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जानें क्यों चर्चा में है Spice-2000 बम, आतंक को कैसे बनाता है राख

भारतीय वायु सेना ने 27 फरवरी को जैश के ठिकाने पर Spice-2000 Bomb बरसाए थे, इस मिशन 'स्पाइस' नाम दिया गया था.

जानें क्यों चर्चा में है Spice-2000 बम, आतंक को कैसे बनाता है राख
स्पाइस बम का पुराना वर्ज़न किसी बिल्डिंग को तबाह करने के लिए नहीं बल्कि इसके अंदर मौजूद लोगों को मारने के काम आता है.

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) ने बालाकोट (Balakot) एयर स्ट्राइक (Air Strike) को लेकर बड़ा खुलासा किया है. बालाकोट में आतंकी कैंप पर जिन 'मिराज 2000' (Mirage 2000) के जरिए बम गिराए गए थे, इस बमबारी को एक खास नाम दिया गया था. भारतीय वायु सेना के मुताबिक इसे मिशन 'स्पाइस' नाम दिया गया था. यानी 27 फरवरी को जैश के ठिकाने पर Spice-2000 Bomb बरसाये गए थे. 

स्पाइस बम का पुराना वर्ज़न किसी बिल्डिंग को तबाह करने के लिए नहीं बल्कि इसके अंदर मौजूद लोगों को मारने के काम आता है. इसके बम की ज़्यादातर ताक़त छेद करके अंदर घुसने के लिए होती है. एक बार अंदर जाने के बाद ये फटता है और अंदर मौजूद लोग विस्फोट और शॉक वेव से मारे जाते हैं. इसीलिए स्पाइस किसी बिल्डिंग, कमांड सेंटर या किसी बंकर में मौजूद आतंकवादियों के लीडरशिप को खत्म करने के लिए बहुत कारगर है तो आइये हम आपका परिचय बालाकोट बम Spice - 2000 से कराते हैं. 

अंधेरा हो, तूफान हो, दुश्मन जंगल में हो या फिर पाताल में छिपा हो लेकिन स्पाइस 2000 के वार से बचना नामुमकिन है. इंडिया-इजरायल की दोस्ती का ऐसा बह्मास्त्र है जिसने बालाकोट में आतंकियों का नमो निशान मिटा दिया. बालाकोट में आसमान से precision guided bombs यानी अचूक निशाना लगानेवाले 6 बम गिराए गए थे. पाकिस्तान में छुपे हुए आतंकवादियों के लिए स्पाइस गाइडेड बम एक नया और सटीक हथियार बन गया है . 26 फरवरी 2010 को ये बम आतंकी ठिकानों की छत को तोड़ते हुए उसके अंदर पहुंचे और  वहां मौजूद सभी आतंकियों को मार दिया. बताया जा रहा है कि ऐसे बमों की मारक क्षमता इतनी ज्यादा है कि धमाके के बाद वहां किसी का जिंदा बचना नामुमकिन है. 

- स्पाइस बम किसी बिल्डिंग को तबाह करने के लिए नहीं बल्कि इसके अंदर मौजूद लोगों को मारने के काम आता है - इसके बम की ज़्यादातर ताक़त बिल्डिंग की छत में छेद करके अंदर घुसने के लिए होता है
- एक बार अंदर जाने के बाद ये बम फटता है और अंदर मौजूद सभी लोग इसके शॉक वेव से मारे जाते हैं. 
- यानी अगर सैटेलाइट इमेज आएगी भी तो उसमें भी किसी बिल्डिंग में ज़्यादा डैमेज नहीं दिखेगी. 
- अगर बिल्डिंग को भी तबाह डैमेज करना हो तो दूसरे हथियारों का इस्तेमाल करना होगा. 
- स्पाइस बम खासतौर पर किसी बिल्डिंग या कमांड सेंटर में मौजूद लीडरशिप को खत्म करने के काम आता है और बालाकोट में इसने ये काम शानदार तरीके से किया.

स्पाइस बम का पुराना वर्ज़न किसी बिल्डिंग को तबाह करने के लिए नहीं बल्कि इसके अंदर मौजूद लोगों को मारने के काम आता है. इसके बम की ज़्यादातर ताक़त छेद करके अंदर घुसने के लिए होती है. एक बार अंदर जाने के बाद ये फटता है और अंदर मौजूद लोग विस्फोट और शॉक वेव से मारे जाते हैं. इसीलिए स्पाइस किसी बिल्डिंग, कमांड सेंटर या किसी बंकर में मौजूद आतंकवादियों के लीडरशिप को खत्म करने के लिए बहुत कारगर है तो आइये हम आपका परिचय बालाकोट बम Spice - 2000 से कराते हैं. 

- Spice-2000 Guided Bomb के नये वर्ज़न की रेंज 100 किलोमीटर तक बढ़ाई जा सकती है.
- Satellite guidance और Electro-optical sensors की मदद से ये ख़ुद Target को ट्रैक करके उस पर हमला करता है. 
- Spice-2000 इतना सटीक है कि ये Target के 2 मीटर के दायरे में गिरता है और किसी बंकर को भी तबाह करने की ताक़त रखता है
-  दिन हो या रात, कोई भी मौसम हो, Spice अपने लक्ष्य पर अचूक वार करता है.
- Spice Bomb को Launch करने के बाद लड़ाकू विमान का Target के आसपास रहना ज़रूरी नहीं है . 
- Spice में ऐसा Guidance System होता है. इसमें लगे विंग इसे टारगेट से 70 किलोमीटर की दूरी से लॉन्च करने में मदद करते हैं. उसके बाद ये अपने टारगेट तक ख़ुद ब ख़ुद ग्लाइड करके पहुंच जाता है.