टॉयलेट जाने से बचने के लिए लंबे समय तक बिना पानी के रहती हैं महिला पुलिस कर्मी : सर्वे

एक ओर जहां सरकार महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने के लिए पुलिस बल में उनकी अधिक संख्या में भर्ती करने की योजना बना रही है वहीं दूसरी ओर इस बल में कार्यरत महिलाओं के बीच किए गए एक सर्वे में पाया गया कि उन्हें शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव, असुविधाजनक ड्यूटी तथा निजता न होने जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है।

टॉयलेट जाने से बचने के लिए लंबे समय तक बिना पानी के रहती हैं महिला पुलिस कर्मी : सर्वे
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली : एक ओर जहां सरकार महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने के लिए पुलिस बल में उनकी अधिक संख्या में भर्ती करने की योजना बना रही है वहीं दूसरी ओर इस बल में कार्यरत महिलाओं के बीच किए गए एक सर्वे में पाया गया कि उन्हें शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव, असुविधाजनक ड्यूटी तथा निजता न होने जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है।

ड्यूटी के दौरान महिला पुलिस कर्मियों को कई घंटे प्यासे रहना पड़ता है क्योंकि आसपास शौचालय की सुविधा बमुश्किल ही होती है। उनका कहना है कि उन्हें जो बुलेट प्रूफ जैकेट या शरीर की सुरक्षा के लिए जैकेट मुहैया कराया जाता है वह इतना कसा हुआ होता है कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये जैकेट पुरुषों के शरीर की जरूरत के अनुसार बनाए गए हैं।

सर्वेक्षण के नतीजे और उसकी सिफारिशों को ‘पुलिस में महिलाओं पर सातवें राष्ट्रीय सम्मेलन’ में पेश किया गया। सम्मेलन का आयोजन ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डवलपमेंट तथा सीआरपीएफ ने इस साल संयुक्त रूप से गुड़गांव में किया था। सर्वे के नतीजे ऐसे समय पर सार्वजनिक किए गए हैं जब गृह मंत्रालय ने केंद्रीय बलों में कॉन्स्टेबल के 33 फीसदी पदों पर तथा सीमा की निगरानी करने वालों में 15 फीसदी पदों पर महिलाओं की भर्ती करने का ऐलान किया है। मंत्रालय ने राज्य सरकारों से उसका अनुसरण करने का आग्रह भी किया है।

महिला अधिकारियों ने निजता की भी आवश्यकता जताई क्योंकि महिलाओं और पुरुषों के लिए निजी स्थान की अवधारणा अलग-अलग है। यह सर्वे आईपीएस अधिकारी और सीमा की निगरानी करने वाले बल एसएसबी में महानिरीक्षक रेणुका मिश्रा ने किया जिनका कहना है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को निजता की ज्यादा जरूरत होती है। रेणुका 1990 के बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की पुलिस अधिकारी हैं। उन्होंने सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स, सशस्त्र सीमा बल, हैदराबाद स्थित नेशनल पुलिस एकेडमी तथा पंजाब, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात एवं ओडिश के राज्य पुलिस बल की विभिन्न रैंक की कर्मियों एवं अधिकारियों से बात की। उन्होंने एक संसदीय समिति की रिपोर्ट तथा दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की रिपोर्ट की भी मदद ली।

सर्वे में पाया गया कि मूत्र त्याग की आवश्यकता से बचने के लिए महिला पुलिस कर्मी लंबे समय तक बिना पानी के रहती हैं। साथ ही नौकरी के दौरान उन्हें कपड़े धोने और यहां तक कि उनके अंत:वस्त्र सुखाने तक के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाता। बल में टोपी, जूते, ट्रैक सूट और डुंगरी भी महिलाओं को फिट नहीं होतीं क्योंकि ये सभी पुरुषों के शरीर को ध्यान में रख कर बनाई जाती हैं।

महिलाओं की हथेली छोटी होती है इसलिए पिस्टल या इन्सास रायफल जैसे हथियारों को कस कर पकड़ना उनके लिए मुश्किल होता है।

सर्वे के अनुसार, महिला सिपाहियों को गर्भावस्था या मासिक धर्म के दौरान खास तौर पर कार्य के लिए रिपोर्ट करने की खातिर भारी वाहनों या ट्रकों में यात्रा करने में मुश्किल होती है। सीमा प्रहरी बलों में महिलाओं ने कहा कि सीमाई इलाकों में तैनाती के दौरान उन्हें लंबे समय तक अपने बच्चों से दूर रहना पड़ता है और ड्यूटी के समय तथा अनुकूल अवसंरचना के अभाव में वे अपने बच्चों को स्तनपान तक नहीं करा पातीं।