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ZEE जानकारी: 14 महीने के भीतर गिर गई कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार

कर्नाटक विधानसभा में कुमार स्वामी मंगलवार को विश्वासमत हासिल नहीं कर पाए और उनकी सरकार गिर गई . 

ZEE जानकारी: 14 महीने के भीतर गिर गई कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार

कहते हैं आत्म विश्वास किसी इंसान के लिए अच्छा होता है लेकिन अति आत्म विश्वास सर्वनाश का कारण बन जाता है. और राजनीति की दुनिया में तो overconfidence की वजह से सरकारें तक गिर जाती हैं . कर्नाटक में आज से 426 दिन पहले कांग्रेस और जेडीएस की सरकार ने शपथ ली थी . लेकिन महज़ 14 महीने के भीतर कुमारस्वमी का सत्ता वाला सपना चूर चूर हो गया . 

कर्नाटक विधानसभा में कुमार स्वामी मंगलवार को विश्वासमत हासिल नहीं कर पाए और उनकी सरकार गिर गई . कर्नाटक में बेमेल गठबंधन ने कैसे 14 महीनों में दम तोड़ दिया, ये हम आपको बताएंगे लेकिन पहले आप ये समझिए कि आज कर्नाटक विधानसभा में कुमार स्वामी सरकार का शक्ति प्रदर्शन कैसे एक Flop Show साबित हुआ .

GFX IN इस विश्वास मत के दौरान सदन में उपस्थित विधायकों की संख्या 204 थी, इनमें में से 99 विधायकों ने कुमारस्वामी सरकार के पक्ष में मत दिया, जबकि 105 विधायकों ने इसके खिलाफ वोटिंग की . कर्नाटक विधानसभा में सीटो की कुल संख्या 225 है. इसमें से स्पीकर को हटा दिया जाए तो 224 विधायक बचते हैं . लेकिन इनमें से 20 विधायक सदन में हाज़िर ही नहीं हुए, जिससे सदन की संख्या घटकर 204 रह गई . कुमारस्वामी को सरकार बचाने के लिए 103 विधायकों का साथ चाहिए था, लेकिन सिर्फ 99 विधायकों मे पक्ष में वोट डाला जबकि 105 Votes के साथ जादुई आंकड़ा बीजेपी के पक्ष में चला गया . GFX OUT 

गैरहाज़िर विधायकों में 14 कांग्रेस के, 3 जेडीएस के , 2 निर्दलीय और 1 बीएसीपी का विधायक शामिल था . कांग्रेस के सभी 12 विधायक बागी हो चुके थे . जबकि 2 विधायक अस्पताल में भर्ती होने की वजह सदन में नहीं पहुंचे . सदन से गैरहाज़िर रहने वालों में बीएसपी के विधायक बीएसपी के विधायक एन महेश भी शामिल थे जो बीएसपी अध्यक्ष मायावती के निर्देश के बावजूद सदन में नहीं पहुंचे . एन महेश से नाराज़ मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया है . <<SHOTS OUT>>

एचडी कुमारस्वामी की सरकार गिरने के साथ ही कर्नाटक में करीब 2 हफ्ते से जारी सियासी नाटक पर भी ब्रेक लग गया है . लेकिन कांग्रेस और जेडीएस के कार्यकर्ताओं की तरफ से हंगामे के आसार देखते हुए बैंगलुरू धारा 144 लगा दी गई है .

कांग्रेस ने इस हार का ठीकरा बीजेपी पर फोड़ते हुए कहा है कि वो देश भर में बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन करेगी . लेकिन आज का दिन कांग्रेस के लिए आत्म विश्लेषण का दिन होना चाहिए . 14 महीने पहले जब येदियुरप्पा सदन में विश्वासमत हासिल नहीं कर पाए थे, तब कांग्रेस ने जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बना ली थी . सीटों के नजरिए से कांग्रेस जेडीएस से बड़ी पार्टी थी लेकिन बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस ने सत्ता की कमान कुमारस्वामी को सौंप दी . आपको बता दें कि चुनावों के दौरान जेडीएस और कांग्रेस ने एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था . यानी कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन में स्थायित्व के साथ साथ नैतिकता की मात्रा भी बहुत कम थी .

कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार गिरते ही कांग्रेस के पतन वाली कहानी में एक पन्ना और जुड़ गया है . 2014 में कांग्रेस की 13 राज्यों में सरकार थी, जबकि आज कांग्रेस शासित राज्यों की संख्या सिर्फ 5 रह गई है . कांग्रेस का चुनावी निशान हाथ का पंजा है और अब कांग्रेस के पास हाथ जितने राज्य हैं उन्हें हाथ की इन्हीं 5 उंगलियों पर गिना जा सकता है .

बीजेपी की बात करें तो फिलहाल उसके पास 16 राज्यों में सत्ता है . देश का 13.3 लाख स्कैव्यर किलोमीटर का इलाका ऐसा है जहां बीजेपी की सरकार है. जबकि देश के 59 करोड़ 86 लाख लोगों पर भी बीजेपी का शासन है .

कर्नाटक के लोग इन दिनों भयंकर सूखे का सामना कर रहे हैं . किसान परेशान हैं. आम लोगों के पास पीने का पर्याप्त पानी तक नहीं है लेकिन पिछले 2 हफ्तों से कर्नाटक के नेताओं की राजनीति वाली प्यास बुझने का नाम नहीं ले रही थी . किसी भी राज्य के सियासी संकट का सबसे बड़ा खामियाज़ा वहां की जनता भुगती है और कर्नाटक भी इसका अपवाद नहीं है . हमें उम्मीद है कि कर्नाटक में इस बार टिकाऊ सरकार का गठन होगा और आम लोगों को कुछ राहत मिलेगी .