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मोइन कुरैशी के पूर्व इंटरपोल चीफ से संबंधों का ज़ी बिजनेस ने किया खुलासा

क्या वो देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहा था? क्या वो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध लगा रहा था? जी हां, यहां बात हो रही है कानपुर निवासी हवाला कारोबारी मोइन अख्तर कुरैशी की। ज़ी बिजनेस ने मोइन कुरैशी के इंटरपोल कनेक्शन को लेकर एक और बड़ा खुलासा किया है जिसमें पता चला है कि इंटरपोल के एक बड़े अधिकारी से कुरैशी ने मिस्र पुलिस के चंगुल में फंसे अपने दो करीबियों को इंटरपोल के रेड अलर्ट से नाम हटवाने के लिए मदद मांगी थी।

मोइन कुरैशी के पूर्व इंटरपोल चीफ से संबंधों का ज़ी बिजनेस ने किया खुलासा

नई दिल्ली : क्या वो देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहा था? क्या वो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध लगा रहा था? जी हां, यहां बात हो रही है कानपुर निवासी हवाला कारोबारी मोइन अख्तर कुरैशी की। ज़ी बिजनेस ने मोइन कुरैशी के इंटरपोल कनेक्शन को लेकर एक और बड़ा खुलासा किया है जिसमें पता चला है कि इंटरपोल के एक बड़े अधिकारी से कुरैशी ने मिस्र पुलिस के चंगुल में फंसे अपने दो करीबियों को इंटरपोल के रेड अलर्ट से नाम हटवाने के लिए मदद मांगी थी।

इस बड़े खुलासे से पहले ज़ी बिजनेस ने इंटरपोल, अमेरिका की सबसे बड़ी जांच एजेंसी एफबीआई और भारतीय जांच एजेंसी सीबीआई के साथ इंटरपोल के उस आला अधिकारी से भी संपर्क साधा जो मोइन कुरैशी को मदद कर रहा था। इंटरपोल जिसके हाथों में दुनिया भर के अपराधियों को पकड़ने का जिम्मा होता है उसकी डोर देश के सबसे बड़े हवाला कारोबारी मोइन कुरैशी के हाथ में थी।

ज़ी बिजनेस ने मोइन कुरैशी के जिस इंटरनेशनल कनेक्शन को डिकोड किया उसमें मोइन कुरैशी इंटरपोल अधिकारी से कहता है- 'मेरे भाई, कैसे हैं आप। मैं उम्मीद करता हूं सब ठीक ठाक होगा। भारत का मेरा जिगरी दोस्त जो दुबई में रहता है, दुबई में उसकी कंपनी है। वह इजिप्ट पुलिस के चंगुल में फंस गया है और आपके ऑफिस ने उसके खिलाफ रेड अलर्ट का नोटिस जारी कर दिया है। मैंने आपको कल एक मेल भेजा है, कृपया उसे देख लें। वह सही आदमी है। कृपया उसकी मदद कीजिए।' यह संदेश 11 दिसंबर 2012 को रात के 22.18 बजे मोइन कुरैशी ने भेजा था। उसके जवाब में इंटरपोल का अधिकारी कहता है, 'हैलो मेरा भाई, पूरी जानकारी मेरे निजी ई-मेल खाते में भेज दो।'

दरअसल, मोइन कुरैशी इंटरपल के जिस अधिकारी को एसजी कहकर बात कर रहा था वह शख्स दुनिया में इंटरपोल का सबसे ताकतवर व्यक्ति है। रोनाल्ड के. नोबेल (एसजी) लगातार 14 साल तक इंटरपोल को सेक्रेट्री जनरल रहा। अमूनन सेक्रेट्री जनरल पद पर किसी भी अधिकारी का कार्यकाल पांच साल से ज्यादा का नहीं होता है लेकिन रोनाल्ड को 2005 और 2010 में दो बार सेक्रेट्री जनरल बनाया गया। जब अमेरिका पर 9/11 का हमला हुआ था तब भी रोनाल्ड इंटरपोल का सेक्ट्री जनरल था। इससे पहले रोनाल्ड अमेरिका की सेक्रेट सर्विस, कस्टम सर्विस, ब्यूरो ऑफ एल्कोहल, टोबेको के अलावा इंटरनल रिवेन्यू सर्विसेज क्रिमिनल इनवेस्टिगेशन डिवीजन में अहम पदों पर काम कर चुका था।

दो हफ्ते पहले ज़ी बिजनेस ने मोइन कुरैशी को डिकोड किया था उस वक्त एसजी के नाम का खुलासा नहीं हो सका था। गहन छानबीन के बाद जब एसजी के ऊपर से नकाब उतरा तो पता चला कि किस तरह से इंटरपोल का आला अधिकारी देश और दुनिया की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

12 दिसंबर 2012 को मोइन कुरैशी फिर से एसजी को मेल करता है जिसमें कहा गया है- 'भाई, आपको मेल भेज दिया है। कृपया उसे देख लें कि उसमें आप क्या कर सकते हैं।' ये मेल 17.08 बजे भेजा गया था। इसकी तारीख में मोइन एक और मेल 18.14 बजे करता है जिसमें मोइन एसजी को लिखता है, 'संशोधन। स्टॉप सर्च नंबर 4150 में मेरे भाई का सही नाम एलाना शिराज़ अब्दुल रज्जाक है। सीईओ का सही नाम विनोद करनाम है।'

इस मेल का एसजी यानी इंटरपोल का अधिकारी जवाब देता है जिसमें कहा गया, 'हैलो मेरे भाई, मैं इसपर काम कर रहा हूं।' यह जवाब मोइन कुरैशी को 13 दिसंबर 2012 को 13.27 बजे दिया गया है। इसी तारीख में एसजी कुरैशी को एक और मेल 13.29 बजे करता है जिसमें वह रज्जाक और करनाम दोनों के जन्म की तारीख की मांग करता है। मोइन ने तुरंत इसका जवाब दिया जिसमें जन्म की तारीख जल्दी भेजने की बात कही गई।

जी हां! ये हकीकत है एक अधिकारी और एक अपराधी के बीच का। एक इंटरपोल का सबसे बड़ा अधिकारी और दूसरा देश का सबसे बड़ा हवाला कारोबारी, जिसके काले कारनामों की जांच देश का प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है। पैसों की हेराफेरी का उस्ताद मोइन कुरैशी देश की जांच एजेंसियों के लिए तो सिरदर्द है ही, भारत में बैठे-बैठे मिस्र जैसे देशों के गुनहगारों की भी मदद कर रहा है।

एक जिम्मेदार मीडिया हाउस होने के नाते ज़ी बिजनेस ने इंटरपोल के पूर्व सेक्रेट्री जनरल रोनाल्ड नोबेल (एसजी) से ई-मेल के जरिये मोइन कुरैशी के साथ संबंधों पर कई सवाल किए। दरअसल जो शख्स लगातार 14 साल तक इंटरपोल का सेक्रेट्री जनरल का पद संभाला हो, उस शख्स से हवाला के आरोपों में फंसे मोइन कुरैशी की करीबी कैसे हो सकती है, वाकई यह चौंकाने वाला सवाल है। ज़ी बिजनेस ने रोनाल्ड से जब मोइन कुरैशी से संबंधों पर सवाल किया तो रोनाल्ड का कहना था, 'मोइन और उसकी फैमिली से मेरे दोस्ताना संबंध रहे हैं। चूंकि मोइन पहले से ही भारत में सीबीआई के निदेशक रहे एपी सिंह का दोस्त था सो मैंने भी उसकी दोस्ती स्वीकार की।'

ज़ी बिजनेस ने मेल के जरिये अन्य कई सवाल रोनाल्ड पर दागे जिसमें पूछा गया था कि क्या आप ये जानते थे कि मोइन कुरैशी पर हवाला कारोबार के गंभीर आरोप हैं और भारतीय एजेंसियां इसकी जांच कर रही है? मोइन कुरैशी ने आपको कई तोहफे भी दिए, क्या कहना है आपका? कुरैशी ने दो अंतरराष्ट्रीय अपराधी का नाम रेड अलर्ट से हटवाने की आपसे गुजारिश की थी और आप कुरैशी की मदद कर रहे थे, क्या जवाब है आपका? भले ही इन तमाम सवालों में रोनाल्ड अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करने के अंदाज में जवाब दिया, लेकिन वाकई अगर ये सच है तो फिर रोनाल्ड साहब अब्दुल रज्जाक और विनोद करनम के विवरण क्यों मांग रहे थे। जाहिर सी बात है, मोइन कुरैशी इन दोनों का नाम इंटरपोल के रेड अलर्ट से हटवाना चाहता था।