close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

कांग्रेस का तंज- सावरकर को ही भारत रत्‍न क्‍यों देना चाहती है बीजेपी? गोडसे को क्‍यों नहीं?

महाराष्‍ट्र चुनाव के दौरान बीजेपी ने अपने संकल्‍प पत्र में क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्‍न देने की मांग की है. इस पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी/एनडीए भारत रत्‍न, सावरकर को ही क्‍यों देना चाहती है? गांधी के हत्‍यारे नाथूराम गोडसे को क्‍यों नहीं?  

कांग्रेस का तंज- सावरकर को ही भारत रत्‍न क्‍यों देना चाहती है बीजेपी? गोडसे को क्‍यों नहीं?

नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र चुनाव (Maharashtra Assembly Elections 2019) के दौरान बीजेपी ने अपने संकल्‍प पत्र में क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्‍न देने की मांग की है. इस पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी/एनडीए भारत रत्‍न, सावरकर को ही क्‍यों देना चाहती है? गांधी के हत्‍यारे नाथूराम गोडसे को क्‍यों नहीं? मनीष तिवारी ने कहा कि महात्‍मा गांधी की हत्‍या के मामले में सावरकर पर आरोप लगे थे. उनके खिलाफ चार्जशीट फाइल हुई थी लेकिन बाद में वह बरी हो गए. लेकिन नाथूराम गोडसे को दोषी पाया गया और फांसी दी गई. ऐसे में यदि महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर आप उनकी स्‍मृतियों को मिटाना चाहते हैं तो फिर खुलेआम पूरी तरह से ये काम कीजिए.

कौन हैं विनायक दामोदर सावरकर?
स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी विनायक दामोदर सावरकर का जन्‍म 28 मई, 1883 को नासिक में हुआ था. उन्‍होंने भारत और ब्रिटेन में पढ़ाई के दिनों से ही क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था. ब्रिटेन में वह इस सिलसिले में इंडिया हाउस, अभिनव भारत सोसायटी और फ्री इंडिया सोसायटी से जुड़े.

1857 के भारत के प्रथम स्‍वतंत्रता संग्राम पर उन्‍होंने 'द इंडियन वार ऑफ इंडिपेंडेंस' (The Indian war of Independence) पुस्‍तक लिखी. अंग्रेजी राज ने इस किताब को प्रतिबंधित कर दिया. क्रांतिकारी समूह इंडिया हाउस से जुड़े होने के कारण उनको 1910 में गिरफ्तार किया गया. उनको कुल 50 वर्षों की दो आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और अंडमान एवं निकोबार द्वीप में स्थित सेल्‍युलर जेल में रखा गया. हालांकि 1921 में वह रिहा हो गए.

जेल में रहने के दौरान सावरकर ने 'हिंदू राष्‍ट्रवाद' और 'हिंदुत्‍व' अवधारणा पर काफी कुछ लिखा. वह हिंदू महासभा के अध्‍यक्ष भी रहे. 26 फरवरी 1966 को उनका निधन हो गया. अंडमान और निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्‍लेयर के एयरपोर्ट का नाम वीर सावरकर अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट रखा गया है. कुछ समय पहले शिवसेना ने सरकार से उनको मरणोपरांत भारत रत्‍न देने की मांग की थी.