कौन है कल्कि? जानिए वो क्यूं होंगे धरती पर अवतरित ?

हिंदू धर्म में पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान के कई अवतारों का वर्णन है जिसमें कल्कि को भगवान विष्णु का भावी अवतार माना गया है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक कलियुग में पाप की सीमा पार होने पर दुनिया में दुष्टों के संहार के लिये कल्कि अवतार होगा और धर्म ग्रंथों के अनुसार कलियुग में भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतार लेंगे। कल्कि अवतार कलियुग के अंतिम चरण में होगा। इन्हें कल्कि भगवान के नाम से भी जाना जाता है।

कौन है कल्कि? जानिए वो क्यूं होंगे धरती पर अवतरित ?

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान के कई अवतारों का वर्णन है जिसमें कल्कि को भगवान विष्णु का भावी अवतार माना गया है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक कलियुग में पाप की सीमा पार होने पर दुनिया में दुष्टों के संहार के लिये कल्कि अवतार होगा और धर्म ग्रंथों के अनुसार कलियुग में भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतार लेंगे। कल्कि अवतार कलियुग के अंतिम चरण में होगा। इन्हें कल्कि भगवान के नाम से भी जाना जाता है।

 

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक यह अवतार 64 कलाओं से युक्त होगा। पुराणों के अनुसार उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले के संभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि पुत्र रूप में जन्म लेंगे। कल्कि देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर संसार से पापियों का विनाश करेंगे और धर्म की पुन:स्थापना करेंगे।

पुराणों में यह कहा गया है कि भगवान विष्णु के कुल मिलाकर 24 अवतार अवतरित होने हैं जिनमें से 23 अवतार अब तक पृथ्वी पर अवतरित हो चुके है जबकि 24 वां अवतार ‘कल्कि अवतार’ के रूप में होना बाकी है। इन 24 अवतार में से 10 अवतार विष्णु जी के मुख्य अवतार माने जाते है। यह है मत्स्य अवतार, कूर्म अवतार, वराह अवतार, नृसिंह अवतार, वामन अवतार, परशुराम अवतार, राम अवतार. कृष्ण अवतार, बुद्ध अवतार, कल्कि अवतार।

इतिहास साक्षी है कि जब-जब अधर्म ने धर्म को नुकसान पहुचाने का प्रयास किया है तब-तब भगवान ने अवतार लिया है। भगवान वराह, नृसिंह, राम और कृष्ण का अवतार इसके प्रमाण हैं।

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान विष्णु के कल्कि अवतार लेने की घड़ी नजदीक आती जा रही है। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि 'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्। परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।

अर्थात 'जब जब संसार में धर्म की हानि होने लगती है और अधर्म प्रबल होने लगाता है तब तब धर्म की स्थापना के लिए और संतजनों की रक्षा के लिए मैं अवतार लेता हूं।' इसलिए कलियुग में भगवान विष्णु के कल्कि अवतार में धरती पर अवतरित होने की चर्चा होती है। हिंदू धर्म के सबसे बड़ा धर्मग्रंथ गीता भी अवतार की पौराणिक अवधारणा की पुष्टि करती है।

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