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ZEE जानकारी: पश्चिम बंगाल में बीजेपी और TMC की चुनावी लड़ाई हुई हिंसक

पश्चिम बंगाल में बीजेपी और TMC की चुनावी लड़ाई इतनी हिंसक हो गई कि चुनाव आयोग को चुनाव प्रचार 19 घंटे पहले खत्म करने का आदेश देना पड़ा. ये अभूतपूर्व फैसला है.

ZEE जानकारी: पश्चिम बंगाल में बीजेपी और TMC की चुनावी लड़ाई हुई हिंसक

भारत का लोकसभा चुनाव एक ऐसी एक्शन फिल्म बन चुका है जो अब अपने क्लाइमैक्स तक पहुंच चुकी है. इस क्लाइमैक्स में क्रोध है, हिंसा है, पत्थरबाज़ी है और राजनीति की आग है. और इस क्लाइमैक्स की लोकेशन है पश्चिम बंगाल. आज की सबसे बड़ी ख़बर ये है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी और TMC की चुनावी लड़ाई इतनी हिंसक हो गई कि चुनाव आयोग को चुनाव प्रचार 19 घंटे पहले खत्म करने का आदेश देना पड़ा. ये अभूतपूर्व फैसला है. भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में ऐसी नौबत कभी नहीं आई. इससे पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में किस तरह लोकतंत्र पर हमला किया जा रहा है. 

चुनाव आयोग ने संविधान की धारा 324 के तहत पश्चिम बंगाल में चुनावी सभा, रैली और रोड शो पर रोक लगा दी है. चुनाव आयोग की ये पाबंदी कल रात 10 बजे से लेकर 19 मई की शाम 6 बजे तक रहेगी. आमतौर पर मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार पर रोक लग जाती है. लेकिन पश्चिम बंगाल में 7वें चरण के मतदान से 67 घंटे पहले चुनाव आयोग ने ये कार्रवाई की है. 

चुनाव आयोग के पास अधिकार है कि वो निष्पक्ष चुनाव कराने के लिये किसी भी तरह की कार्रवाई कर सकता है. और आयोग ने अपने इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल में संविधान के आर्टिकल 324 को लागू कर दिया है. चुनाव आयोग ने इसके तहत आने वाले Representation of People Act 1951 के सेक्शन 126 का इस्तेमाल किया है...जो परिस्थितियों के अनुसार किसी भी तरह के चुनाव प्रचार पर रोक लगाने का अधिकार देता है. 
इसके अलावा पश्चिम बंगाल के गृह सचिव अत्री भट्टाचार्य और ADG CID राजीव कुमार को पद से हटा दिया है. इन दोनों अधिकारियों पर चुनाव को प्रभावित करने का आरोप है.

इस बारे में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मलय कुमार डे... से रिपोर्ट मांगी है.
चुनाव आयोग ने अब गृह सचिव का चार्ज भी मुख्य सचिव को सौंप दिया है. जो लोग देश में सच्चे लोकतंत्र की चाहत रखते हैं उनके लिए ये एक चुभने वाली ख़बर है.

कोलकाता में मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में हुई हिंसा के बाद आज पश्चिम बंगाल देश की राजनीति का सबसे बड़ा रण बन चुका है. इस रोड शो में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा हुई...जिसमें कई लोग घायल हुए हैं. अमित शाह ने कहा है कि इस हिंसा में उनकी जान किसी तरह बच गई. आज हम इस रोड शो और पश्चिम बंगाल सहित देश की राजनीति में इसके प्रभावों का DNA टेस्ट करेंगे. इस रोड शो में हुई हिंसा के कई नये वीडियो आज हमारे पास हैं. इन तस्वीरों में साफ़ नज़र आ रहा है कि पश्चिम बंगाल में इस वक़्त लोकतंत्र का दमन हो रहा है. 

पूरे देश ने इस हिंसा की तस्वीरें देखी हैं. इस हिंसा को भड़काने के लिये बीजेपी और TMC.. दोनों पार्टियों ने एक दूसरे पर आरोप लगाये हैं. लेकिन सच ये है कि इस तरह के पथराव और आगज़नी के बीच चाहे किसी भी पार्टी की जीत हो जाये...देश का लोकतंत्र हार रहा है. हम अमित शाह के रोड शो में हुई हिंसा पर विस्तार से बात करेंगे, लेकिन उससे पहले आपको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातें सुननी चाहिएं.  आज पश्चिम बंगाल के बसीरहाट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली की और वहां हो रही हिंसा के लिये सीधे ममता बनर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया. प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस वक़्त वैसा ही माहौल है...जैसा इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव के दौरान था.

ममता बनर्जी ने कुछ बड़ी बातें कही हैं

चुनाव आयोग ने बीजेपी के कहने पर ये फैसला किया

अमित शाह ने कोलकाता में दंगा करवाया

मोदी मुझे और बंगाल को डराना चाहते हैं. 

अमित शाह ने चुनाव आयोग को धमकी दी

बीजेपी के गुंडों ने ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ी

कल की हिंसा के बाद आज बीजेपी और TMC...दोनों ही पार्टियों ने राजनीतिक मोर्चा खोल दिया...लेकिन आज की तकरार में हिंसा नहीं ख़ामोशी थी.

बीजेपी ने आज के दिन की शुरुआत दिल्ली और कोलकाता में मौन विरोध प्रदर्शन से की. दिल्ली में बीजेपी के नेता जंतर मंतर पर इकट्ठा हुए और उन्होंने मुंह पर उंगली रखकर ये बताने की कोशिश की...कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की आवाज़ को ख़ामोश कर दिया गया है. ऐसा ही प्रदर्शन बीजेपी ने कोलकाता में भी किया. 

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने रोड शो में हुई हिंसा को लेकर आज दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की...उन्होंने कहा कि हिंसा के लिये सिर्फ़ ममता बनर्जी की सरकार ज़िम्मेदार है. अमित शाह ने कहा कि रोड शो के दौरान वो तृणमूल कांग्रेस के निशाने पर थे. और उनकी जान लेने की कोशिश की गई.

कोलकाता में हुई हिंसा को लेकर अमित शाह के ख़िलाफ़ कोलकाता पुलिस ने 2 FIR दर्ज की हैं. देश में हर नेता रोड शो करता है, कहीं हिंसा नहीं होती. लेकिन पश्चिम बंगाल की बात ही कुछ और है. ताज्जुब की बात ये है कि देश में इतने बड़े पैमाने पर चुनाव हो रहा है...लेकिन हिंसा सिर्फ़ पश्चिम बंगाल में हो रही है.

पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं और अब 19 मई को आख़िरी चरण के मतदान में 9 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. 

इस वक़्त पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी की है. कोलकाता के रोड शो में हुई हिंसा को लेकर बीजेपी ने चुनाव आयोग से भी शिकायत की है. इस मुद्दे पर जवाब TMC की तरफ़ से भी आया है. TMC ने दो वीडियो जारी करके बीजेपी पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है. आज शाम को कोलकाता में ममता बनर्जी ने एक पैदल मार्च भी किया. ममता बनर्जी ने बीजेपी से कहा है कि अभी तो वो शांत हैं लेकिन अगर वो भड़क गईं.. तो बीजेपी के लिए बहुत बुरा होगा, बीजेपी उन्हें कमज़ोर समझने की ग़लती ना करे.

ममता बनर्जी को इस बात का ऐहसास है कि बीजेपी, पश्चिम बंगाल में उभरती हुई ताक़त है.

वर्ष 2014 के चुनाव में पश्चिम बंगाल में बीजेपी के 2 सांसद जीते थे.
तब बीजेपी को 17 प्रतिशत वोट मिले थे.
वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में BJP के तीन विधायक जीते.
वर्ष 2017 के निकाय चुनाव में बीजेपी दूसरे स्थान पर रही थी. यानी दो साल पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में बीजेपी का प्रभाव बढ़ना शुरू हो गया था.
वर्ष 2018 के पंचायत चुनावों में भी बीजेपी दूसरे नंबर पर थी,

और इन्हीं चुनावों ने बीजेपी को ये यक़ीन दिलाया है कि वो तृणमूल कांग्रेस का विकल्प बन सकती है. इस बार बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की 42 में से 23 सीट जीतने का लक्ष्य रखा है.

चुनाव आयोग ने अमित शाह के रोड शो में हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल में रैली, सभा और रोड शो पर पाबंदी लगा दी है. हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने नई रणनीति अपनाई है. अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा में ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ दी गई थी. पश्चिम बंगाल की जनता के हृदय में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के लिए बहुत सम्मान है. देश की जनता उन्हें महान समाज सुधारक के रूप में जानती है. उनकी मूर्ति तोड़े जाने के लिये TMC ने बीजेपी के कार्यकर्ताओं को ज़िम्मेदार ठहराया है. हालांकि अमित शाह ने कहा है कि मूर्ति तोड़ने के पीछे TMC का हाथ है क्योंकि वो इसके ज़रिये लोगों की सहानुभूति चाहती है.

ईश्वरचंद्र विद्यासागर 19वीं सदी के बहुत बड़े समाज सुधारक थे. उनका जन्म वर्ष 1820 में पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर में हुआ था. उन्होंने महिला अधिकारों के लिये काफ़ी काम किया. उन्होंने महिलाओं को शिक्षा और विधवाओं को दोबारा विवाह का अधिकार दिलाया था...इसके लिये उन्होंने विधवा पुनर्विवाह क़ानून-1856 में पारित करवाया था. उन्होंने मिसाल क़ायम करने के लिये अपने इकलौते बेटे की शादी एक विधवा से कराई थी. ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने बांग्ला भाषा और साहित्य को आगे बढ़ाने के लिये बहुत बड़ा योगदान दिया है.

बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति को लेकर तकरार चल रही है. 
ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ईश्वरचंद्र विद्यासागर की तस्वीर अपने twitter profile पर लगाई है. ये TMC का जज़्बाती प्रचार है. ये भी कहा जा सकता है कि ममता बनर्जी ने चौकीदार वाली रणनीति की नक़ल की है. जिस तरह बीजेपी के नेताओं ने अपने twitter profile में चौकीदार शब्द जोड़ा है...ठीक उसी तरह ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के नेता, अब ईश्वरचंद्र विद्यासागर की तस्वीर का इस्तेमाल कर रहे हैं. TMC का आरोप है कि बीजेपी ने उनका अपमान किया है.TMC ने इसे बांग्ला स्वाभिमान का मुद्दा बना दिया है.

हालांकि बीजेपी इस बांग्ला स्वाभिमान वाली राजनीति पर भी लगातार सवाल उठा रही है. 13 मई को दक्षिण 24 परगना में एक रैली के दौरान अमित शाह ने ममता बनर्जी के उर्दू प्रेम पर सवाल उठाये थे. अमित शाह ने कहा था कि ममता बनर्जी ज़बरदस्ती पश्चिम बंगाल पर उर्दू भाषा थोप रही हैं

((बंगाल के इस्लामपुर में ममता दीदी ने उर्दू के शिक्षक भेज दिए. लोगों ने जब उर्दू में पढ़ने का विरोध किया तो पुलिस भेज दी, पुलिस के अत्याचार से हमारे दो कार्यकर्ताओं की मौत हो गई. जबकि वो बस ये मांग कर रहे थे कि यहां बंगाली भाषा में पढ़ाई होनी चाहिए))