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ZEE जानकारी: लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने जारी किया घोषणा पत्र

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस ने मंगलवार को घोषणा पत्र जारी किया है. 

ZEE जानकारी: लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने जारी किया घोषणा पत्र

भारत की एकता और अखंडता की सुरक्षा करना सिर्फ सैनिकों की ज़िम्मेदारी नहीं है. ये भारत के हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है . और भारत की राष्ट्रीय पार्टियों के लिए तो ये ज़िम्मेदारी और भी बड़ी है .

राष्ट्रीय पार्टी सिर्फ वो नहीं होती जिसकी मौजूदगी पूरे राष्ट्र में हो, बल्कि राष्ट्रीय पार्टी वो होती है.. जो पूरे राष्ट्र के बारे में सोचती हो. राष्ट्रीय पार्टी में राष्ट्र शब्द निहित है. कोई भी राष्ट्रीय पार्टी, राष्ट्रीय हितों को नज़र अंदाज़ नहीं कर सकती . लेकिन आज कांग्रेस पार्टी ने भारत के राष्ट्रीय हितों को पूरी तरह नज़र अंदाज़ कर दिया . 

आज मेरे हाथों में कांग्रेस का घोषणा पत्र है . ये 54 पन्नों का घोषणा पत्र है जिसका हमने आज अध्ययन किया है . इस घोषणा पत्र में कुछ ऐसी घोषणाएं भी की गई हैं जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है . 

इस घोषणा पत्र के पेज नंबर 35 पर लिखा है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124 A जो देशद्रोह के अपराध को परिभाषित करती है उसका दुरूपयोग हुआ, और बाद में नये कानून बन जाने से उसका महत्व समाप्त कर दिया गया है, इसलिए इसे खत्म कर दिया जाएगा . 

यानी देशद्रोह की जिन धाराओं के अंतर्गत भारत के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई की जाती है . उस धारा को ही खत्म करने का वादा किया जा रहा है . यानी अब कांग्रेस पार्टी देशद्रोह को और आसान बनाना चाहती है. आपको याद होगा... जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में टुकड़े-टुकड़े गैंग ने भारत की बर्बादी तक जंग करने के नारे लगाए थे . Zee News ने इस घटना पर लगातार रिपोर्टिंग की थी और देशद्रोह की इस घटना के खिलाफ Stand लिया था. 

इसके बाद राहुल गांधी ने JNU का दौरा किया था . दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में भारत के खिलाफ नारेबाजी के आरोपियों पर देशद्रोह की धारा 124 A लगाई थी . और आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने घोषणा पत्र में ये वादा किया है कि वो देश द्रोह की धारा 124 A को खत्म कर देंगे . इन तथ्यों से ये सवाल पैदा होता है कि क्या राहुल गांधी JNU में देशद्रोही नारेबाज़ी करने वाले लोगों को बचाना चाहते हैं ? अगर देशद्रोह को भी कानूनी रूप से जायज़ बना दिया जाएगा तो फिर भारत के उस संविधान का क्या होगा ? जो भारत की एकता और अखंडता को प्राथमिकता देता है . आज कांग्रेस पार्टी को ये जवाब देना चाहिए कि देशद्रोह के अपराध पर उसका दृष्टिकोण क्या है ? 

Article 370, भारत के संविधान की वो धारा है जो जम्मू और कश्मीर में अलगाववाद की मानसिकता को जन्म देती है . लेकिन कांग्रेस पार्टी ने आज अपने घोषणा पत्र में ये वादा किया है कि वो जम्मू कश्मीर में Article 370 को नहीं हटाएगी. 

घोषणा पत्र के पेज नंबर 41 पर लिखा है कि कांग्रेस इस बात को दोहराती है कि पूरा जम्मू-कश्मीर 
भारत का अभिन्न अंग है. हम राज्य के अनुपम इतिहास और उन अद्वितीय परिस्थितियों का भी सम्मान करते हैं, जिनके तहत राज्य ने भारत में विलय को स्वीकार किया, और जिसकी वजह से भारत के संविधान में अनुच्छेद 370 को शामिल किया गया. इस संवैधानिक स्थिति को बदलने की न तो अनुमति दी जायेगी, न ही ऐसा कोई प्रयास किया जायेगा .

Note करने वाली बात ये है कि एक तरफ तो कांग्रेस पार्टी ये कहती है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और दूसरी तरफ वो अलगाववादी मानसिकता को जन्म देने वाली धारा 370 को खत्म भी नहीं करना चाहती. ये दो नावों में पैर रखने जैसा है.

इसके अलावा कांग्रेस पार्टी ने जम्मू कश्मीर में लागू किए गये Armed Forces Special Powers Act की समीक्षा करने का वादा किया है . 

घोषणा पत्र के पेज नंबर 41 पर ही लिखा है कि जम्मू-कश्मीर में इस कानून की समीक्षा की जायेगी. सुरक्षा की जरुरतों और मानव अधिकारों के संरक्षण में संतुलन के लिये कानूनी प्रावधानों में उपयुक्त बदलाव किये जायेंगे . 

ये चुनावी वादा, भारत की एकता और अखंडता पर कितना भारी पड़ सकता है ? ये समझने के लिए आपको Armed Forces Special Powers Act के बारे में जानकारी होना बहुत ज़रूरी है .

जिन क्षेत्रों में अशांति होती है और भारत की एकता और अखंडता पर खतरा पैदा हो जाता है . वहां पर 
AFSPA लागू किया जाता है . पहले ये प्रावधान था कि सुरक्षा बलों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए केंद्र सरकार की sanction यानी official permission लेनी होती है . लेकिन वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस प्रावधान को खत्म कर दिया गया . इसके बाद जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों पर सैकड़ों की संख्या में केस दर्ज हुए थे . लेकिन इनमें से ज्यादातर मामले जांच के बाद फर्जी पाए गए . सबसे बड़ी विडंबना ये है कि देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान देने वाले सैनिक की जांच की जिम्मेदारी पुलिस पर है.

लेकिन कांग्रेस पार्टी ने Armed Forces Special Powers Act को खत्म करने का चुनावी वादा करके सुरक्षा की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है . यानी पहले तो सबूत मांग कर सेना के जवानों का अपमान किया गया और अब सुरक्षाबलों के उत्पीड़न की तैयारी चल रही है .

पेज नंबर 41 पर ही कांग्रेस पार्टी ने ये घोषणा की है कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर के लोगों से बिना शर्त बातचीत का वादा करती है . और वो इस तरह की बातचीत के लिये, नागरिकों के बीच से चुने गये
3 वार्ताकारों की नियुक्ति करेंगे . 

कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में जम्मू कश्मीर के नाम पर एक अध्याय लिखा है . लेकिन उसमें कहीं भी कश्मीरी पंडितों का ज़िक्र नहीं है . ये बड़ी शर्म की बात है कि 1989-90 के दौर में हिंसा की वजह से 2 लाख कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी छोड़कर जाना पड़ा. और आज कांग्रेस पार्टी, कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर खामोश है . 

अब विचार करने वाली बात ये है कि अगर कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापस लौटी तो वो देशद्रोह की धारा को खत्म कर देगी यानी टुकड़े टुकड़े गैंग को देशद्रोही नारे लगाने की छूट मिल जाएगी . लेकिन अगर इस पर मीडिया ने रिपोर्टिंग की, तो कांग्रेस ने मीडिया को नियंत्रित करने की तैयारी भी कर ली है . 

इस घोषणापत्र के पेज नंबर 37 पर लिखा है कि हम प्रेस कांउसिल ऑफ इण्डिया के साथ मिलकर अखबारों और मीडिया संघों के लिए एक आदर्श आचार संहिता विकसित करेंगे 

यानी अब News Channels और अखबारों को क्या लिखना है ? क्या दिखाना है ? कैसे दिखाना है ? ये तय करने से पहले सरकार द्वारा जारी की गई आचार संहिता को पढ़ना पड़ेगा . यानी स्वतंत्र पत्रकारिता को आचार संहिता की जंजीरों में बांध दिया जाएगा . 

इस पूरे घोषणा पत्र में सबसे आपत्तिजनक बात ये है कि इसमें मीडिया पर ही आरोप लगाकर, अपनी ज़िम्मेदारी से किनारा कर लिया गया है. घोषणापत्र में लिखा है कि हाल के दिनों में मीडिया के कुछ हिस्से ने या तो अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है या फिर आत्मसमर्पण . 

यानी कांग्रेस पार्टी अपने गिरेबान में झांकने के बजाय देश के पत्रकारों पर ही आरोप लगा रही है. ऐसा लगता है कि स्वतंत्र पत्रकारों का सवाल पूछना कांग्रेस पार्टी को बहुत चुभ रहा है . 

घोषणापत्र में आगे लिखा है कि कांग्रेस... प्रेस काउंसिल ऑफ इण्डिया एक्ट-1978 में उल्लेखित स्व-नियमन की प्रणाली को मज़बूत करने, पत्रकारों की स्वतंत्रता की रक्षा करने, संपादकीय स्वतंत्रता को बनाये रखने और सरकारी हस्तक्षेप के खिलाफ रक्षा करने का वादा करती है .

कांग्रेस पार्टी ने एक कानून का ज़िक्र किया है... प्रेस काउंसिल ऑफ इण्डिया एक्ट-1978 
इस कानून का इतिहास भी आपको पता होना चाहिए.

इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान पत्रकारों को जेल में डाल दिया था . पत्रकारों पर बहुत सारे प्रतिबंध लगा दिए थे . उन अखबारों और मैगजीन पर कार्रवाई की गई थी.. जो उस दौर में सरकार के अत्याचारों पर रिपोर्टिंग कर रहे थे . वर्ष 1977 में चुनाव के बाद जब जनता पार्टी की सरकार बनी तो पत्रकारिता की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए कई कानून और प्रावधान बनाए गए थे . इन्हीं में से एक है... प्रेस काउंसिल ऑफ इण्डिया एक्ट-1978. 

सवाल ये है कि क्या इसमें संशोधन करके, कांग्रेस पार्टी दोबारा आपातकाल जैसी परिस्थितियां पैदा करना चाहती है . हम ये बात आपातकाल के इतिहास को ध्यान में रखकर कह रहे हैं . 

कांग्रेस पार्टी ने घोषणा पत्र के पेज नंबर 17 पर किसानों पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है . इस घोषणा पत्र में किसानों के लिए अलग से एक किसान बजट बनाने का वादा किया गया है . हम कांग्रेस पार्टी की इस घोषणा का स्वागत करते हैं . ये एक अच्छा कदम है . क्योंकि किसानों की स्थिति पर विशेष रूप से ध्यान देना बहुत जरूरी है . 

लेकिन इसी घोषणा पत्र में ये भी लिखा है कि किसानों द्वारा कर्ज़ नहीं चुकाने के मामलों को अब सिविल मामला माना जाएगा ना कि आपराधिक मामला . 

यानी कर्ज लेकर उसे ना चुकाने वाले किसानों पर कोई आपराधिक कार्रवाई की अनुमति नहीं दी जाएगी. इससे किसानों को कर्ज़ लेकर उसे भूल जाने और फिर कभी ना चुकाने की छूट मिल जाएगी . इसलिए ये अच्छा संकेत नहीं है.

कांग्रेस ने इस घोषणा पत्र में अपने चुनावी Trump Card का भी ज़िक्र किया है . घोषणा पत्र के पेज नंबर 20 पर लिखा है कि कांग्रेस ने 2030 तक गरीबी को पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य रखा है . हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 में ही गरीबी हटाओ का नारा दिया था . 

कांग्रेस पार्टी ने न्याय योजना के तहत देश के 5 करोड़ सबसे गरीब लोगों को हर महीने 6 हजार रुपए देने का वादा किया है . कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि उनके अर्थशास्त्रियों और Experts ने न्याय योजना को लागू करने का पूरा रोड मैप तैयार कर लिया है . लेकिन इस घोषणा पत्र में उनकी तैयारियों की पोल खुल गई. 

कांग्रेस पार्टी ने घोषणा पत्र के पेज नंबर 20 पर लिखा है कि कांग्रेस पार्टी न्यूनतम आय योजना यानी न्याय योजना को केन्द्र और राज्य सरकारों के संयुक्त कार्यक्रम के रूप में लागू करने का इरादा रखती है . इस कार्यक्रम के लिए पैसा.. राजस्व के नये स्रोतों और खर्चों में कटौती करके आयेगा.

इसका मतलब ये है कि कांग्रेस की न्याय योजना, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मिलकर लागू की जाएगी . सवाल ये है कि आज देश में सिर्फ 5 राज्यों में ही कांग्रेस पार्टी की सरकार है . फिर कांग्रेस इस योजना को कैसे लागू कर पाएगी ? यानी जनता से वादा तो कर दिया गया है . लेकिन इस वादे का ज़मीनी आधार ही बहुत कमज़ोर है. 

इसके अलावा घोषणा पत्र में बहुत साफ तौर पर ये लिखा गया है कि कार्यक्रम के लिए पैसा इकट्ठा करने के लिए नया टैक्स लगाया जाएगा . यानी राहुल गांधी के इस वादे को पूरा करने के लिए आपको नया टैक्स देना होगा.

राहुल गांधी की नज़र गरीबों और किसानों के वोटों पर है. इसलिए आज हम उन लोगों की बात भी करेंगे, जिनके लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी बहुत मुश्किल काम है, और इनमें से बहुत कम लोगों के सिर पर छत है. शुद्ध हिंदी में इस समस्या को गरीबी कहते हैं. भारत में हर राजनीतिक पार्टी का सबसे बड़ा वादा गरीबी को खत्म करने का होता है. हर पार्टी इसी वादे के साथ सत्ता में आती है..कि वो गरीबी को खत्म कर देगी. भारत के सभी राजनेताओं को गरीबों में अपना Vote Bank नज़र आता है और शायद इसीलिए कोई भी पार्टी दिल से नहीं चाहती कि देश से गरीबी खत्म हो जाए. क्योंकि अगर ऐसा हो गया तो फिर वो राजनीति किसके नाम पर करेंगे . ये भारतीय राजनीति की 'अति गरीब' सोच है. 

5 वर्षों में चुनाव, एक मात्र ऐसा मौका होता है..जब नेता, गरीबों से कुछ मांगते हैं. 
इसके बाद पूरे 5 वर्षों तक गरीब कतार में खड़े रहते हैं..वादों के पूरा होने का इंतज़ार करते हैं... लेकिन ज्यादातर गरीब लोगों की उम्मीदों वाली झोली खाली ही रहती है. इस परिस्थिति को और गहराई से समझने के लिए आज आपको Zee news की टीम के साथ कुछ ग़रीबों के घर चलना होगा. 
इससे आपको ये भी पता चलेगा कि किसानों और गरीबों की असली ज़रूरत क्या है? क्या वो नेताओं से मुफ़्त का पैसा चाहते हैं.. या फिर वो सक्षम बनकर अपना और देश का विकास करना चाहते हैं?

कांग्रेस पार्टी ने वादा किया है कि अगर उनकी सरकार बनी तो वो शिक्षा पर GDP का 6 प्रतिशत खर्च करेंगे . लेकिन जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी तो उसने GDP का कितना प्रतिशत धन, शिक्षा पर खर्च किया ये भी देखना होगा . 

वर्ष 2009-10 के बजट में यूपीए सरकार ने 36,400 करोड़ रुपए का शिक्षा बजट रखा था . ये GDP का 0.6 प्रतिशत था . अब ये विचार करने वाली बात है कि कांग्रेस पार्टी आज शिक्षा पर 6 प्रतिशत खर्च करने का वादा कर रही है लेकिन जब उसकी सरकार थी तो उसने शिक्षा पर एक प्रतिशत से भी कम पैसा खर्च किया . 

वर्ष 2019-20 में... यानी इस बार अंतरिम बजट में शिक्षा बजट के लिए 93,847 करोड रुपए प्रस्तावित किए गए हैं . ये भी GDP का 0.6 प्रतिशत है . फिर भी 2009-10 के मुकाबले ये रकम 158 प्रतिशत ज्यादा है .

वैसे यहां आपको ये बात भी समझनी होगी कि भारत में शिक्षा पर ज्यादा खर्च राज्य सरकारों द्वारा ही किया जाता है . हालांकि अगर सभी राज्य सरकारों द्वारा किए गए खर्च की भी GDP से तुलना की जाए तो ये आंकड़ा करीब सवा 4 प्रतिशत होता है . यानी ये 6 प्रतिशत से कम है . सबसे बड़ी बात ये है कि ये घोषणापत्र केंद्र में सरकार बनाने के लिए है ना कि राज्य में सरकार बनाने के लिए . यहां ये सवाल भी उठता है कि क्या राहुल गांधी लोकसभा के चुनाव में राज्य सरकार की तरफ से वादा कर रहे हैं ? 

आज हमने ये Research भी की है कि विकसित देश शिक्षा पर कितना खर्च करते हैं . 
2014 में अमेरिका ने GDP का 5 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च किया था . 
2016 में ब्रिटेन ने GDP का 5.54 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च किया था . 
2016 में जापान ने GDP का 3.47 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च किया था . 
यानी हमें एक विकसित देश बनना है तो शिक्षा बजट बढ़ाना ही होगा . 

इस घोषणा पत्र में आज कांग्रेस पार्टी ने देश के पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण वादा किया है . हम इस वादे के लिए कांग्रेस की प्रशंसा करते हैं . 

घोषणापत्र में पेज नंबर 51 पर लिखा है कि 'कांग्रेस मानती है कि वायु प्रदूषण राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक
स्वास्थ्य आपातकाल की तरह है. प्रदूषण की समस्या से तुरंत निपटने के लिये कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु 
कार्यक्रम को मज़बूत करने का संकल्प लिया है. इसके तहत Emission के सभी प्रमुख स्रोतों की पहचान की जाएगी और Emission को कम किया जायेगा.

कांग्रेस पार्टी ने लिखा है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वो प्रदूषण को रोकने के लिए कानूनों में संशोधन भी करेगी . 

अपने घोषणा पत्र में कांग्रेस ने ये वादा किया है कि right to privacy के तहत संसद में Data protection कानून लाया जाएगा ताकि लोगों की निजी ज़िंदगी से जुड़ी हुई जानकारी Leak ना हो सके . पिछले कुछ समय से देश में Data Leak... एक बहुत मुद्दा बना हुआ है . इसके अलावा सोशल मीडिया पर fake news और नफ़रत फैलाने वाली ख़बरो को रोकने के लिए कांग्रेस ने कड़े नियम बनाने का वादा किया है 

आज घोषणापत्र के ऐलान के दौरान कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी से एक बडी चूक हुई . उन्होंने कहा कि वो मार्च 2020 तक 22 लाख खाली पड़े सरकारी पदों को भरेंगे . लेकिन घोषणा पत्र में हकीकत कुछ और है . 

घोषणा पत्र में लिखा है 'हमारा संकल्प है कि मार्च 2020 तक केन्द्र सरकार और
संस्थानों के सभी 4 लाख खाली पदों को भरेंगे'

यानी घोषणा पत्र में सिर्फ 4 लाख सरकारी पदों की बात की गई है .

इसका मतलब ये है कि राहुल गांधी ने खुद ही अपना घोषणा पत्र ठीक से नहीं पढ़ा है . और उन्होंने राज्य के खाली सरकारी पदों को भी गिन लिया है . लेकिन अगर हम केंद्र और राज्य के खाली सरकारी पदों को जोड़ भी लें तो भी ये आंकड़ा 24 लाख बनता है . ना कि 22 लाख . 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की . देशद्रोह की धारा खत्म करने के कांग्रेस के चुनावी वादे पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र को पढकर ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी पर जेहादी और माओवादियों का प्रभाव है .