Why Nitish Kumar Choose MLC: नीतीश कुमार ने बिहार में 1977, 1980 और 1985 में विधानसभा चुनाव लड़ा था. लेकिन वह केवल एक बार 1985 में ही जीत पाए थे. इसके बाद उनका रुख राष्ट्रीय राजनीति की तरफ हो गया और वह 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लगातार 6 बार जीतकर सांसद बने.
Trending Photos
)
Bihar Election Result 2025: बिहार में नीतीश कुमार सबसे लंबे वक्त तक राज करने वाले मुख्यमंत्री हैं. आखिरी बार वह बिहार विधानसभा के सदस्य 1985 में थे. इसके बाद उन्होंने केवल एक बार 1995 में विधानसभा चुनाव लड़ा था, वो भी हरनौत सीट से. लेकिन उन्होंने यह सीट छोड़ दी और सांसद बने रहने का फैसला किया. लेकिन इसके बाद बावजूद नीतीश सत्ता में बने हुए हैं, वो भी विधानसभा चुनाव लड़े. आखिर ये कैसे हुआ. चलिए आपको पूरा माजरा समझाते हैं.
सवाल- विधानसभा चुनाव नहीं लड़ते फिर मुख्यमंत्री कैसे हैं नीतीश?
जवाब- दरअसल नीतीश कुमार ने बिहार की सत्ता में बने रहने के लिए विधान परिषद का रास्ता चुना है. लगातार वह विधान परिषद से जीतकर बिहार का सीएम पद संभाले हुए हैं.
नीतीश कुमार ने बिहार में 1977, 1980 और 1985 में विधानसभा चुनाव लड़ा था. लेकिन वह केवल एक बार 1985 में ही जीत पाए थे. इसके बाद उनका रुख राष्ट्रीय राजनीति की तरफ हो गया और वह 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लगातार 6 बार जीतकर सांसद बने.
सवाल- पहला लोकसभा चुनाव कब जीते थे नीतीश?
जवाब-नीतीश कुमार ने पहला चुनाव 1989 में बाढ़ लोकसभा सीट से लड़ा था. यहां से लगातार 4 बार वह जीते. 2004 में उन्होंने नालंदा और बाढ़ दोनों जगह से चुनाव लड़ा. लेकिन वह बाढ़ से चुनाव हार गए लेकिन नालंदा से जीत मिली. इसके बाद नीतीश किसी भी चुनाव में लड़ने के लिए नहीं उतरे.
सवाल- नीतीश कुमार कब से बिहार के मुख्यमंत्री हैं?
जवाब- साल 2014-15 के 9 महीनों को छोड़ दें तो नीतीश कुमार नवंबर 2005 से बिहार के सीएम हैं. साल 2014 में जब बीजेपी प्रचंड बहुमत से जीती थी,तब पीएम मोदी के साथ राजनीतिक तकरार के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया था.तब जीतन राम मांझी बिहार के सीएम बने थे. लेकिन उनकी नजदीकियां बीजेपी के साथ हो गई थीं. लिहाजा 2015 के चुनावों से पहले वह बिहार के सीएम फिर बन गए. उस दौरान उन्होंने लालू प्रसाद यादव की आरजेडी के साथ मिलकर प्रचंड जीत हासिल की थी. लेकिन साल 2017 में वह दोबारा एनडीए में चले गए.
सवाल- विधान परिषद का सहारा क्यों लेते हैं नीतीश?
जवाब-जब साल 2000 में नीतीश कुमार ने बतौर मुख्यमंत्री साल 2000 में पहली बार शपथ ली थी. वह किसी भी सदन का हिस्सा नहीं थे. लेकिन 8 दिन में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. साल 2005 में जब वह दोबारा मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने विधानसभा नहीं बल्कि विधान परिषद का रास्ता चुना. इस पर वह आज तक चल रहे हैं.
सवाल-भारत के कितने राज्यों में है विधान परिषद?
जवाब-बिहार भारत के उन 6 राज्यों में शामिल है, जहां विधान परिषद है. इसका फायदा ये है कि अगर कोई नेता विधानसभा चुनाव नहीं भी लड़ता है तो वह विधान परिषद के जरिए मुख्यमंत्री या मंत्री बन सकता है. बतौर एमएलसी नीतीश का पहला कार्यकाल 2012 में खत्म हुआ. इसके बाद वह दोबारा चुने गए. इससे यह सवाल भी खड़े हुए कि नीतीश विधानसभा चुनावों से बचते क्यों हैं.
सवाल-MLC होने पर क्या बोले थे नीतीश?
जवाब-इस पर नीतीश ने जनवरी 2012 में कहा था, 'मैंने अपनी इच्छा से विधान परिषद सदस्य बनने का फैसला किया है, किसी मजबूरी के कारण नहीं, क्योंकि उच्च सदन एक सम्मानजनक संस्था है.' उन्होंने आगे कहा, 'मैं वर्तमान छह साल का कार्यकाल पूरा होने पर एक बार फिर विधान परिषद के लिए निर्वाचित होऊंगा. मैं 6 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद फिर विधानसभा परिषद के लिए चुना जाऊंगा.' 2015 के विधानसभा चुनावों से पहले, उन्होंने फिर साफ किया कि वह व्यक्तिगत रूप से चुनाव नहीं लड़ेंगे क्योंकि वह अपना ध्यान एक सीट तक सीमित नहीं रखना चाहते.'
सवाल-कब तक है नीतीश का MLC कार्यकाल?
जवाब-नीतीश कुमार 2018 में बिहार विधान परिषद के लिए लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से चुने गए, जो 2024 में खत्म हुआ. उन्होंने मार्च 2024 में बतौर एमएलसी एक और कार्यकाल हासिल किया, और उनका वर्तमान कार्यकाल मई 2030 तक चलेगा. बिहार में दो फेज में चुनाव तय हैं. पहले फेज के लिए 6 नवंबर और दूसरे फेज के लिए 11 नवंबर को वोट डाले गए. नतीजों का ऐलान 14 नवंबर 2025 को होगा.