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Year Ender 2017: वायु प्रदूषण, गंगा-यमुना को स्वच्छ बनाने जैसे मुद्दों में उलझा रहा एनजीटी

सबसे अहम रहा जब राष्ट्रीय राजधानी समेत उत्तर भारत भयंकर वायु प्रदूषण की चपेट में आ गया तब एनजीटी क्रमिक कार्ययोजना लेकर सामने आया.

Year Ender 2017: वायु प्रदूषण, गंगा-यमुना को स्वच्छ बनाने जैसे मुद्दों में उलझा रहा एनजीटी
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)

नई दिल्ली: हिंदू तीर्थाटन के विनियमन से लेकर (यमुना के मैदान को नुकसान पहुंचाने के कारण) श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग समेत किसी को भी नहीं बख्शने तक के अपने आदेशों से विवादों में रहा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने वर्ष 2017 में राजग सरकार की भी गंगा नदी को स्वच्छ बनाने में विफल रहने पर खिंचाई की. अधिकरण के न केवल गंगा पर फैसले से केंद्र की किरकिरी हुई बल्कि यमुना को भी स्वच्छ रखने के मुद्दे पर अधिकरण की टिप्पणी से वह बैकफुट पर रहा.

वैसे 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध हटाने से इनकार करने जैसे अहम फैसलों से एनजीटी की वाहवाही हुई, लेकिन वैष्णोदेवी के श्रद्धालुओं की संख्या सीमित करने और अमरनाथ में पवित्र शिवलिंग के सम्मुख तीर्थयात्रियों को मौन रहने का आदेश देकर वह हिंदू धार्मिक संगठनों के निशाने पर आ गया. लेकिन बाद में अधिकरण ने सफाई दी कि अमरनाथ गुफा में मंत्रोच्चार एवं आरती पर कोई रोक नहीं है.

एनजीटी मस्जिदों समेत धार्मिक स्थलों पर लाऊड स्पीकरों से होने वाले प्रदूषणों पर सख्त रुख अपनाया और दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया. उसने ने प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पशुओं का कत्ल किये जाने के कारण खून सीधे यमुना में बहने नहीं जाने दिया जाए.

साल के आखिर तक एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार पांच साल के कार्यकाल के बाद सेवानिवृत हो गये और उनकी जगह न्यायमूर्ति यू डी साल्वी ने ली. एनजीटी ने जंतर मंतर के पास धरनों एवं प्रदर्शनों पर रोक लगा दिया और कहा कि राज्य इस पुरातात्विक स्थल के आसपास रहने वालों के प्रदूषणमुक्त माहौल के अधिकार की सुरक्षा करने में विफल रहा. सबसे अहम रहा जब राष्ट्रीय राजधानी समेत उत्तर भारत भयंकर वायु प्रदूषण की चपेट में आ गया तब एनजीटी क्रमिक कार्ययोजना लेकर सामने आया.