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ZEE जानकारी: Cafe Coffee Day के मालिक वीजी सिद्धार्थ लापता

लापता होने से पहले वीजी सिद्धार्थ ने अपनी कंपनी के Board Of Directors और अपने कर्मचारियों को एक चिट्ठी लिखी थी. 

ZEE जानकारी: Cafe Coffee Day के मालिक वीजी सिद्धार्थ लापता

अब कॉफी से कर्ज़ का तूफान कैसे आता है, इसकी बात करते हैं. आज सुबह से ही Social Media पर वीजी सिद्धार्थ नाम के व्यक्ति की चर्चा हो रही है. आपमें से बहुत सारे लोग इस व्यक्ति के बारे में नहीं जानते होंगे. लेकिन एक नाम, जिससे हमारे देश का हर युवा अच्छी तरह परिचित है, वो है CCD...यानी 'Cafe Coffee Day’... आपमें से बहुत सारे लोगों ने इस Coffee Chain का नाम सुना होगा. और कई बार अपने दोस्तों के साथ CCD में बैठकर स्वादिष्ट Coffee का आनंद भी उठाया होगा. 

वीजी सिद्धार्थ इसी Coffee Day Enterprises Limited के Chairman और Managing Director हैं. और कल रात से लापता हैं. ऐसी आशंका जताई जा रही है, कि उन्होंने आत्महत्या के मक़सद से नदी में छलांग ली है. लेकिन ऐसा करने से पहले उन्होंने अपनी कंपनी के Board Of Directors और अपने कर्मचारियों को एक चिट्ठी लिखी थी. इस चिट्ठी में उन्होंने अपनी कंपनी को हो रहे नुकसान का जिक्र किया था. सबसे पहले ये देखिए, कि उस चिट्ठी में क्या लिखा था ?

उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा, कि 37 वर्षों की मेहनत के बावजूद वो मुनाफे वाला Business Model तैयार करने में नाकाम रहे.

जिन लोगों ने उनपर भरोसा जताया, वो उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे.

उन्होंने अपने संघर्ष का ज़िक्र करते हुए ये भी लिखा, कि वो अब और दबाव नहीं झेल सकते.

एक Private Equity Partner और दूसरे कर्ज़दाताओं के भारी दबाव की वजह से वो पूरी तरह टूट चुके थे. 

चिट्ठी में आयकर विभाग के एक पूर्व डीजी द्वारा बनाए गए दबाव का भी ज़िक्र है. 

अपनी ग़लती स्वीकार करते हुए उन्होंने, सारे वित्तीय लेन-देन के लिए खुद को ज़िम्मेदार ठहराया है. और ये भी लिखा है, कि उनकी Team, Auditors और Senior Management को उनके द्वारा किए गए किसी भी Transaction के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. इसलिए, कानून को सिर्फ उन्हें ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए. 

चिट्ठी के अंत में उन्होंने लिखा है, कि उनका इरादा किसी को गुमराह करने या धोखा देने का नहीं था. बल्कि एक कारोबारी के तौर पर वो विफल रहे. 

और इस तरह सभी से माफी मांगते हुए, वीजी सिद्धार्थ ने इस चिट्ठी में अपनी संपत्ति का ज़िक्र किया. और कहा, कि इनसे सभी की बकाया राशि चुकाई जा सकती है. 

इस चिट्ठी पढ़कर ऐसा लगता है, कि वो निराश थे और अंदर से पूरी तरह टूट चुके थे.

लेकिन अब इस चिट्ठी की विश्वसनियता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. क्योंकि, चिट्ठी सामने आने के बाद Income Tax Department ने एक Press Release जारी की है. जिसमें आशंका जताई गई है, कि ये चिट्ठी खुद वीजी सिद्धार्थ ने लिखी है, ये नहीं कहा जा सकता. क्योंकि, चिट्ठी में उनके हस्ताक्षर और आयकर विभाग को सौंपी गई कंपनी के Annual Reports में मौजूद वीजी सिद्धार्थ के हस्ताक्षर मेल नहीं खाते. इस लिहाज़ से देखा जाए, तो ये मामला किसी और ही दिशा में जा रहा है. और अगर आयकर विभाग का दावा सही है, तो फिर ये मामला सीधे-सीधे Fraud की श्रेणी में आता है. इसलिए आज औद्योगिक घरानों की Bad Practice का विश्लेषण करना ज़रुरी है.

जिन लोगों ने CCD में बैठकर Coffee का आनंद लिया होगा. उन्हें इसका Tagline ज़रुर पता होगा. और वो Tagline है,
A Lot Can Happen Over Coffee...हिन्दी में इसका अनुवाद हुआ, कॉफी पीते-पीते बहुत कुछ हो सकता है. लेकिन, ऐसा लगता है, कि देश की जनता को Coffee पिलाते-पिलाते, वीजी सिद्धार्थ ने नैतिकता से समझौता कर लिया. 

सवाल ये है, कि अगर ये चिट्ठी खुद वीजी सिद्धार्थ ने लिखी, तो उन्हें ये चिट्ठी लिखने की नौबत क्यों आई ? इसके लिए आप हिन्दी की एक कहावत का ज़िक्र कर सकते हैं. और वो कहावत है, जितनी लम्बी चादर हो, उतने ही पैर फैलाने चाहिए. लेकिन ऐसा लगता है, कि वीजी सिद्धार्थ ने ज़रुरत से ज़्यादा पैर फैला लिए. और यही उनके पतन का कारण बना. आगे बढ़ने से पहले आपको वीजी सिद्धार्थ का छोटा सा परिचय दे देते हैं.

वीजी सिद्धार्थ कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और UPA के कार्यकाल में विदेश मंत्री रहे एस एम कृष्णा के दामाद हैं. 

2017 में टैक्स चोरी के मामले में आयकर विभाग के छापों के बाद से वीजी सिद्धार्थ की परेशानियां बढ़ने लगीं. 

मार्च 2019 तक Coffee Day Enterprises Limited पर 6 हज़ार 547 करोड़ रुपए का कर्ज़ था. आपको एक बार फिर याद दिला दें, कि वीजी सिद्धार्थ इसी Coffee Day Enterprises Limited के Chairman और Managing Director हैं. 

आयकर विभाग का दावा है, कि Coffee Day Enterprises Limited की कंपनी CCD ने क़ानूनी तौर पर कुछ अवैध Transactions किए.

Income Tax Department ने वीजी सिद्धार्थ को CCD के शेयर बेचने से भी रोक दिया था. 

आयकर विभाग का कहना है, कि उन्होंने सिंगापुर के एक व्यक्ति को पकड़ा था. जिसके पास से 1 करोड़ 20 लाख रुपये मिले थे. और उस व्यक्ति ने पूछताछ में बताया था, कि ये रकम वीजी सिद्धार्थ की है.

आयकर विभाग के मुताबिक वीजी सिद्धार्थ ने स्वीकार किया था, कि उनके पास क़रीब 362 करोड़ रुपये का Un-Accounted Income है. यानी एक ऐसी रकम जिसकी Tax की Files में कोई ज़िक्र नहीं है. जब वीजी सिद्धार्थ ने अपना Tax Return भरा, तो उस वक्त उन्होंने सिर्फ 35 करोड़ रुपये से संबंधित जानकारी आयकर विभाग को दी. और उस पर बनने वाला टैक्स जमा कराया. इस लिहाज़ से बाकी के 327 करोड़ रुपयों को टैक्स रिटर्न में नहीं दिखाया गया. 

Income Tax Department के मुताबिक जनवरी 2019 में कुछ अखबारों ने रिपोर्ट किया था, कि वीजी सिद्धार्थ अपने पास मौजूद Mindtree Limited कंपनी के शेयर्स को बेचना चाहते थे. जांच में आयकर विभाग को पता चला कि इस कंपनी में वीजी सिद्धार्थ, Coffee Day Entriprises Limited और Coffee Day Trading Limited की 21 फीसदी हिस्सेदारी है. और वो इसी को बेचना चाहते थे. लेकिन आयकर विभाग को इसकी जानकारी नहीं दी गई. 

और इसी के बाद Mindtree Limited कंपनी के 74 लाख 90 हज़ार शेयर्स को आयकर विभाग ने ज़ब्त कर लिया. Income Tax Department का कहना है, कि वीजी सिद्धार्थ पर पहले से ही टैक्स चोरी का मामला चल रहा था. और ऐसी स्थिति में बिना आयकर विभाग को सूचित किए वो अपनी संपत्ति नहीं बेच सकते थे. लेकिन बाद में वीजी सिद्धार्थ की अपील पर आयकर विभाग ने शर्तों के साथ उन शेयर्स को बेचने की इजाज़त दे दी. 

महत्वाकांक्षा अच्छी चीज़ होती है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति 'अति महत्वाकांक्षी' हो जाए, तो ये उसके अंत की शुरुआत होती है. 
और ये बात सिर्फ वीजी सिद्धार्थ पर लागू नहीं होती. हाल-फिलहाल में आपने कई औद्योगिक घरानों का ऐसा ही हश्र देखा होगा.

लोग ये तो कहते हैं, कि हमारे देश का आर्थिक माहौल खराब हो गया है. बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों की स्थिति खराब होती जा रही है. देश में Ease Of Doing Business की हालत ख़राब है. लेकिन कोई Corporate World में होने वाली Bad Practice के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाता. कोई Organic Branding करके जनता को गुमराह करने वालों को Expose नहीं करता. 

Jet Airways और Kingfisher Airlines जैसी कंपनियां इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं. विजय माल्या भारत के बैंकों के 9 हज़ार करोड़ रुपये लेकर London भाग गया. Kingfisher Airlines की ही तरह Jet Airways की बर्बादी और बदहाली के लिए भी उसके Promoter के तौर तरीके ही ज़िम्मेदार हैं. ऐसी कंपनियों की दुर्गति इसी Bad Practice की वजह से हुई है. और दुर्भाग्य से आज भी ऐसे Bad Business Practices रुके नहीं हैं.

कुछ लोग नियम-क़ानून के तहत काम करते हैं. लेकिन कुछ लोग आज भी Shortcut का इस्तेमाल करके, सिस्टम की आंख में धूल झोंकते हैं. और जब यही लोग पकड़े जाते हैं, तो सरकार को दोष देते हैं. इसलिए आज देश को ये तय करना होगा, कि क्या ऐसी कंपनियों को यूं ही चलते रहने देना चाहिए. या इन्हें पकड़कर उन्हें सबक सिखाना चाहिए. 

पिछले कुछ वर्षों में भारत की 14 सौ से ज़्यादा कंपनियों ने खुद को दिवालिया घोषित किया है. और ये आंकड़ा देखकर किसी को भी भ्रम होना संभव है, कि भारत में व्यापार करना मुश्किल होता जा रहा है. और भारत की आर्थिक स्थिति ख़तरे में है. लेकिन सच्चाई कुछ और है. क्योंकि जिन कंपनियों ने खुद को दिवालिया घोषित किया है. उनमें से ज़्यादातर ऐसी थीं, जो घपला करके सरकार को और शेयर होल्डर्स को चूना लगाया करती थीं. लेकिन सिस्टम ने कड़ा रवैया अपनाया. सरकार और RBI के कड़े निर्देश के बाद Regulations को पहले से ज़्यादा मज़बूत किया जा रहा है. जिसकी वजह से Bad Practices में शामिल कंपनियों को या तो सही रास्ते पर आना पड़ा है. या फिर अपनी दुकान बंद करनी पड़ी है. और ये किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत माना जाता है.

इस बीच आपको ये भी बता दें, कि मैंगलोर पुलिस, वीजी सिद्धार्थ की तलाश कर रही है. और उन्हें ढूंढ निकालने के लिए हेलीकॉप्टर्स के साथ साथ कोस्टगार्ड की भी मदद ली जा रही है. हम भी उनके सुरक्षित वापस लौटने की कामना करते हैं.  हमारा मानना है, कि जीवन में क़ामयाबी के साथ-साथ चुनौतियां भी आती रहती हैं. और इन चुनौतियों से ईमानदारी से मुक़ाबला करना चाहिए. ना कि निराश और हताश होकर कोई ख़तरनाक कदम उठाना चाहिए.