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Zee जानकारी: डुबकी लगाने के लायक भी नहीं रह गया गंगा नदी का पानी

भारतीय संस्कारों में गंगा सिर्फ एक नदी नहीं है बल्कि आत्मा के परमात्मा से मिलन का ज़रिया है. हमारे देश में गंगा को एक पूजनीय नदी माना जाता है और इसे मां का दर्जा दिया जाता है. मां गंगा के प्रति देश के लोगों की आस्था बहुत गहरी हैं. 

Zee जानकारी: डुबकी लगाने के लायक भी नहीं रह गया गंगा नदी का पानी

भारतीय संस्कारों में गंगा सिर्फ एक नदी नहीं है बल्कि आत्मा के परमात्मा से मिलन का ज़रिया है. हमारे देश में गंगा को एक पूजनीय नदी माना जाता है और इसे मां का दर्जा दिया जाता है. मां गंगा के प्रति देश के लोगों की आस्था बहुत गहरी हैं. अगर कोई व्यक्ति गंगा के बारे में अभद्र टिप्पणी कर दें तो हमारे देश में दंगे हो जाएंगे लेकिन सच्चाई ये है कि अपनी पूजनीय मां गंगा को हमने एक नाला बनाकर छोड़ दिया है. आपने देखा होगा कि देश के लोग आज भी अपने घरों में गंगाजल को किसी बर्तन या बोतल में भरकर बड़ी पवित्रता के साथ रखते हैं. पूजा-पाठ के दौरान बड़ी शुद्धता के साथ गंगाजल का आचमन किया जाता है.

लेकिन आपको ये सुनकर झटका लगेगा कि कि जिस गंगाजल से आप आचमन करते हैं वो डुबकी लगाने के लायक भी नहीं हैं. अगर आप ऐसा करते हैं तो आप बहुत बीमार हो सकते हैं . Central Pollution Control Board यानी CPCB ने गंगा में बढ़ते प्रदूषण से जुड़े हुए कुछ चौंकाने वाले आंकड़े जारी किये हैं. CPCB के मुताबिक गंगा नदी जब उत्तर प्रदेश के शहरों से गुज़रती है, तो उसमें प्रदूषण की मात्रा सबसे ज़्यादा होती है. उत्तर प्रदेश में सबसे ख़राब हालत इलाहाबाद के संगम तट पर है जहां गंगा नदी में यमुना और सरस्वती का संगम होता है.

गंगा नदी में एक ख़तरनाक bacteria का स्तर सामान्य से 10 गुना ज़्यादा पाया गया है. ये Bacteria सीवर के गंदे पानी में पाया जाता है. अब आप खुद सोचिए कि गंगा नदी का प्रदूषण किस स्तर तक पहुंच चुका है. हमारे देश के ज़्यादातर इलाकों में सीवर के पानी को बिना Sewage Treatment के गंगा नदी में छोड़ दिया जाता है और इसी से ये ख़तरनाक Bacteria गंगा नदी में पहुंच जाता है. गंगा नदी जब उत्तर प्रदेश के कानपुर, इलाहाबाद और वाराणसी से गुज़रती है तो इस Bacteria का स्तर सामान्य से 16 गुना ज़्यादा हो जाता है. यानी इन शहरों में गंगा की पवित्रता पूरी तरह ख़त्म हो चुकी है.

इलाहाबाद और वाराणसी देश के सबसे बड़े तीर्थस्थलों में गिने जाते हैं. इन शहरों से गुजरने वाली गंगा नदी में लाखों लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं. लेकिन सच्चाई ये है कि लोगों के पाप धोने वाली गंगा अब एक नाला बन चुकी है. और नाले में डुबकी लगाने से मुक्ति नहीं बीमारियां मिलती हैं. डॉक्टरों के मुताबिक bacteria वाले इस प्रदूषित पानी के इस्तेमाल से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं और सबसे ज़्यादा ख़तरा Hepatitis A नामक बीमारी का होता है. CPCB की रिपोर्ट में गंगा नदी में प्रदूषण का सबसे कम स्तर उत्तराखंड में है.

अगर आपको पवित्र और शुद्ध गंगाजल की तलाश है तो आप उत्तराखंड जा सकते हैं. ये अजीब विरोधाभास है कि हमारे देश में गंगा को एक पूजनीय नदी माना जाता है इस आधार पर गंगा को साफ और पवित्र रखने की ज़िम्मेदारी देश के हर व्यक्ति की है लेकिन सच्चाई ये है कि देश का भ्रष्ट सिस्टम गंगा की सफाई के नाम पर अपनी जेबें भरता आया है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 1985 में Ganga Action Plan की शुरूआत की गई थी इस योजना के तहत गंगा की सफाई के लिए 39 हजार 226 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

इसके अलावा वर्ष 2011 में World Bank गंगा की सफाई के लिए भारत सरकार को 6 हज़ार 500 करोड़ रुपये का लोन दिया था. इसके बाद वर्ष 2015 में NDA की सरकार ने नमामी गंगे परियोजना के तहत 20 हज़ार करोड़ रुपये का बजट तैयार किया जिसमें से करीब 7000 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं लेकिन गंगा की हालत देखकर लगता है कि इन योजनाओं का लाभ गंगा तक पहुंचा ही नहीं. 21वीं सदी के भारत की दुखद तस्वीर यही है...कि सदियों तक करोड़ों लोगों को मोक्ष दिलाने वाली गंगा. आज खुद ही अपनी हालत पर आंसू बहा रही है.