बंगाल कनेक्‍शन के कारण SP ने जया बच्‍चन को राज्‍यसभा में भेजने का फैसला लिया?

सियासी हलकों में नरेश अग्रवाल को टिकट नहीं दिए जाने के बारे में कयास लगाए जा रहे हैं कि दरअसल सपा नेतृत्‍व उनसे नाखुश था.

बंगाल कनेक्‍शन के कारण SP ने जया बच्‍चन को राज्‍यसभा में भेजने का फैसला लिया?
जया बच्‍चन, सपा की तरफ से राज्‍यसभा के लिए एकमात्र उम्‍मीदवार हैं.(फाइल फोटो)

समाजवादी पार्टी ने जया बच्‍चन को एक बार फिर से राज्‍यसभा भेजने का फैसला लिया है. इस प्रकार लगातार चौथी बार जया बच्‍चन को राज्‍यसभा भेजा जा रहा है. वह 2004 से ही सपा की राज्‍यसभा सदस्‍य हैं. फिलहाल संख्‍याबल के लिहाज से सपा केवल एक सीट पर अपने प्रत्‍याशी को राज्‍यसभा भेज सकती है. इस एक सीट के लिए पार्टी की तरफ से जया बच्‍चन के अलावा वरिष्‍ठ नेता नरेश अग्रवाल भी दावेदार थे. लेकिन उनकी जगह जया बच्‍चन को तरजीह देने के मामले में कयास लगाए जा रहे हैं.

जया बच्‍चन
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि इस बार ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी जया बच्‍चन को राज्‍यसभा भेजने का मन बनाया था. यदि सपा उनके नाम का चयन नहीं करती तो तृणमूल द्वारा उनको भेजने के कयास लगाए जाने लगे थे. टीएमसी के पास चार सीटें हैं. दरअसल जया बच्‍चन मूल रूप से बांग्‍ला भाषी हैं और अमिताभ बच्‍चन का भी बंगाल से गहरा लगाव रहा है. उन्‍होंने फिल्‍मों में आने से पहले अपने पेशेवर करियर की शुरुआत कोलकाता से ही की थी. ममता बनर्जी से भी उनके अच्‍छे संबंध हैं. इसीलिए कहा जा रहा था कि यदि सपा, जया बच्‍चन को टिकट नहीं देती तो तृणमूल उनको बंगाल से राज्‍यसभा भेज सकती है.

मायावती ने जिस सीट पर लगाया दांव, BJP उसमें फंसा सकती है पेंच

नरेश अग्रवाल
सियासी हलकों में नरेश अग्रवाल को टिकट नहीं दिए जाने के बारे में कयास लगाए जा रहे हैं कि दरअसल सपा नेतृत्‍व उनसे नाखुश था. हालिया दौर में उनके कई बयान विवादों में भी रहे हैं. इसके अलावा सपा के शीर्ष परिवार में विवाद के बाद मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव से भी उनके रिश्‍ते अब सहज नहीं हैं. शिवपाल उन पर बीजेपी के साथ संबंध रखने का आरोप लगाते रहे हैं. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पिता मुलायम सिंह और चाचा शिवपाल को संतुष्‍ट करने के लिहाज से उनकी जगह पर जया बच्‍चन को अखिलेश यादव ने तरजीह दी. ऐसा इसलिए भी क्‍योंकि जया बच्‍चन के मुलायम सिंह यादव के साथ बेहतर संबंध हैं.   

राज्‍यसभा चुनाव: BJP को कामकाजी बहुमत की उम्मीद

राज्‍यसभा चुनाव
23 मार्च को 16 राज्‍यों की 58 राज्‍यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं. इनमें से 10 सीटें यूपी की हैं. पिछले साल यूपी विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद इनमें से आठ सीटें बीजेपी को मिलनी तय हैं. एक सीट सपा को मिलेगी और 10वीं सीट के लिए मायावती ने सपा के समर्थन से अपने प्रत्‍याशी को उतारा है. इस बीच चुनाव आयोग द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार निर्वाचन प्रक्रिया पांच मार्च को चुनाव अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू हो गई है. इन सीटों पर चुनाव के लिये 23 मार्च को मतदान कराया जायेगा और उसी दिन मतगणना भी होगी.

इसी के साथ केरल से राज्यसभा की एक सीट के लिये उपचुनाव भी होगा. यह सीट जदयू सदस्य एमपी वीरेन्द्र कुमार के गत वर्ष 20 दिसंबर को इस्तीफे के कारण रिक्त हुई थी. आयोग द्वारा प्राप्त जानकारी के मुताबिक 13 राज्यों से 50 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल आगामी दो अप्रैल को, दो राज्यों (उड़ीसा और राजस्थान) से छह राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल तीन अप्रैल और झारखंड से दो सदस्यों का कार्यकाल तीन मई को समाप्त हो रहा है.

इनमें उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक 10 सदस्यों का कार्यकाल दो अप्रैल को खत्म हो रहा है. वहीं महाराष्ट्र और बिहार से छह-छह, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल से पांच-पांच तथा गुजरात और कर्नाटक से चार चार सदस्यों का कार्यकाल इसी दिन पूरा होगा.

चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की अंतिम तिथि 12 मार्च तय की गई है. वहीं, नामांकन पत्रों की जांच 13 मार्च को होगी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 15 मार्च है. मतदान 23 मार्च को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक होगा और शाम पांच बजे मतगणना होगी. आयोग ने स्पष्ट किया मतपत्रों के माध्यम से होने वाले मतदान के दौरान मतदाताओं को निर्वाचन केंद्र पर मौजूद निर्वाचन अधिकारी द्वारा खास पेन मुहैया कराया जायेगा. मतदाता सिर्फ इसी पेन से अपनी पसंद के उम्मीदवार को मत दे सकेंगे. किसी अन्य पेन के इस्तेमाल वाले मतपत्र को अमान्य श्रेणी में रखा जायेगा.