ZEE जानकारी: जानें क्यों संसद भवन में हो रही है सफाई और धुलाई

ये भवन 92 वर्ष पुराना है . लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि आज़ादी के बाद पहली बार बहुत बड़े स्तर पर संसद भवन की धुलाई और सफ़ाई हो रही है .

ZEE जानकारी: जानें क्यों संसद भवन में हो रही है सफाई और धुलाई

भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और संसद भवन, भारत में लोकतंत्र का सबसे बड़ा प्रतीक है . यहां पर आपके द्वारा चुने हुए सांसद महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते हैं और जनता के लिए ज़रूरी कानून बनाते हैं . इस इमारत का उद्घाटन अंग्रेज़ों के ज़माने में वर्ष 1927 में हुआ था . ये भवन 92 वर्ष पुराना है . लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि आज़ादी के बाद पहली बार बहुत बड़े स्तर पर संसद भवन की धुलाई और सफ़ाई हो रही है .

Zee News की टीम ने इस अनोखी पहल पर Special Reporting की है . हमारी Team ने इस विषय पर लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन से बात की है . सुमित्रा महाजन ने ये बताया कि संसद भवन के गलियारों से लेकर गुंबदों तक की पूरी धुलाई पहली बार की जा रही है. आप में से बहुत से लोगों को संसद भवन घूमने का मौका नहीं मिला होगा . इसलिए आज हमने इस विश्व प्रसिद्ध इमारत के इतिहास पर एक विशेष DNA टेस्ट तैयार किया है जो आपके ज्ञान में ज़बरदस्त इज़ाफा करेगा . 

23 मई को लोकसभा चुनाव के परिणाम आएंगे . जनता 543 सांसदों को चुनकर संसद भेजेगी . इस नई लोकसभा को 17वीं लोकसभा कहा जाएगा . लोकसभा की वर्तमान स्पीकर सुमित्रा महाजन ने संसद भवन के प्रशासनिक अधिकारियों की एक विशेष बैठक बुलाई थी. और 17वीं लोकसभा के सांसदों के स्वागत के लिए विशेष तैयारियां करने के निर्देश दिए थे . 

संसद का पूरा प्रशासन, संसद भवन के सफाई अभियान में जुटा हुआ है . प्रशासन, विशेषज्ञों की मदद से संसद भवन के करीब 90 वर्ष पुराने Furniture को भी Polish करवा रहा है . ये Furniture भी संसद भवन की एक विरासत है . इसका ख्याल रखते हुए, इसे हटाया नहीं जाएगा . संसद भवन के इस Makeover के लिए 16वीं लोकसभा को श्रेय दिया जाना चाहिए . क्योंकि पहली बार संसद की व्यापक सफाई का फैसला 16वीं लोकसभा में ही लिया गया है . 

संसद भवन एक विशाल गोलाकार भवन है... यानी इसे एक गोल घेरे में बनाया गया है . संसद भवन करीब 6 एकड़ में फैला हुआ है . इसके बाहरी हिस्से में कुल 144 खंभे हैं जबकि तीन मंज़िल वाले इस भवन में 148 कमरे हैं . संसद भवन के निर्माण में उस दौर में 83 लाख रुपये का खर्च आया था.

संसद में कमेटी के चेयरमैन, सभी केंद्रीय मंत्रियों और प्रधानमंत्री के बैठने के लिए अलग से कमरे होते हैं . 

संसद में 12 प्रवेश द्वार हैं . अलग-अलग प्रवेश द्वार से अलग-अलग संसद सदस्यों का प्रवेश होता है . 

संसद भवन में प्रधानमंत्री के प्रवेश के लिए अलग द्वार है. 

विपक्ष के बड़े नेताओं के प्रवेश के लिए संसद भवन में अलग द्वार है. 

लोकसभा स्पीकर के प्रवेश के लिए अलग द्वार है. 

और राज्यसभा के चेयरमैन के प्रवेश के लिए भी अलग द्वार है.

संसद भवन में मुख्य रूप से चार बड़े Hall हैं . 

पहला लोकसभा, दूसरा राज्य सभा, तीसरा Central Hall और चौथा संसद की पुरानी Library 

संसद भवन का Central Hall, इस इमारत की सबसे ऐतिहासिक जगह है . इसी Hall में भारत के संविधान की रचना हुई थी. भारत को स्वतंत्र देश की शक्तियां इसी हॉल में मिली थीं.

इसी Central Hall में भारत के पहले गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलवाई थी . 

Central Hall में ही भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संसद भवन में अपना पहला भाषण दिया था . जिसका शीर्षक था Tryst of Destiny.

आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा इमारत के निर्माण से पहले... सुप्रीम कोर्ट, संसद भवन परिसर में Central Hall के पास मौजूद एक Hall में काम करती थी . 1950 में सुप्रीम कोर्ट अपनी मौजूदा इमारत में स्थानांतरित हो गया.

और बाद में उस Hall को संसद भवन की Library बना दिया गया.

इस Library की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि यहां पर भारत के संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त सभी भाषाओं के अखबार आते हैं . 

ये Library भारत की सबसे बड़ी Libraries में से एक है . यहां भारत के संविधान की मूल प्रति भी रखी हुई है.

आज हम आपको संसद की 81 वर्ष पुरानी तस्वीरें भी दिखाएंगे . इसकी एक झलक आप इस वक्त अपने TV Screen पर देख रहे हैं . ये संसद भवन की 81 वर्ष पुरानी तस्वीरें हैं . यहां आपको एक Board भी नज़र आ रहा है जिस पर लिखा है... Bullock Carts Prohibited. यानी यहां पर बैलगाड़ियों को लाना मना है . आज हमने संसद भवन के इतिहास की दिलचस्प जानकारियों वाला एक वीडियो विश्लेषण आपके लिए तैयार किया है . इससे आपके ऐतिहासिक और राजनीतिक ज्ञान में काफी वृद्धि होगी. 23 मई को आने वाले नतीजों से पहले ये आपके लिए एक सौगात है.

बात संसद की सफाई की हो ही रही है, तो आज आपको 18 साल पुराना एक अनुभव बताना चाहता हूं. 

13 दिसम्बर 2001 को देश की संसद पर आतंकवादी हमला हुआ था. हमले में शामिल आतंकवादी फायरिंग करते हुए लोगों की जान ले रहे थे. और संसद भवन की दीवारों को छलनी कर रहे थे. उस हमले में संसद भवन को काफी नुकसान पहुंचा था. 18 साल पहले मैं संसद भवन के परिसर में था. और मेरी आंखों के सामने से एक आतंकवादी ने संसद भवन के गेट नंबर 1 से अंदर घुसने की कोशिश की थी. 

ये वही गेट है, जिससे ज़्यादातर सांसदों की एंट्री संसद भवन के अंदर होती है. लेकिन उस दिन तेज़ धमाके में एक आतंकवादी के शरीर के कई टुकड़े हो गए थे. और उस दौरान संसद भवन की दीवार लहू-लुहान हो गई थी. कई जगह गोलियों के निशान थे. उस वक्त संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था और कई सांसद सदन के भीतर मौजूद थे. और हमले के अगले दिन भी सदन की कार्यवाही होनी थी. इसलिए तत्काल प्रभाव से इस जगह की सफाई की गई थी. और खून के धब्बे मिटाए गए थे. 

हालांकि इस बार दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की वजह से संसद भवन की धुलाई और सफाई की ज़रूरत पड़ी है. संसद के अलावा राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट पर भी प्रदूषण का बहुत बुरा असर पड़ा है . अब इस स्वच्छता अभियान के अगले चरण में इन दोनों की भी सफाई की जायेगी .

अब हम आपको धरती से करीब 11 किलोमीटर नीचे समुद्र की गहराई में लेकर चलते हैं . इस जगह का नाम है Mariana Trench . ये दुनिया की सबसे गहरी समद्री जगह है . अब तक समुद्र की गहराई में जाने वाले कई खोजी यात्री.... Mariana Trench की गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर चुके हैं लेकिन पहली बार अमेरिका के Victor Vescovo को यहां तक पहुंचने में सफलता मिली है . Victor Vescovo अमेरिका की नौसेना में अधिकारी रह चुके हैं . इस यात्रा में किस तरह तरह के ख़तरे हैं और इतनी गहराई में Victor को क्या मिला... ये हम आपको आगे बतायेंगे लेकिन उससे पहले आपको ये पता होने चाहिए कि Mariana Trench कहां है. और वहां पहुंचना कितना मुश्किल है.

सबसे पहले दुनिया के नक्शे पर Mariana Trench की लोकेशन देखिए. Pacific Ocean में ये जो घुमावदार आकार का हिस्सा दिखाई दे रहा है . यहीं Mariana Trench है . इसके ऊपर जापान है, नीचे की तरफ ऑस्ट्रेलिया है. और बगल में Philippines है

Mariana Trench की औसत लंबाई करीब ढाई हज़ार किलोमीटर और चौड़ाई 69 किलोमीटर है . इसकी कुल गहराई करीब 11 हज़ार मीटर है यानी करीब 11 किलोमीटर . आसान भाषा में कहा जाये तो Mariana Trench की गहराई में पूरा Mount Everest समा सकता है . Mount Everest की कुल ऊंचाई 8 हज़ार 848 मीटर है . इसके बाद भी कम से कम 2 हज़ार 252 मीटर जगह... और बच जायेगी . अगर दुनिया की सबसे ऊंची इमारत... बुर्ज ख़लीफा की बात करें तो इतनी गहराई में बुर्ज ख़लीफा जैसी 13 इमारतें समा सकती हैं. जबकि 36 Eiffel Tower बड़े आराम से फिट हो सकते हैं . 

Mariana Trench की यात्रा करने वाले Victor Vescovo पहले ऐसे इंसान हैं जो 10 हज़ार 927 मीटर की गहराई तक गये हैं . उन्होंने यहां करीब 4 घंटे बिताये . इससे पहले दो undersea explorers...Mariana Trench की यात्रा पर गये थे लेकिन वो 10 हज़ार 916 मीटर की गहराई तक पहुंच पाये थे . 

वर्ष 2012 में मशहूर filmmaker....James Cameron ने भी Mariana Trench की यात्रा की थी लेकिन वो 10 हज़ार 908 मीटर की गहराई से वापस लौट आये थे . 

समुद्र की गहराई में जाने पर सबसे ज़्यादा परेशानी....हवा के दबाव के कारण होती है . समंदर की गहराई में हवा का दबाव धरती की तुलना में 1 हज़ार गुना ज़्यादा होता है . 

समुद की गहराई में जाने लिये Submarine का इस्तेमाल किया जाता है . अगर इस यात्रा के दौरान किसी भी gadget में एक मामूली spark हो जाये तो पूरी Submarine में आग लग सकती है . इसलिये ये एक रोमांचक यात्रा होने के साथ- साथ एक ख़तरनाक यात्रा भी है . 

अब आपको इस रोमांचक यात्रा का सबसे कड़वा अनुभव भी जानना चाहिए . समंदर की 11 किलोमीटर की गहराई में Victor Vescovo को प्लास्टिक का कूड़ा मिला है . इनमें प्लास्टिक के बैग और कुछ मिठाई के डिब्बों को पैक करने वाले प्लास्टिक के थैले मिले हैं. ये पर्यावरण और समुद्री जीवों के लिए एक ख़तरनाक संकेत हैं. आये दिन हम ऐसी ख़बरे देखते हैं कि प्लास्टिक खाने की वजह से समुद्री जीवों की मौत हो रही है . परेशानी की बात ये है कि प्लास्टिक समुद्र के अंदर करीब 400 वर्षों तक बना रहता है, नष्ट नहीं होता . और Sea Food के ज़रिये प्लास्टिक के अंश... इंसानों के शरीर में भी प्रवेश कर जाते हैं . यानी इस रोमांचक यात्रा से आज पूरी दुनिया को ये संदेश भी मिला है कि प्लास्टिक दुनिया के लिए कितना ख़तरनाक है.