INSIDE STORY: BJP के साउथ के सबसे कद्दावर नेता BS Yediyurappa की कुर्सी क्‍यों गई?

BS Yediyurappa resigned: बीजेपी नेतृत्व लगातार कहता रहा कि कर्नाटक में बी. एस. येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) अच्छा काम कर हैं ऐसे में लाख टके का सवाल है कि कर्नाटक में सब अच्‍छा था तो येदियुरपा की कुर्सी क्‍यों गई?  

INSIDE STORY: BJP के साउथ के सबसे कद्दावर नेता  BS Yediyurappa की कुर्सी क्‍यों गई?
बी. एस. येदियुरप्पा (फाइल फोटो).

बेंगलुरु: कर्नाटक बीजेपी में चल रही कलह का परिणाम मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) के इस्तीफे के तौर पर आया है. येदियुरप्पा ने जैसे संकेत दिए थे ठीक उसीके मुताबिक आज (26 जुलाई 2021) राज्यपाल थावरचंद गहलोत को अपना इस्तीफा सौंप दिया. इससे पहले उन्होंने ट्वीट करते हुए अपना इस्तीफा देने की घोषणा की थी और कहा था कि दो साल तक राज्य की सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात है. 

'मोदी-शाह का आभार'

कन्नड़ में किए गए एक ट्वीट में, बी. एस. येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें अपने उत्तराधिकारी की घोषणा होने तक अंतरिम मुख्यमंत्री के रूप में बने रहने के लिए कहा गया है. उन्होंने ट्वीट किया, 'मैंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में इस्तीफा देने का फैसला किया है. मैं विनम्र हूं और ईमानदारी से राज्य के लोगों को उनकी सेवा करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद देता हूं. मैं पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा (JP Nadda) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के समर्थन के लिए आभारी हूं.'

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येदियुरप्पा का इस्तीफा क्यों?

अपने कार्यकाल के दो साल पूरे होने का जश्न मनाते हुए एक समारोह में अपने भाषण के तुरंत बाद, येदियुरप्पा ने अपने इस फैसले की घोषणा की है. सवाल उठता है कि आखिरकार बीजेपी आलाकमान की तमाम कोशिशों के बाद भी येदियुरप्पा को इस्तीफा क्यों देना पड़ा. इसके प्रमुख कारण हैं-

1. कई विधायक नाखुश- येदियुरप्पा से कई विधायक नाखुश चल रहे थे. इससे पार्टी में अंदरूनी खींचतान बढ़ती जा रही था.

2. नेतृत्व पर बढ़ता दबाव- येदियुरप्पा को लेकर पार्टी के अंदर जो विरोध के सुर उठ रहे थे उन्हें लेकर पार्टी नेतृत्व पर लगातार उन्हें पद से हटाने का दबाव था. 

3. परिवारवाद का आरोप- येदियुरप्पा पर लगातार परिवारवाद का आरोप लग रहा था. इस वजह से बीजेपी की परिवारवाद के खिलाफ हमलों की धार कुंद हो रही थी. 

4. दूसरे दलों से आए विधायक नाराज- येदियुरप्पा अपनी पार्टी के अलावा दूसरे दल से आए विधायकों को भी साथ लेकर चलने में नाकामयाब रहे. ऐसे में सरकार खतरे में आ सकती थी, बीजेपी नेतृत्व ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहता.

5. येदियुरप्पा की बढ़ती उम्र- येदियुरप्पा को सीएम के तौर पर जारी रखना बीजेपी के लिए इसलिए भी मुश्किल था क्योंकि उनकी उम्र 78 के करीब है. जबकि BJP ने 75 वर्ष रिटायरमेंट का आयु तय कर रखी है. 

'दिल्ली से कोई दबाव नहीं'

हालांकि इस्तीफा देने के बाद भाजपा के निवर्तमान मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने स्पष्ट किया कि पार्टी आलाकमान की ओर से उन पर इस्तीफा देने का कोई दबाव नहीं था. राजभवन के अपने दौरे के बाद बोलते हुए, नए मुख्यमंत्री के पद संभालने तक अंतरिम मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे येदियुरप्पा ने कहा कि उन्होंने राज्य में एक नए सीएम के लिए रास्ता बनाने के लिए स्वेच्छा से पद छोड़ने का निर्णय लिया है. उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी संगठन की सेवा करने वाली राजनीति में बने रहेंगे.

क्या होगा भविष्य?

येदियुरप्पा ने कहा कि वह भविष्य में पार्टी से कोई पद नहीं मांगेंगे. उन्होंने कहा, 'मेरे बेकार बैठने या राजनीति से बाहर जाने का कोई सवाल ही नहीं है. मैं हर बार पार्टी को सत्ता में वापस लाने का प्रयास करूंगा.' उन्होंने कहा, 'मैं एक बार फिर यह कहना चाहता हूं कि दिल्ली से कोई दबाव नहीं था. मैंने केवल पद पर दो साल पूरे होने के अवसर पर इस्तीफा देने का फैसला किया है.'

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