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ZEE जानकारी: 'नाग' मिसाइल के तीनों टेस्ट रहे सफल

DRDO यानी Defence Research & Development Organisation के साथ मिलकर सेना ने पोरखण रेंज में नाग मिसाइल के 3 परीक्षण किये हैं जो पूरी तरह कामयाब रहे हैं.

ZEE जानकारी: 'नाग' मिसाइल के तीनों टेस्ट रहे सफल

अब एक ऐसी ख़बर जो देश के हर नागरिक में गर्व की मात्रा को डबल कर देगी. ये देश के बहादुर जवानों का हौसला और बढ़ा देगी . स्वदेशी Anti Tank Guided Missile नाग को सेना में शामिल करने की दिशा में एक और क़दम आगे बढ़ाया गया है.

DRDO यानी Defence Research & Development Organisation के साथ मिलकर सेना ने पोरखण रेंज में नाग मिसाइल के 3 परीक्षण किये हैं जो पूरी तरह कामयाब रहे हैं.

एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल या सेना की ज़ुबान में कहें ATGM ये एक ऐसा रॉकेट है जिसे गाइड करके निशाने पर दाग़ा जाता है.भारत ने 1980 के दशक में Integrated Missile Development Programme शुरू किया था. अग्नि, पृथ्वी, आकाश और त्रिशूल के साथ नाग मिसाइल भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा थी. नाग मिसाइल प्रोजेक्ट 30 साल पुराना है लेकिन अब इसमें सफलता मिल रही है. अच्छी बात ये है कि आज इसकी दुनिया की सबसे बेहतरीन एंटी टैंक मिसाइलों से तुलना की जा सकती है. 

तीसरी पीढ़ी की नाग मिसाइल 4 किलोमीटर की दूरी तक हमला कर सकती है.

अब ये मिसाइल सेना में शामिल किये जाने के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. वर्ष 2018 में सरकार ने सेना के लिये स्वदेशी नाग मिसाइल ख़रीदने को मंज़ूरी दी थी.

तब सरकार ने नाग मिसाइल के लिये 524 करोड़ रुपये मंज़ूर किये थे
इसके तहत सेना के लिये 300 से ज़्यादा नाग मिसाइल ख़रीदी जाएंगी
इसमें 25 नामिका कैरियर वेहिकल भी होंगे जो नाग मिसाइल से लैस होंगे
भविष्य में सेना क़रीब 8000 नाग मिसाइल के लिये ऑर्डर दे सकती है.
भारतीय सेना को अगले 20 वर्षों में 68 हज़ार से ज़्यादा एंटी टैंक मिसाइल की ज़रूरत होगी.

इस लिहाज़ से नाग को भारतीय सेना का भविष्य कहा जा रहा है. 

इससे पहले भारत की इज़रायल से स्पाइक एंटी टैंक मिसाइल ख़रीदने की बात चल रही थी. लेकिन DRDO ने सरकार को भरोसा दिलाया था कि जल्द ही नाग मिसाइल को तैयार कर लिया जाएगा और उसमें वो सभी ख़ूबी होंगी...जो तीसरी पीढ़ी की एंटी टैंक मिसाइल में होती हैं. इसके बाद स्पाइक मिसाइल को लेकर बात ख़त्म हो गई थी.

नाग मिसाइल हल्की है, मज़बूत है, Composite मैटेरियल से बनी है.
ये 230 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से अपने टारगेट की तरफ़ बढ़ती है.
और अपनी रेंज...यानी 4 किलोमीटर की दूरी 16 सेकेंड में तय कर लेती है.
मौसम कैसा भी हो, दिन हो या रात, लक्ष्य स्थिर हो या फिर तेज़ रफ्तार से बचने की कोशिश करे, नाग का निशाना अचूक होता है.
जमीन से छोड़े जाने वाले नाग सिस्टम की रेंज 4 किलोमीटर तक है जबकि अटैक हेलीकॉप्टर से लॉन्च की जाने वाले इसके वर्ज़न हेलीना की रेंज 8 किलोमीटर है.

नाग वो एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है...जो पूरी तरह भारत में बनी है. नाग मिसाइल के बारे में आपको और बताएं...इससे पहले जान लीजिये एक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल कैसा हथियार है.

एंटी टैंक मिसाइल यानी टैंक पर हमला करने वाली मिसाइल,
ये मिसाइल टैंक के बख़्तर को भेदने की ताक़त रखती है.
एंटी टैंक मिसाइल 4 पीढ़ी में बांटी जाती हैं.
पहली जेनरेशन यानी - जब मिसाइल Wire और Joystick से गाइड की जाती है, 
दूसरी जेनरेलशन वाली ATGM भी तार से गाइड की जाती है, लेकिन इसमें टेलिस्कोपिक साइट का इस्तेमाल करता है.
तीसरी जेनरेशन - Fire and Forget सिस्टम और Wire Guidance की जगह Infra Red Homing यानी टार्गेट की गर्मी को देखकर निशाना बनाया जाता है.
चौथी जेनरेशन में मिसाइल Top angle से अटैक करती है, यानी टैंक के सबसे नाज़ुक हिस्से उसकी छत पर मिसाइल वार करती है, ये दाग़े जाने के बाद अपना टारगेट भी बदल सकती हैं...जैसे अमेरिकी जैवलिन और इज़रायल की स्पाइक मिसाइल हैं.

अभी भारत की नाग मिसाइल को तीसरी पीढ़ी का कहा जाएगा. लेकिन इस प्रोजेक्ट में आगे कई और बदलाव ज़रूर किये जाएंगे...ताकि भारतीय सेना की ज़रूरत पूरी की जा सके.