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ईरान पर हमला क्यों टाल गए ट्रंप? पुतिन से कॉल से लेकर नेतन्याहू की चेतावनी तक, जानिए INSIDE STORY

Why Trump postpone plan to attack Iran: खुली धमकी देने के बावजूद ट्रंप अब ईरान पर हमले को लेकर चुप्पी साध गए हैं. क्या वाकई उनका दिल पिघल गया है या फिर हालात कुछ ऐसे बन गए हैं कि उन्हें अपने पैर पीछे खींचने में ही भलाई नजर आई है. आज आपको इसकी इनसाइड स्टोरी बताते हैं. 

 

ईरान पर हमला क्यों टाल गए ट्रंप? पुतिन से कॉल से लेकर नेतन्याहू की चेतावनी तक, जानिए INSIDE STORY

Reasons for postponement of US attack on Iran: ईरान को लेकर खबरों की ये सुर्खियां आपको भी पता होंगी कि अमेरिका ने ईरान पर हमला रोक दिया. सवाल है कि ये ट्रंप का यूटर्न है. या हमले की तैयारी का कोई नया पैटर्न? पूरी वर्ल्ड मीडिया में इसे लेकर अलग अलग कयास लगाए जा रहे हैं. कोई कह रहा है ईरान पर हमले से पहले ट्रंप इसके नतीजों से डर गए. कोई कह रहा कि सऊदी अरब जैसे सहयोगी देशों ने ये हमला रुकवा दिया है. लेकिन ईरान पर हमले का असली सच क्या यही है? क्या डॉनल्ड ट्रंप मध्य पूर्व में अपने सहयोगी देशों की सलाह पर हमले से पीछे हट गए या फिर रणनीति कुछ और है?

ट्रंप ने ईरान पर हमला क्यों टाल दिया?

ईरान पर हमले का खतरा टला, इसका मतलब क्या, खामेनेई का तख्ता-पलट रुक गया? क्या युद्ध नहीं होने से ईरान में अमेरिका का दखल बंद हो जाएगा? आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति के जेहन में चल क्या रहा है? आज की रिपोर्ट में विशेषज्ञों से समझिए ट्रंप के ब्रेन की पूरी स्कैनिंग. हमले का फुल प्लान और फिर अचानक इसे होल्ड करने की इनसाइड स्टोरी.

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असल में 5 जनवरी को शाम 7 बजे व्हाइट हाउस में हॉट लाइन पर सिग्नल मिलने लगा. यह देख व्हाइट हाउस के स्टाफ अलर्ट हो गए. कॉल के बारे में प्रेसिडेंट ट्रंप को बताया गया. ट्रंप फौरन आए. उधर से हॉट लाइन पर रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन बोल रहे थे. करीब आधे घंटे की बातचीत में ज्यादातर वक्त ट्रंप सिर्फ़ सुनते रहे. .. आख़िर में उन्होंने कहा -ओके. 

उसी दिन ट्रंप को दूसरा कॉल बेंजामिन नेतन्याहू का मिला. कॉल पर नेतन्याहू का नाम सुनकर ट्रंप थोड़ा चौंके क्योंकि रणनीतिक साझीदार होने के नाते नेतन्याहू ने कुछ घंटे पहले ही ईरान पर अटैक प्लान से सहमति जताई थी. फिर ऐसा क्या हुआ, जो नेतन्याहू ने लास्ट आवर में कॉल कर दिया. ट्रंप ने नेतन्याहू से बात की. अंत में अनमने ढंग से कहा ओके. 

अगली सुबह दुनियाभर के अखबारों की सुर्खियां बनी कि ईरान पर हमले से अमेरिका पीछे हट गया . फिलहाल ईरान पर अमेरिका हमला नहीं करेगा. अब सवाल है कि चंद घंटों में ऐसा क्या हुआ कि डॉनल्ड ट्रंप ने कदम पीछे खींच लिए. आख़िर ट्रंप और पुतिन के बीच कौन सी सीक्रेट डील हुई. नेतन्याहू ने ऐसा क्या कहा कि ईरान पर अमेरिकी हमले की पूरी हेडलाइन बदल गई.

खलीफा के खिलाफ ट्रंप का क्या है प्लान

हेडलाइन ज़रूर बदली लेकिन ये सवाल कायम रहा कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच सब कुछ सामान्य हो गया. सवाल ये भी है कि क्या अमेरिका ने ईरान पर अटैक को होल्ड किया है और आने वाले दिनों में कभी भी अटैक हो सकता है. ये सवाल इसलिए मौजूं है क्योंकि अमेरिका और ईरान की अदावत में अभी भी रत्तीभर कमी नहीं आई है. तनाव के बीच शनिवार को ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई पब्लिक के सामने आए और ट्रंप को अपराधी बताया. 

मिडिल ईस्ट में टेंशन की इस सूरत में ईरान पर हमले को लेकर जो बदली हुई सुर्खियां हैं. उसके पीछे का रणनीतिक ताना-बाना उतना ही गहरा है, जितना बड़ा ट्रंप के हमले का प्लान था. ट्रंप ने ऐलान कर दिया था कि अबकी बार ईरान को वहां मारेंगे जहां दर्द सबसे ज्यादा होता है. लेकिन अटैक के कुछ घंटे पहले ट्रंप के स्ट्रेटजिक पार्टनर्स और यहां तक कि रूसी राष्ट्रपति से बातचीत के बाद ट्रंप ने मूड बदला, इसके ठोस कारण अब साफ दिखाई देते हैं.

चलिए इसे एक एक कर समझते हैं

1. भौगोलिक दूरी

ईरान और अमेरिका के बीच की दूरी करीब 11 हजार किलोमीटर है. इसलिए ईरान पर अमेरिकी हमला मध्य-पूर्व के सहयोगी देशों के मिलिट्री बेस से ही संभव है.

2. पड़ोसी देशों का डर

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के एयरबेस 300 से 1500 किमी की रेंज में हैं. अमेरिका का एयरबेस कतर, बहरीन, कुवैत, यूएई और सउदी अरब में है. जून-2025 के अटैक के बाद ईरान ने कतर के अमेरिकी एयरबेस को तबाह कर दिया था. 

ट्रंप और उनके मध्य पूर्वी सहयोगियों को ये दृश्य अच्छी तरह याद होगा. जब अमेरिकी हमले में अपने परमाणु ठिकाने उड़ाए जाने के बाद ईरानी वायुसेना ने कतर से लेकर बहरीन, ईराक और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले कर बड़ी तबाही मचाई थी. 

सऊदी अरब ने ट्रंप को हमले से रोका

2025 के हमले में सिर्फ सऊदी अरब ही ऐसा देश था, जहां ईरान के ड्रोन और मिसाइलें नहीं गिरी. सऊदी अरब ईरान का सबसे बड़ा पड़ोसी है और अमेरिका का सबसे बड़ा रणनीतिक साझीदार भी. इस बार जब ट्रंप ने हमले की तैयारी की, तो इसके खिलाफ सबसे पहले सऊदी अरब ही खड़ा हुआ.

सऊदी अरब के शाही शासकों और ट्रंप के बीच जो मौजूदा शक्ति समीकरण है, वो दुनिया जानती है. रिश्ता भले ही तेल के लेन-देन वाला है, लेकिन इस रिश्ते का भौगोलिक सच ये है कि सऊदी अरब से बड़ा और व्यापक क्षेत्र अमेरिका को पूरे मिडिल ईस्ट में कहीं नहीं मिलेगा.

सऊदी अरब और ईरान के बीच 36 का आंकड़ा है, ये भी जगजाहिर है. लेकिन मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा देश होने के नाते सऊदी अरब को बखूबी पता है कि ट्रंप के स्केल पर अगर इस क्षेत्र में युद्ध छिड़ा तो फिर कोई नहीं बचेगा. 
 
इसकी एक मिसाल कतर के अल उदैद में अमेरिका का एयरबेस ही है, जिसे ईरान ने जिस तरह जून 2025 के हमले में तबाह किया था. उसे देखते हुए ट्रंप ने युद्ध के ऐलान के साथ अपने सैनिकों को हटने का ऑर्डर दे दिया था.

युद्ध की आशंका से डरे हुए हैं पड़ोसी देश

इस खतरे को देखते हुए सऊदी अरब और तमाम देशों ने कह दिया है, 'ईरान पर हमला क्षेत्र की शांति भंग करेगा. हम अपनी जमीन और एयरस्पेस के इस्तेमाल की इजाजत ईरान पर हमले के लिए नहीं देंगे.' 

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को मिडिल ईस्ट का ये मैसेज एकमुश्त गया. सऊदी अरब से लेकर, कतर, बहरीन, यूएई, इराक और इजिप्ट जैसे 8 देशों ने साफ कह दिया कि हम इलाके में कोई युद्ध नहीं चाहते. इन देशों ने ईरान से भी कहा कि अमेरिका अगर हमला करता है तो वो उन्हें निशाना न बनाए. लेकिन सबसे दिलचस्प बात. ईरान के जानी दुश्मन इजराइल ने भी अमेरिकी हमले से ठीक पहले ट्रंप को रोकने का फैसला किया. क्यों, इसे समझिए. 

जून 2025 में जब अमेरिका ने ईरान पर अचानक हमले का फैसला किया, तब दुनिया ने देखा. लेकिन इस हमले के पहले जो नेतन्याहू का सीक्रेट प्लान था उसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. 

नेतन्याहू बोले- हमला टाल दे अमेरिका!

नेतन्याहू के बारे में अब ये ओपन सीक्रेट है कि वो पड़ोसियों पर हमले के ऑर्डर के साथ स्पेशल प्लेन से किसी सेफ जगह पर चले जाते हैं और वहीं से वॉर ऑर्डर्स देते हैं. लेकिन इस बार नेतन्याहू ने अपना स्पेशल प्लेन रोककर ट्रंप को फोन किया और ईरान पर हमला रोकने की कुछ ठोस वजहें बताईं.

दरअसल जून 2025 में इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के चलते इजराइल की मिसाइल पावर कम हो चुकी है. इजराइल का ‘आयरन डोम’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी कमजोर हो गया है. दोबारा मिसाइल बैटरीज की पूरी कैपेसिटी पाने और आयरन डोम को बड़े हमले के लिए तैयार करने में समय लगता है. इजराइल को लगता है कि अगर ईरान की सरकार ने तख्तापलट की कोशिश को नाकाम कर दिया, तो सरकार और ज्यादा मजबूत हो जाएगी. 

यानी अगर हमले के बाद भी अगर खामेनेई की हत्या या तख्ता पलट नहीं हुआ, तो ईरान इजरायल को चैन से नहीं रहने देगा. हमले के आखिरी वक्त में इजराइल पीछे हट गया, मिडिल ईस्ट के 8 सहयोगी देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल करने से रोक दिया. तो क्या यही वजह है ट्रंप ने हमला टाल दिया? क्या खुद अमेरिका ईरान पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार था? इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

तो क्या अब ईरान से संकट टल गया है?

अमेरिका ने ईरानी हमले की तैयारी के मद्देनजर दक्षिणी चीन सागर से अपने युद्धपोत अब्राहम लिंकन को मिडिल ईस्ट की तरफ रवाना किया था. लेकिन ये ऑर्डर आने के बाद लिंकन को ईरान के पास समुद्री क्षेत्र में पहुंचने में कम से कम एक हफ्ते का समय लगेगा. अगर इस बीच अमेरिका हमला करता तो उसके पास ईरान के हमले का जवाब देने के लिए कोई काउंटर अटैक कैरियर नहीं होता. 

'ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे से NATO को लगेगा झटका, पुतिन होंगे सबसे खुश', ट्रंप पर भड़के स्पेनिश पीएम सांचेज

हालांकि ये युद्धपोत अभी भी ईरान की तरफ बढ़ रहा है. तो क्या ट्रंप का अटैक प्लान वाकई होल्ड पर है या इस बहाने अमेरिकी सेना बड़े और औचक हमले की तैयारी कर रही है...? इसे दो प्वाइंट से समझिए

अटैक पर ट्रंप को समझना मुश्किल है!

20 जून 2025

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर हमले के बारे में 2 हफ्ता बाद फैसला करेंगे

22 जून 2025

अमेरिकी सेना ने बी-2 बॉम्बर्स के बेड़े के साथ ईरान पर बड़ा हमला कर दिया

1 जनवरी 2026

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने ट्रंप से बातचीत के लिए हामी भरी. लगा अब तनाव कम होगा

3 जनवरी 2026

लेकिन ट्रंप ने अपनी स्पेशल डेल्टा फोर्स लगाकर मादुरो को प्रेसिडेंट हाउस से उठवा लिया

तो क्या ट्रंप के लिए वेनेजुएला जैसा ही आसान होगा ईरान पर औचक हमला? 

जानकार बताते हैं कि ईरान न सिर्फ ताकतवर है, बल्कि रूस और चीन जैसे सुपरपावर्स के साथ भी इसके साथ हैं. अमेरिका जानता है कि अगर उसने ईरान पर हमला किया, तो रूस कतई चुप नहीं बैठेगा. ट्रंप से फोन पर बातचीत में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यही कहा था- ईरान पर हमला बड़ी जंग को दावत दे सकता है. इसलिए सावधान.

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Devinder Kumar

अमर उजाला, नवभारत टाइम्स और जी न्यूज चैनल में काम कर चुके हैं. अब जी न्यूज नेशनल हिंदी वेबसाइट में अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं. राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और जियो पॉलिटिकल मामलों पर गहरी पकड़ हैं....और पढ़ें

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