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योग में गोल्ड मेडलिस्ट मां के साथ कर रही मजदूरी, पिता बेचते हैं गुब्बारे

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) पर जहां पूरी दुनिया योगासन में व्यस्त थीं, वहीं छत्तीसगढ़ की रहने वाली दामिनी साहू ईंट और गारा ढो रही थी. जी हां, यह कहानी है अंतरराष्ट्रीय योग स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली दामिनी की. अंग्रेजी की एक प्रतिष्ठित वेबसाइट में प्रकाशित खबर के मुताबिक दामिनी घर खर्च में मदद करने के लिए मजदूरी करती है.

योग में गोल्ड मेडलिस्ट मां के साथ कर रही मजदूरी, पिता बेचते हैं गुब्बारे
छत्तीसगढ़ सरकार ने योग के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए ‘योग कमीशन’ बनाया है.

रायपुर: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) पर जहां पूरी दुनिया योगासन में व्यस्त थीं, वहीं छत्तीसगढ़ की रहने वाली दामिनी साहू ईंट और गारा ढो रही थी. जी हां, यह कहानी है अंतरराष्ट्रीय योग स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली दामिनी की. अंग्रेजी की एक प्रतिष्ठित वेबसाइट में प्रकाशित खबर के मुताबिक दामिनी घर खर्च में मदद करने के लिए मजदूरी करती है.

पाकिस्‍तान के खिलाड़ी को हराया

रायपुर से 65 किमी दूर दर्रा गांव (जिला धमतरी) की रहने वाली दामिनी ने तमाम परेशानियों के बावजूद 6 से 9 मई तक काठमांडू में आयोजित होने वाली ‘साउथ एशियन योगा स्पोट्र्स चैंपियनशिप’ में हिस्सा लिया था. यहां उसने पाकिस्तान के खिलाड़ी को धूल चटाकर गोल्ड पर कब्जा किया था.

ब्‍याज पर पैसे लेकर गई

एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी वेबसाइट से दामिनी ने बातचीत में बताया कि मेरे पास नेपाल जाने के लिए पैसे नहीं थे. इसके लिए मैंने 4 मई को केंद्रीय मंत्री अजय चक्रधर से आर्थिक मदद के लिए गुजारिश की लेकिन उनकी तरफ से मदद नहीं मिली. अंत में मैंने दो प्रतिशत प्रतिमाह के ब्याज पर पैसे लेकर नेपाल जाकर चैंपियनशिप में हिस्सा लिया.

दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने योग के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए ‘योग कमीशन’ बनाया है. वेबसाइट के मुताबिक इस बारे में जब केंद्रीय मंत्री से बात करने की कोशिश की तो उनसे बात नहीं हो सकी. सात साल की उम्र में योग का अभ्यास शुरू करने वाली दामिनी बताती हैं कि केंद्रीय मंत्री मेरे पास के ही कुरुड लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं.

प्रतिदिन आठ से दस घंटे दैनिक मजदूरी करके 100 से 150 रुपये कमाने वाली दामिनी बताती हैं कि मैं पिछले सात महीने से लेबर कार्ड बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगा रही हूं. परिवार का गुजारा चलाने के लिए मेरी मां भी मजदूरी करती हैं. दामिनी के पिता दिव्यांग होने के कारण काम करने में असमर्थ हैं और वह गुब्बारे बेचकर परिवार के भरण पोषण में मदद करते हैं.

दामिनी के तीन छोटे भाई-बहन हैं. बीकॉम प्रथम वर्ष की परीक्षा पास कर चुकी दामिनी ने बताया कि मेरा कॉलेज ही मेरे लिए प्रेरणास्रोत रहा. अब मैं शाम को मजदूरी के बाद समय मिलने पर योग करती हूं.

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