ZEE जानकारी : देश के गांवों में शिक्षा व्यवस्था की जानकारी देता एक सर्वे

गैर सरकारी संगठन 'प्रथम' ने ग्रामीण भारत में शिक्षा के स्तर को दर्शाने वाली..Annual Status of Education Report का ताज़ा अंक प्रकाशित किया है. इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए देश के 24 राज्यों के....28 जिलों में ग्रामीण इलाकों का Survey किया गया . इस सर्वे में 28 हज़ार 323 बच्चों के शिक्षा के स्तर को नापा गया तो हैरान कर देने वाली बातें पता चलीं.

ZEE जानकारी : देश के गांवों में शिक्षा व्यवस्था की जानकारी देता एक सर्वे

ये अजीब विरोधाभास है कि एक तरफ तो हम अग्नि जैसी मिसाइलें बनाकर तकनीक के मामले में हर रोज़ नया इतिहास रच रहे हैं. और दूसरी तरफ भारत के गांवों में रहने वाले एक चौथाई बच्चे ठीक से पढ़ना लिखना तक नहीं जानते.  ये देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ... एक कड़वा सच है.. जिसे भारत की उन्नति के सपने देखने वाला कोई भी व्यक्ति.. बर्दाश्त नहीं कर पाएगा. देश के गावों में करीब 57 प्रतिशत छात्र ऐसे हैं जिन्हें सही तरीके से... जोड़ना और घटाना भी नहीं आता. हैरानी की बात ये है कि ये सर्वे 14 से 18 वर्ष की उम्र वाले छात्रों पर किया गया है. इसका मतलब ये हुआ कि ये कोई छोटी उम्र के बच्चे नहीं है जिनकी पढ़ाई की आदतों को... गलती समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाए.

इस सर्वे से पता चला है कि इन छात्रों की दिलचस्पी.. पढ़ाई-लिखाई से ज़्यादा.. मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने में है. आपने अकसर देखा होगा कि आजकल बच्चों को किताबें पढ़नी आती हों या ना आती हों.. लेकिन वो मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना बहुत छोटी उम्र में ही सीख लेते हैं. उन्हें Whatsapp और Facebook का इस्तेमाल करना तो आता है.. लेकिन पढ़ाई लिखाई में वो Zero हैं. 

गैर सरकारी संगठन 'प्रथम' ने ग्रामीण भारत में शिक्षा के स्तर को दर्शाने वाली..Annual Status of Education Report का ताज़ा अंक प्रकाशित किया है. इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए देश के 24 राज्यों के....28 जिलों में ग्रामीण इलाकों का Survey किया गया . इस सर्वे में 28 हज़ार 323 बच्चों के शिक्षा के स्तर को नापा गया तो हैरान कर देने वाली बातें पता चलीं. आपको जानकर दुख होगा कि ग्रामीण भारत में बच्चों की पढ़ाई का स्तर बहुत नीचे गिर चुका है. इस सर्वे के दौरान जो सवाल छात्रों से पूछे गये वो मैं आपके सामने रख रहा हूं. ये बहुत ही आसान सवाल हैं लेकिन हैरानी की बात ये है कि 14 से 18 वर्ष के छात्र.. इतने आसान सवालों के उत्तर भी नहीं दे पाए.

आप सवालों  पर गौर कीजिए... 
पहला सवाल था कि अगर कोई व्यक्ति रात को 9 बजकर 30 मिनट पर सो जाता है और सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर उठता है तो ये बताइये कि उसने कितने घंटे की नींद ली.. इसका सही जवाब है 9 घंटे लेकिन हैरानी बात ये है कि 60 प्रतिशत छात्र, इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाए 

इसके अलावा छात्रों से पूछा गया कि अगर आपके पास 2 हज़ार रुपये ... पांच सौ रुपये...पचास रुपये और बीस रुपये का एक एक नोट है तो आपके पास कुल मिलाकर कितने रूपये हैं. इसका जवाब है 2 हज़ार 570 रूपये लेकिन 24 प्रतिशत छात्रों को इसका जवाब नहीं पता था 

छात्रों से ये पूछा गया कि घड़ी में क्या समय हुआ है ? और दुख की बात ये है कि 40 प्रतिशत बच्चे.. इसका सही जवाब नहीं दे पाए. ये बच्चे घड़ी देखना नहीं जानते थे. अब आप समझ सकते हैं कि देश के भविष्य कहे जाने वाले इन छात्रों का समय कितना ख़राब चल रहा है.

छात्रों से ये पूछा गया कि अगर किसी T-Shirt की कीमत 3 हज़ार रूपये हैं और इस पर 10 प्रतिशत की छूट दी गई है तो इसे खरीदने के लिए आपको कितने पैसे देने होगे. इसका सही जवाब है 2 हज़ार 700 रूपये लेकिन 62 प्रतिशत छात्र इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए .

इन छात्रों को भारत का नक्शा दिखाया गया और पूछा गया कि ये किस देश का नक्शा है तो इनमें से 14 प्रतिशत छात्र इस प्रश्न का उत्तर भी नहीं दे पाए. इसके अलावा 36 प्रतिशत छात्र.. भारत की राजधानी का नाम नहीं बता पाए. 

21 प्रतिशत छात्रों को ये भी पता नहीं था कि वो किस राज्य में रहते हैं जबकि 58 प्रतिशत छात्र भारत के नक्शे में अपना राज्य नहीं ढूंढ पाए. अब आप खुद ही सोचिए कि ये कमज़ोर छात्र भारत का उज्जवल भविष्य कैसे लिखेंगे? इनके भरोसे भारत विश्व-गुरू कैसे बनेगा?

चिंता की बात ये भी है कि 42 प्रतिशत युवा... पढ़ाई के साथ साथ मज़दूरी और खेती भी करते हैं. इन युवाओं पर अपनी पढ़ाई के साथ साथ अपने अपने परिवार की भी ज़िम्मेदारी है. इसलिए ऐसे हालात के लिए सिर्फ इन छात्रों को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता. इसके लिए सिस्टम.. समाज और इन छात्रों के परिवार भी ज़िम्मेदार हैं.