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ZEE जानकारी: ज्यादा गर्मी की वजह होता है पैसे का भारी नुकसान!

संयुक्त राष्ट्र की एक रिसर्च के मुताबिक ज़्यादा गर्मी की वजह से पैसे का भारी नुकसान होने वाला है.

ZEE जानकारी: ज्यादा गर्मी की वजह होता है पैसे का भारी नुकसान!

देश कई हिस्सों में आज कल बहुत गर्मी पड़ रही है. आपने अपने आस-पास के कई लोगों को ये कहते सुना होगा कि आज गर्मी बहुत है . ज़ाहिर है ऐसी गर्मी में कोई काम को करने का मन नहीं करता . घर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं होती . आप अपनी जगह बिल्कुल सही हैं. लेकिन इसी सोच की वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होने वाला है. यानी भीषण गर्मी से आपकी ही नहीं, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की भी हालत ख़राब होने वाली है . 

पिछले कुछ समय से देश में बेरोजगारी और कम होती नौकरियों की चर्चा हो रही है. आज हम आपको इस समस्या का एक नया पहलू दिखाते हैं. संयुक्त राष्ट्र की एक रिसर्च के मुताबिक ज़्यादा गर्मी की वजह से पैसे का भारी नुकसान होने वाला है. इस लिस्ट में भारत पहले नंबर पर है. यानी सबसे ज़्यादा नुकसान भारत में होगा. 

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक बढ़ती गर्मी की वजह से लोगों को Heat Stress होता है. इससे काम करने की क्षमता कम हो जाती है. इसका सीधा असर देश की उत्पादन क्षमता पर पड़ता है. यानी नौकरियों के अवसर में कमी लाने का एक बड़ा कारण तेज गर्मी भी हो सकती है. 

यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि इस रिसर्च में Heat Stress जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया है. ये शब्द आपने पहली बार सुना होगा . इससे पहले आपने Heat Stroke यानी लू लगने के बारे में सुना होगा. इसमें शरीर में पानी का स्तर कम होने की वजह से लोगों की जान भी चली जाती है . 

Heat Stress का मतलब है तेज़ गर्मी की वजह से आपके शरीर और मन पर पड़ने वाला बुरा असर. सामान्य भाषा में कहें तो तेज़ गर्मी की वजह से ग़ुस्सा ज़्यादा आता है. तनाव भी बढ़ जाता है. ऐसी स्थिति में किसी काम को करने का मन नहीं करता है. आपने भी कई बार ऐसा महसूस किया होगा, जब ज़्यादा गर्मी की वजह से आप ने अपने काम टाल दिए होंगे.

रिसर्च में ये कहा गया है कि हर व्यक्ति एक तय सीमा तक गर्मी को सहन कर सकता है. अगर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाये तो तेज गर्मी की वजह से थकान, गुस्सा और तनाव होने लगता है. इसका सीधा असर आपके काम पर पड़ता है . 

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि Heat Stress की वजह से वर्ष 2030 तक दुनिया भर में Productive Hours यानी कामकाजी समय में करीब 2 प्रतिशत की कमी आयेगी. ये दुनिया भर में करीब 8 करोड़ नौकरियों के नुकसान के बराबर है. इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को करीब 165 लाख करोड़ रूपये का नुकसान होगा . 

भारत के मामले में ये नुकसान करीब साढ़े तीन करोड़ नौकरियों के बराबर है . यहां काम के घंटो में करीब 6 प्रतिशत की कमी आयेगी. 

रिसर्च में ये कहा गया है कि Heat Stress का सबसे ज़्यादा असर खेतों में काम करने वाले किसानों और निर्माण कार्यों में लगे मज़दूरों पर पड़ता है. ये दोनों ही लोग पूरे दिन सूर्य की तपिश को झेलते हैं.

भारत में 50 प्रतिशत से ज़्यादा लोग कृषि और मज़दूरी से जुड़े काम करते हैं. इसलिए भारत का नुकसान सबसे ज़्यादा होगा . 

Heat Stress की वजह से पूरी दुनिया में कृषि के काम में 60 प्रतिशत और मज़दूरी के काम में 19 प्रतिशत की कमी आयेगी . 

मोटे तौर पर इसका मतलब ये हुआ कि गर्मी की वजह से शारीरिक श्रम करने वालों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा . 

इस समस्या का दूसरा पहलू ये भी है कि भारत के लोग बढ़ती गर्मी के लिए सिर्फ़ सूर्य की तेज किरणों को ज़िम्मेदार मानते हैं. वो इस मामले में अपनी ज़िम्मेदारी से बचना पसंद करते हैं. 
 

शहरीकरण की वजह से पेड़ों की कटाई..बढता प्रदूषण.. गाड़ियों की बढ़ती संख्या..अतिक्रमण और इमारतों के निर्माण ने भारत के शहरों का तापमान बढ़ा दिया है . इस समस्या को Urban Heat Islands कहा जाता है 

शहरों में ज़्यादातर इमारतों के निर्माण में कंक्रीट का इस्तेमाल होता है. ज़्यादातर छतें Asphalt से बनाई जाती है. कंक्रीट और Asphalt सूर्य की गर्मी को सोख लेते हैं.

इसके अलावा Air Conditioner का इस्तेमाल भी गर्मी को बढ़ाता है. जब रात होती है तो यही इमारतें गर्मी छोड़ने लगती हैं. जिससे शहरों का तापमान बढ़ जाता है.

सबसे बड़ा विरोधाभास ये है कि जिन मशीनों का इस्तेमाल गर्मी को कम करने के लिए होता है. वही पृथ्वी का तापमान बढ़ाने का काम करते हैं.

पिछले 100 वर्षों में भारत का औसत तापमान 1.2 degree Celsius बढ़ चुका है . मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर हमारे देश का औसत तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया तो उस दिन भारत में रहना बहुत मुश्किल हो जाएगा.