ZEE जानकारी: बेहद जरूरी है रेलवे की पटरियों के किनारे अतिक्रमण की समस्या को सुलझाना

ये भारतीय रेलवे की हकीकत है कि उसकी पटरियों के किनारे जहां तक नज़र जाती है, वहां तक सिर्फ अतिक्रमण ही मिलता है. 

ZEE जानकारी: बेहद जरूरी है रेलवे की पटरियों के किनारे अतिक्रमण की समस्या को सुलझाना

आज सबसे पहले हम भारत के लोगों के चरित्र का विश्लेषण करेंगे. आज का भारत, बुलेट ट्रेन वाला सपना तो देख रहा है, लेकिन हम उस सपने को तोड़ने वाले लोगों और अपराधियों को नहीं देख पा रहे. भारत... वर्ष 2023 तक.. अपनी पहली बुलेट ट्रेन चलाना चाहता है.

मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर काम भी शुरू हो चुका है. जिस पर 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ेगी. लेकिन इस बात की क्या गारंटी है कि हमारे ही देश के लोग बुलेट ट्रेन को नहीं लूटेंगे ? कड़वा सत्य ये है कि अगर बुलेट ट्रेन आ भी गई, तो भी उसके ट्रैक के आसपास लोगों का कब्ज़ा हो जाएगा... उस पर भी झुग्गियां बन जाएंगी, और कानून को तोड़ने वाले ये तमाम लोग बुलेट ट्रेन में भी लूटपाट करेंगे. हो सकता है कि 2023 में आपको न्यूज़ चैनल्स और अखबारों में ये हेडलाइन देखने को मिले.. कि बदमाशों ने बुलेट ट्रेन को लूट लिया, उसमें तोड़फोड़ की.

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कल दिल्ली में एक ट्रेन के दो Coaches को लुटेरों ने लूट लिया. ये अपराधी ट्रेन में सवार लोगों को चाकू और हथियारों के दम पर लूट रहे थे और रेलवे के सुरक्षाकर्मी ट्रेन से गायब थे. 

ये घटना दिल्ली के बादली में हुई. गुरुवार की सुबह साढ़े 3 बजे जम्मू से दिल्ली आ रही दुरंतो एक्सप्रेस यहां से गुज़र रही थी. तभी ट्रेन के B3 और B7 कोच में 4 हथियारबंद लुटेरे घुसे और उन्होंने यात्रियों को लूटना शुरू कर दिया. उन्होंने लोगों से मारपीट की, यात्रियों के पैसे, ज़ेवर, कपड़े, फोन और जूते तक लूट लिए. सिर्फ 15 मिनट में ही ट्रेन की दो बोगियों में लूटपाट करके लुटेरे फरार हो गए. पुलिस की जांच में पता चला कि इन Coaches में RPF यानी Railway Protection Force का कोई भी जवान मौजूद नहीं था. 

जांच में ये भी पता चला कि लूट से पहले ट्रेन के Signalling System के साथ छेड़छाड़ की गई थी. जिसकी वजह से शॉर्ट सर्किट हुआ और ट्रेन का Signal, Green से Red हो गया. इसके बाद ट्रेन के ड्राइवर को ट्रेन रोकनी पड़ी. और फिर ट्रेन में लुटेरे चढ़ गए. 

इस पूरी ख़बर को देखने के दो एंगल हैं. पहला तो ये कि ये पूरी कानून व्यवस्था की समस्या है. ट्रेन में RPF के जवान मौजूद नहीं थे, अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, वगैरह वगैरह. ये वो एंगल है, जिस पर हर कोई बात करेगा. और हर कोई इसी दिशा में सोचेगा. 

लेकिन दूसरा एंगल भारत के लोगों के चरित्र से जुड़ा हुआ है. हमारे देश के लोगों का चरित्र ये है कि वो सरकारी संपत्ति को अपनी निजी संपत्ति समझते हैं.इसलिए अगर भारत में बुलेट ट्रेन आ भी जाएगी तो यहां के लोग उसे भी लूट लेंगे और उसके किनारे भी अतिक्रमण कर लेगें. 

ये भारतीय रेलवे की हकीकत है कि उसकी पटरियों के किनारे जहां तक नज़र जाती है, वहां तक सिर्फ अतिक्रमण ही मिलता है. रेलवे की पटरियों के आसपास रेलवे की ही ज़मीन होती है. लेकिन देश भर में इस ज़मीन के बहुत बड़े हिस्से पर लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है. रेलवे की ज़मीन के किनारे अवैध निर्माण हैं. और झुग्गी झोपड़ियां बनी हुई हैं. 

रेलवे के मुताबिक दिल्ली में रेल की पटरियों के नज़दीक करीब 75 हज़ार से ज्यादा अवैध निर्माण हैं. और इनमें से 25 हज़ार तो ऐसे हैं, जो Safety Zone में हैं, यानी जो रेल की पटरी के दोनों तरफ सिर्फ 15 मीटर के अंदर हैं. 

इस अवैध निर्माण को हटाने के लिए रेलवे ने अभियान भी चलाया लेकिन इन झुग्गियों में रहने वाले लोग अदालत से Stay Order ले आए. अब रेलवे के हाथ भी बंधे हुए हैं. 

अब हमारी तरह आप भी ये सोच रहे होंगे कि इन लोगों को रेल की पटरियों के किनारे बसने ही क्यों दिया गया? जब ये लोग शुरुआत में बस रहे होंगे, तो इन्हें हटाने की कोशिश क्यों नहीं की गई? इसका जवाब है वोट बैंक. इन झुग्गियों के किनारे लाखों की संख्या में लोग रहते हैं. जो मुफ्त का माल बांटने वाली पार्टियों के वोट बैंक हैं. इस वोटबैंक पर अलग अलग पार्टियों का कब्ज़ा होता रहता है. और ज़ाहिर है कोई भी नेता अपने वोटबैंक को नाराज़ नहीं करना चाहता. लेकिन इस अवैध कब्ज़े की वजह से रेलवे बहुत परेशान है. 
 
रेल की पटरियों के आसपास अतिक्रमण बढ़ने के साथ साथ ट्रेनों में अपराध भी बढ़ रहा है. 

National Crime Records Bureau यानी NCRB के आंकड़ों के मुताबिक 2009 से 2016 तक दिल्ली में रेलवे स्टेशनों और पटरियों पर होने वाले अपराध, 5 गुना बढ़ गये हैं. 

2009 में ये अपराध सिर्फ 864 थे, जो 2016 में बढ़कर 4 हज़ार 368 हो चुके हैं. 2016 के बाद के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. 

दिल्ली देश की राजधानी है. दिल्ली और NCR में रेलवे के कुल 45 स्टेशन्स हैं. 
इन स्टेशन्स से हर रोज़ करीब एक हज़ार ट्रेनों आवाजाही होती है. जिनमें करीब 15 लाख लोग यात्रा करते हैं. 

रेलवे के मुताबिक जैसे ही Trains दिल्ली की सीमा में प्रवेश करती हैं. ड्राइवर को ट्रेन की गति धीमी करनी पड़ती है. जिसकी वजह से अपराधियों को ट्रेन के अंदर प्रवेश करने का मौका मिलता है. और फिर वो यात्रियों से मारपीट और लूटपाट करते हैं. 

ये सिर्फ दिल्ली और NCR की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश की समस्या है. 

NCRB के आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में रेलवे में होने वाले अपराधों की संख्या में 2 साल में 34% का इज़ाफा हुआ है. 

हत्या, रेप, किडनैपिंग, चोरी और लूटपाट जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. 

2014 में GRP ने अपराधों के 31 हज़ार 609 केस दर्ज किए थे, जो 2016 में बढ़कर 42 हज़ार 388 हो गए. 

अभी कुछ दिन पहले ये ख़बर आई थी कि Northern Railway नाबालिग पत्थरबाज़ों से कैसे परेशान है? 

इन पत्थरबाज़ों ने बीते एक साल में T-18, राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, तेजस और हमसफर जैसी ट्रेनों सहित 300 से अधिक पैसेंजर ट्रेन्स पर पत्थर बरसाए थे. जिसमें कई यात्री घायल भी हुए. इस पत्थरबाज़ी में कई ट्रेनों के शीशे टूट गए थे. 

रेलवे के मुताबिक रेलवे पर होने वाली पत्थरबाज़ी की 85% घटनाओं में नाबालिग शामिल होते थे. इसलिए उन्हें पकड़ा तो जाता था, लेकिन काउंसलिंग के बाद उन्हें छोड़ दिया जाता था. लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ. जिसके बाद रेलवे ने इन पत्थरबाज़ों से दोस्ती की. उन्हें खेलने का सामान, और टॉफियां दी गईं. 

रेलवे ने ये भी बताया था कि दिल्ली और NCR में एक हज़ार से ज्यादा झुग्गी बस्तियां हैं. और ये घटनाएं इन्हीं झुग्गी बस्तियों के आसपास होती हैं. 

ट्रेनों में लूटपाट की ये घटना बताती है कि भारत के लोगों की मानसिकता मुफ़्त का माल लूटने में लगी हुई है . उनकी नीयत में नैतिकता, सच्चाई और सुविधाओं का सम्मान करने वाली भावना....पूरी तरह समाप्त हो चुकी है . उन्हें जब मौका मिलता है वो अपने स्तर के हिसाब से लूटपाट कर लेते हैं . लोगों में नैतिक पतन वाली ये मानसिकता सिर्फ़ हथियार के दम पर लूट तक ही सीमित नहीं है . हमारे देश के लोग यात्री के रूप में ट्रेनों में लगाई गईं सुविधाओं को चुराकर या उन्हें नुकसान पहुंचाकर बहुत खुश होते हैं . 

आपको याद होगा कुछ दिन पहले भारत की Semi-high speed train, T-18 की खिड़की के शीशों को पत्थर मारकर तोड़ दिया था . 

पिछले 2 वर्षों में हम देख चुके हैं कि महामना एक्सप्रेस के सभी Coaches में बहुत अच्छी सुविधाएं दी गईं थीं.. लेकिन ट्रेन चलने के दो हफ्ते के अंदर ही लोगों ने इस ट्रेन की toilet accessories की चोरी कर ली और इसे एक कूड़ेदान में बदल दिया था . 

इसके अलावा तेजस एक्सप्रेस के पहले ही सफर में लोगों ने ट्रेन से कई Headphones और LCD Screens चोरी कर लिए .

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि हमारे देश की ट्रेनों से हर रोज़ बड़ी संख्या में कंबल, चादर, तकिये और तौलिये चोरी कर लिये जाते हैं . पिछले 6 महीनों में इन घटनाओ से रेलवे को 62 लाख रूपये का नुकसान हो चुका है . 

अगर इसमें तोड़फोड को शामिल कर लिया जाए तो ये नुकसान हर साल ढाई करोड़ रूपये से ज़्यादा हो जाता है. <<PCR GFX PCR GFX OUT>>
यानी कुछ लोगों की मानसिकता ऐसी हो चुकी है, कि वो अच्छी योजनाओं का भी गलत इस्तेमाल करके उसे खराब कर देंगे . बिजली मिलेगी तो उसकी चोरी होगी, फ्री इंटरनेट दिया जाएगा तो उसका भी गलत इस्तेमाल करेंगे. सड़कों पर किसी नियम का पालन नहीं करेंगे.. .और मौका मिलते ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाएंगे . हमारी नज़र में चाकू की नोंक पर ट्रेन को लूटना या यात्री के रूप में ट्रेन में लगाई गई सुविधाओं की चोरी करना ...इन दोनों में ज़्यादा फर्क नहीं है . क्योंकि चोरी और लूट..एक जैसी मानसिकता का परिणाम हैं . भारत को इस मानसिकता के खिलाफ़ असहनशीलता दिखानी होगी.