ जोड़कर ‘नमस्ते’ कहा. इसके साथ ही उन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर भारत के स्टैंड का का समर्थन किया. इससे यह साफ हो गया कि रूस नई वैश्विक परिस्थितियों में भी भारत के साथ खड़ा रहेगा.
पुतिन अपनी पत्नी ल्यूडमिला के साथ आगरा में ताजमहल घूमने पहुंचे. वहां पर वे 50 मिनट तक रहे और काफी देर तक स्मारक को निहारते रहे. उन्होंने दिल्ली के राजघाट में गांधीजी को श्रद्धांजलि देकर भारत से सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीकात्मक संदेश भी दिया, लेकिन असली संकेत मुंबई से मिला.
मुंबई से दुनिया को दिया संदेश- 'भारत अकेला नहीं'
असल में वर्ष 2000 में परमाणु परीक्षण करने की वजह से भारत उन दिनों दुनिया में अलगाव झेल रहा था. यह परीक्षण भारत के BARC ने किया था. ऐसे हाला में पुतिन मुंबई में बने BARC की लैब में पहुंचे. उनका वहां पर जाना उस समय दुनिया के लिए अप्रत्याशित कदम था. पोखरण-2 के बाद भारत अंतरराष्ट्रीय दबाव में था, प्रतिबंधों का सामना कर रहा था. ऐसे माहौल में पुतिन का ‘ध्रुव’ रिएक्टर के सामने होकर फोटो खिंचवाना मौन लेकिन बेहद शक्तिशाली संदेश था. वह संदेश ये था कि रूस भारत की परमाणु नीति के साथ है. पूर्व वैज्ञानिक अनिल काकोडकर ने भी बाद में यही कहा कि यह फोटो रूस के स्पष्ट समर्थन की घोषणा थी.
भारत की सैन्य क्षमता बढ़ाने का फैसला
उस समय पुतिन की भारत यात्रा महज भावनात्मक कूटनीति भर नहीं थी. उनकी उस विजिट के दौरान भारत के साथ 310 टी-90 टैंकों का समझौता, सुखोई-30 एमकेआई फाइटर प्लेन का संयुक्त उत्पादन लाइसेंसिंग और एयरक्राफ्ट कैरियर एडमिरल गोर्शकोव (आईएनएस विक्रांत) देने का वादा किया गया. ये सभी निर्णय भारत की सैन्य क्षमता के नए युग की शुरुआत थे. उस यात्रा में दोनों देशों ने औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की, जो आज भी द्विपक्षीय संबंधों की आधारशिला है.
25 साल बाद भी दोस्ती अटूट
अब पुतिन एक दशक में कई यात्राओं के बाद फिर से दिल्ली में हैं, तो 2000 की वह पहली यात्रा और भी प्रासंगिक लगती है. तब रूस पकड़ मजबूत करने की कोशिश में था और भारत वैश्विक आलोचना का सामना कर रहा था. लेकिन आपसी भरोसे की वह नींव आज भी अटूट है. 25 साल बाद भी दुनिया बदल गई है लेकि भारत–रूस की दोस्ती आज भी उतनी ही मजबूत है. जिसे पुतिन ने अपनी पहली यात्रा में तय किया था.