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ZEE जानकारी: कारगिल युद्ध में जीत की 20वीं सालगिरह

सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने बहुत साफ़-साफ़ शब्दों में चेतावनी दी है. जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि पाकिस्तान अब दोबारा कारगिल में घुसपैठ जैसी हिम्मत नहीं करेगा.

ZEE जानकारी: कारगिल युद्ध में जीत की 20वीं सालगिरह

कल पूरा देश कारगिल युद्ध में जीत की 20वीं सालगिरह मनाएगा...हालांकि जश्न तो इस महीने की शुरुआत से चल रहा है. और ज़ी न्यूज़ की टीम कारगिल में हज़ारों फीट की ऊंचाई पर उन मोर्चों पर जाकर रिपोर्टिंग कर रही है...जहां वर्ष 1999 में पाकिस्तान की सेना के साथ ये जंग लड़ी गई थी. पाकिस्तान की सेना ऐसा दुस्साहस दोबारा ना करे,

इसे लेकर आज सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने बहुत साफ़-साफ़ शब्दों में चेतावनी दी है. जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि पाकिस्तान अब दोबारा कारगिल में घुसपैठ जैसी हिम्मत नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि कारगिल के पहाड़ों पर भारत की स्थिति इतनी मज़बूत है कि पाकिस्तान के लिये 1999 जैसी घुसपैठ दोहराना मुमकिन नहीं है. और पाकिस्तान को ये समझना चाहिये कि भारत भी ऐसे मिशन अंजाम दे सकता है. 

जनरल बिपिन रावत की बातों में आत्मविश्वास साफ़ झलक रहा है. और सेना का यही आत्मविश्वास है...जिसकी वजह से आज हम और आप सुरक्षित हैं, पूरा देश सुरक्षित है. हमें पूरा भरोसा है कि भारतीय सेना के हाथों में हमारा देश महफ़ूज़ है. कारगिल युद्ध के 20 वर्षों के बाद ये भी सोचने का वक़्त है, कि इन दो दशकों में भारत ने इससे क्या सीखा और पाकिस्तान के लिये ये कैसा सबक़ था.

कारगिल में मिली करारी हार के बाद पाकिस्तान इस बात को समझ चुका है कि अब नियंत्रण रेखा से छेड़ख़ानी करना, सीधे युद्ध को आमंत्रण देने जैसा होगा. क्योंकि भारत दोबारा इस ग़लती के लिये उसे 20 साल पुरानी सज़ा से भी कड़ी सज़ा देगा.

पाकिस्तान के लिये दूसरा सबक़ ये है कि कारगिल जैसी घुसपैठ से कश्मीर की यथा-स्थिति नहीं बदली जा सकती. क्योंकि भारत अपनी ज़मीन वापस लेने में देरी नहीं करेगा और मुमकिन है कि अगली बार पाकिस्तान अपनी ज़मीन भी खो दे.

कारगिल में भारतीय सेना की जीत ने पाकिस्तान की Nuclear Blackmail वाली नीति को भी ख़त्म कर दिया था. क्योंकि तब पाकिस्तानी सेना के जनरल रहे परवेज़ मुशर्रफ़ को ये ग़लतफ़हमी थी कि परमाणु युद्ध के ख़तरे को देखते हुए भारत ख़ामोश बैठ जाएगा.
कारगिल युद्ध के बाद पाकिस्तान और ज़्यादा अस्थिर हुआ है. पाकिस्तान में लोकतंत्र आज भी सुरक्षित नहीं है.

ये कहा जा सकता है कि आज इमरान ख़ान की सरकार भी जनरल क़मर जावेद बाजवा के रहमो करम पर चल रही है.

इमरान ख़ान इस बात से बहुत अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने नवाज़ शरीफ़ की सरकार का कैसे तख़्ता पलटा था. ये घटना कारगिल युद्ध ख़त्म होने के ढाई महीने बाद अक्टूबर 1999 में हुई थी.

इन बीस सालों में पाकिस्तान ने सुधरने की कोई कोशिश नहीं की है. आज पाकिस्तान कंगाली की कगार पर पहुंच चुका है, लेकिन अब भी वो आतंकवाद में निवेश करने पर यक़ीन रखता है.

जबकि इन 20 वर्षों में भारत दुनिया की बुलंदी पर पहुंच चुका है. हमारे सामने 5 Trillion Dollar वाली अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य है. हम चांद पर क़दम रखने जा रहे हैं. भारत में इस वक़्त सबसे मज़बूत सरकार है. और इसलिये पाकिस्तान को आज ये समझना चाहिये कि किसी देश को आगे ले जाने के लिये आतंकवाद वाली नीति नहीं...बल्कि एक शक्तिशाली नेतृत्व और मज़बूत लोकतंत्र की ज़रूरत होती है, जो आतंकवाद के ख़िलाफ़ दुश्मन के घर में घुसकर जवाब देना जानता है.

भारत ने भी कारगिल की जंग से कई बातें सीखी हैं. अब हमारी सेना पहले से बेहतर हथियारों और उपकरणों से लैस है. हालांकि कारगिल में घुसपैठ को ख़ुफ़िया तंत्र की नाकामी कहा जाता है, इसलिये भारत ने अपनी सीमाओं पर निगरानी के लिये बड़ी तैयारी की हैं. आज हम आपको कारगिल में तैनात भारतीय सेना के कुछ हथियारों के बारे में भी बताएंगे.

इससे पहले DNA में हम आपको Drass सेक्टर में Tiger Hill, तोलोलिंग और बटालिक सेक्टर में हुई जंग के बारे में बता चुके हैं. हमने आपको कारगिल Battle School के बारे में भी बताया है. आज DNA में सेना की मुस्तैदी और उसके नये हथियारों पर विश्लेषण की बारी है...ज़ी न्यूज़ की टीम ने Tiger Hill के पास सैंडो पोस्ट से रिपोर्टिंग की है. इसे देखकर आप का यक़ीन भारतीय सेना की तैयारी पर और ज़्यादा बढ़ जाएगा.

कल विजय दिवस से पहले भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध पर एक Short Film बनाई है...इस फिल्म को आपको ज़रूर देखना चाहिये. इस फिल्म को देखकर आप कुछ मिनटों में समझ जाएंगे कि कारगिल की जंग के दौरान भारतीय सेना ने किस तरह तीन मोर्चों पर पाकिस्तान को हराया था.

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