ZEE Jankari: JNU से राष्ट्र निर्माण या राष्ट्र बदनाम?

 विदेश में छात्र अपने राष्ट्र के पक्ष में योगदान देते हैं... जबकि जेएनयू में देश के टुकड़े टुकड़े करने वाला गैंग सक्रिय है .

ZEE Jankari: JNU से राष्ट्र निर्माण या राष्ट्र बदनाम?

भारत एक विकासशील देश है. भारत के छात्रों को नई सोच और नई दिशा की ज़रूरत है . कहा जाता है कि छात्रों का कर्तव्य देश के भविष्य का निर्माण करना होता है. लेकिन आज हमारे देश में कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को सिर्फ छात्र राजनीति का अड्डा बना दिया गया है . यहां पढ़ने वाले कुछ छात्र...बाकी छात्रों का ब्रेन वॉश करते हैं... और देश के विकास को रोकने की कोशिश करते हैं.

लेकिन ये सब भारत में आज से नहीं हो रहा...बल्कि देश का नुकसान करने वाली इस राजनीति के बीज..कई वर्ष पहले ही बो दिए गए थे . आध्यात्मिक गुरू ओशो ने आज से करीब 50 वर्ष पहले अपने एक आख्यान में बताया था... कि कैसे राजनीति करने वाले कुछ छात्र... बाकी छात्रों को भी वैज्ञानिक दृष्टि हासिल करने से रोकते हैं... जीवन भर सिर्फ राजनीति करते रहते हैं और फिर बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन करते हैं. आप ओशो के आख्यान का एक हिस्सा सुनिए..फिर हम अपने इस विश्लेण को आगे बढ़ाएंगे .

दुनिया के कई देशों में क्रांति छात्र आंदोलनों से शुरु हुई है. और जेएनयू के बहाने अपनी सियासत चमकाने वाले छात्र नेता भी ऐसा ही सपना देख रहे हैं .वर्ष 2010 में पश्चिम एशिया में Arab Spring क्रांति की शुरुआत हुई थी. सोशल मीडिया की मदद से युवाओं ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाया. छात्र शक्ति की वजह से ही Tunisia, Egypt, Libya और Yemen सहित कई देशों में क्रांति की लहर पहुंच गई थी. इसी तरह वर्ष 1989 में जर्मनी में बर्लिन की दीवार गिरने के बाद पड़ोसी देश Czechoslovakia में छात्र क्रांति शुरु हो गई थी.

सिर्फ 11 दिनों में 5 लाख प्रदर्शनकारियों ने वहां की कम्युनिस्ट सरकार को गिराकर नई सरकार बना दी थी. 1970 के दशक में अमेरिका में वियतनाम युद्ध के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन की शुरुआत की थी. तब वहां पर बहस इस बात पर भी हुई थी कि छात्रों को ऐसे प्रदर्शन का हिस्सा बनना चाहिए या नहीं. ये बहस अपने देश में भी हो रही है.

लेकिन इन छात्र आंदोलनों और जेएनयू के प्रदर्शन में एक बड़ा अंतर है. विदेश में छात्र अपने राष्ट्र के पक्ष में योगदान देते हैं... जबकि जेएनयू में देश के टुकड़े टुकड़े करने वाला गैंग सक्रिय है .

छात्र जीवन में राजनीति और सवाल पूछने का भी अपना महत्व है. देश के कई बड़े नेता..छात्र राजनीति की ही देन हैं. लेकिन अगर इस राजनीति के बहाने...देश विरोधी नारेबाज़ी की जाएगी और देश के टुकड़े टुकड़े करने के सपने देखे जाएंगे..तो ये देश के भविष्य के लिए खतरनाक होगा.