ZEE जानकारी: जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले से हुआ आंतकवादियों का सफाया

बारामूला को आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन का गढ़ कहा जाता था. लेकिन भारतीय सेना, स्थानीय पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स ने इसे आतंक की गिरफ्त से आज़ाद करवा लिया है. 

ZEE जानकारी: जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले से हुआ आंतकवादियों का सफाया

जम्मू-कश्मीर का बारामूला ज़िला, स्थानीय आतंकवादियों से पूरी तरह मुक्त हो चुका है. यानी इस वक्त बारामूला में एक भी स्थानीय आतंकवादी जीवित नहीं है.

बारामूला को आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन का गढ़ कहा जाता था. लेकिन भारतीय सेना, स्थानीय पुलिस और Paramilitary Forces ने इसे आतंक की गिरफ्त से आज़ाद करवा लिया है. 

29 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब कश्मीर घाटी के किसी ज़िले में एक भी स्थानीय आतंकवादी जीवित नहीं है. 

सुरक्षाबलों ने पिछले दो सालों में बारामूला में 50 आतंकवादियों को मार गिराया. इनमें से 35 आतंकवादी पिछले साल मारे गए हैं. 

इसके अलावा, श्रीनगर में भी, वहां का एक भी स्थानीय आतंकवादी ज़िन्दा नहीं है. 

कल ही बारामूला में एक Encounter हुआ था. जिसमें सुरक्षाबलों ने तीन आतंकवादियों को मार दिया था. और इसी के बाद जम्मू-कश्मीर के DGP, दिलबाग सिंह ने दावा किया, कि बारामूला, राज्य का पहला 'आतंकवादी-मुक्त' ज़िला बन चुका है. 

ये कोई छोटी-मोटी उपलब्धि नहीं है. क्योंकि, अब कश्मीर घाटी में आतंकवादियों की रीढ़ की हड्डी पूरी तरह टूट चुकी है. इसे समझने के लिए आप ये तस्वीर देखिए. जिसमें कश्मीर घाटी के सक्रिय आतंकवादियों के इतिहास और उनके वर्तमान का अंतर साफ दिखता है. बुरहान वानी सहित ये सारे आतंकवादी 10 साल पहले जीवित थे. और खून की होली खेल रहे थे. लेकिन आज की सच्चाई ये है, कि इन 11 आतंकवादियों में से एक आतंकवादी को गिरफ्तार कर लिया गया. जबकि बाकी के 10 आतंकवादी मारे जा चुके हैं. अब ये समझिए, कि स्थानीय आतंकवादियों की मौत से क्या फायदा होगा ? 

जम्मू-कश्मीर में ज़्यादातर आतंकवादी पाकिस्तान से घुसपैठ करके भारत की सीमा में दाखिल होते हैं. और स्थानीय आतंकवादियों की मदद से दहशत फैलाते हैं. लेकिन, अब स्थानीय आतंकवादी ही जीवित नहीं हैं. ऐसे में कम से कम बारामूला और श्रीनगर में उनकी मदद करने वाला कोई नहीं बचा. हालांकि, उत्तरी कश्मीर के बाकी ज़िलों में.. अब भी 85 से ज़्यादा आतंकवादी सक्रिय हैं. 

जो एक जगह से दूसरी जगह आते-जाते रहते हैं. लेकिन इनमें से ज़्यादातर आंतकवादी, विदेशी हैं...यानी उनका रिश्ता पाकिस्तान से है. 

पूरी कश्मीर घाटी की बात करें, तो अब भी कम से कम 230 आतंकवादी किसी बड़े हमले को अंजाम देने की फिराक में हैं. लेकिन Operation All Out के तहत सुरक्षाबलों का अभियान भी बहुत तेज़ गति से चल रहा है. इस आतंकवाद विरोधी अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में सुरक्षाबलों को जम्मू-कश्मीर में ऐतिहासिक कामय़ाबी मिली है. पिछले वर्ष 252 आतंकवादी मारे गए थे. और पिछले तीन दिनों में सुरक्षाबलों ने 9 आतंकवादियों को मार गिराया है. जनवरी 2019 में अब तक 19 आतंकवादी मारे जा चुके हैं. अगर भारत के सुरक्षाबलों का Strike Rate देखा जाए, तो ऐसा लग रहा है, कि कश्मीर घाटी में सक्रिय 230 आतंकवादियों के पास अब ज़्यादा समय नहीं बचा है.