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ZEE जानकारी: पानी को बचाना जरूरी है

भारत की जनसंख्या इस वक्त 135 करोड़ है . अगर इनमें से आधे लोग रोज़ाना पीने का आधा लीटर पानी भी बचा लें, तो हर रोज़ करीब 33 करोड़ लीटर पानी की बचत हो सकती है. 

ZEE जानकारी: पानी को बचाना जरूरी है

आज DNA की शुरुआत हम एक ऐसे विश्लेषण से करेंगे जो आपके मन में बचत वाले संस्कार भर देगा . ये बचत रुपये और पैसों की नहीं है बल्कि ये बचत संसाधनों की है . वो संसाधन जिनसे किसी व्यक्ति की प्यास बुझती है और पेट भरता है . हम पानी और भोजन की बात कर रहे हैं .

भारत में हम जब भी किसी निराश व्यक्ति के मन में आशा भरने की कोशिश करते हैं तो अक्सर हम उससे कहते हैं कि ये मत देखो की Glass आधा खाली है, बल्कि ऐसा समझो की Glass आधा भरा है . ये जीवन की परेशानियों से निपटने का Positive यानी आशावादी तरीका है . ये शब्द निराशा भरे मन का सूखा दूर कर देते हैं . 

लेकिन आज मेरे हाथ में पानी का जो Glass है वो आधा भरा नहीं बल्कि आधा खाली है, और यही सच है . ऐसा मैं आपको निराश करने के लिए नहीं कह रहा. बल्कि ये पानी बचाने वाली नई Positive सोच है. जिसे अपनाकर आप पानी की कमी झेल रहे करोड़ों लोगों की प्यास बुझा सकते हैं .

पानी बचाने की ऐसी ही सुखद पहल यूपी विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित की तरफ से की गई है . यूपी विधानसभा के अध्यक्ष ने निर्देश दिए हैं कि, विधानसभा परिसर और सचिवालय में आने वाले लोगों को आधा Glass पानी ही पीने के लिए दिया जाए . अगर इससे किसी की प्यास नहीं मिटती, तब मांगने पर उन्हें और पानी दिया जाएगा . इसके पीछे का तर्क ये है कि इससे पानी की बर्बादी में कमी आएगी .

आपको लग रहा होगा कि आधा Glass पानी पीने से पानी का संकट कैसे दूर हो सकता है ? लेकिन आप सोचिए अगर देश की आधी जनसंख्या भी इस मुहिम का हिस्सा बन जाए, तो हर रोज़ पीने का कितना पानी बचाया जा सकता है . 
 
भारत की जनसंख्या इस वक्त 135 करोड़ है . अगर इनमें से आधे लोग रोज़ाना पीने का आधा लीटर पानी भी बचा लें, तो हर रोज़ करीब 33 करोड़ लीटर पानी की बचत हो सकती है. और इस तरह से हर महीने 1 हज़ार करोड़ लीटर पानी बचाया जा सकता है . 

आधा लीटर पानी बचाने की बात आपको मामूली लग रही होगी . लेकिन अगर इस बचे हुए पानी को भारत के सभी लोगों के बीच समान अनुपात में बांट दिया जाए तो, हर व्यक्ति को हर महीने लगभग साढ़े 7 लीटर अतिरिक्त पानी मिल सकता है .

कहते हैं कि बूंद बूंद से सागर भरता है. और जिन लोगों के पास पीने के पानी की एक बूंद भी नहीं है, उनके लिए ये 7 लीटर पानी भी वरदान साबित हो सकता है . 

सिर्फ आधा Glass पानी बचाकर ही नहीं. बल्कि रोज़मर्रा की आदतें बदलकर भी पानी बचाया जा सकता है . इसके लिए आप नहाने का उदाहरण ले सकते हैं . 

एक अनुमान के मुताबिक एक व्यक्ति Shower में 10 मिनट तक नहाता है, तो वो सालाना 1 लाख Glass पानी इस्तेमाल करता है . यानी ये पानी बचाकर 1 लाख लोगों की प्यास एक साथ बुझाई जा सकती है .

अगर नहाने के वक्त में एक मिनट की भी कमी कर दी जाए. तो हर महीने करीब 200 लीटर पानी बचाया जा सकता है . ये 800 Glass पानी के बराबर है .

भारत में जब भी घर में मेहमान आते हैं, तो हम सबसे पहले उन्हें पीने के लिए पानी देते हैं. ये भारत के संस्कार हैं. लेकिन अब वक्त आ गया है कि आप सिर्फ पानी तभी Offer करें. जब लोगों को सच में प्यास लगी हो . हम ऐसा इसलिए कह रहें हैं क्योंकि अक्सर लोग थोड़ा सा पानी पीकर Glass वापस रख देते हैं और वो जूठा पानी किसी काम का नहीं रहता . ये पानी की बर्बादी है और हमें इसे रोकना होगा .

आपकी जेब में रखा पैसा आपका है, आप इस पैसे से चाहे जितना पानी खरीदें चाहे जितना भोजन खरीदें ये आपकी मर्ज़ी है . लेकिन संसाधन समाज के होते हैं ये आपको याद रखना होगा . हमे लगता है कि शायद भारत के लोग ऐसा नहीं मानते इसलिए वो अपने Glass का पानी बर्बाद करने के साथ साथ, अपनी थाली में रखा भोजन भी अक्सर बर्बाद कर देते हैं .

CSR journal की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के लोग जितनी मात्रा में खाना Waste करते है, पूरे ब्रिटेन के लोग उतना खाना खा भी नहीं पाते .

भारत सरकार के एक आंकड़े के मुताबिक भारत में हर साल 6 हज़ार 700 करोड़ किलो खाना बर्बाद हो जाता है . इसकी कीमत 92 हज़ार करोड़ रुपये है . यानी भारत में हर रोज़ 250 करोड़ रुपये ख़ाना किसी भूखे के पेट में जाने की बजाय कूड़ेदान में चला जाता है .

जितना भोजन भारत में हर साल बर्बाद होता है उससे बिहार के लोगों का पेट पूरे एक साल के लिए भरा जा सकता है . 

भारत में खाना, सिर्फ उत्पादन के दौरान और थाली में ही बर्बाद नहीं होता बल्कि शादियों में भी भोजन की खूब बर्बादी होती है . 

बैंगलुरु में 10 Proffesors ने मिलकर 6 महीने तक, शादियों में होने वाली खाने की बर्बादी पर एक सर्वे किया, जिसमें ये बात सामने आई कि इस दौरान 75 शादियों में 943 टन खाना बर्बाद हुआ . अगर इस भोजन को बचा लिया जाता तो भारत के 2 करोड़ 60 लाख लोगों को एक वक्त के लिए भरपेट खाना मिल जाता है .

ये सर्वे सिर्फ बैंगलुरु में किया गया था, लेकिन देश भर में हर साल हज़ारों शादियां होती है. अंदाज़ा लगाइए इन शादियों में कितना खाना बर्बाद होता होगा . ये हाल तब है, जब हमारे देश में अन्न को देवता माना जाता है .

भारत में करीब 19 करोड़ लोग ऐसे हैं जो कुपोषण के शिकार हैं , यानी इन लोगों को 2 वक्त की रोटी भी ठीक से नसीब नहीं हो पाती है . जबकि 10 करोड़ लोगों को हर रोज़ पानी की एक एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ता है . 

इसलिए आज हमने भारत के इन्हीं लोगों की भूख और प्यास को ध्यान में रखते हुए ये विश्लेषण तैयार किया है . 

आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों देश के लोगों से अपील की थी कि वो पानी बचाएं और पानी बचाने का अपना आइडिया दूसरे लोगों से भी शेयर करें . 

भारत में मेहमानों से पानी पूछने की परंपरा सदियों पुरानी है . ऐसा इसलिए है क्योंकि पहले के ज़माने में अक्सर लोग पैदल ही सफर किया करते थे . तब देर तक चलने की वजह से लोगों को प्यास लग जाया करती थी, इसलिए मंज़िल पर पहुंचते ही सबसे पहले उन्हें पीने के लिए पानी दिया जाता था, लेकिन अब ज़माना बदल चुका है . हम ये बिल्कुल नहीं कह रहे कि आप मेहमानों को पीने का पानी ना दें, हम सिर्फ ये कह रहे हैं कि पानी उतना ही दें, जितने की ज़रूरत है, क्योंकि जो पानी आप आज बचाएंगे हो सकता है वही पानी किसी प्यासे के काम आ जाए . 

वर्ष 1990 में एक फिल्म आई थी, जिसका नाम था थोड़ा सा रुमानी हो जाए . इस फिल्म के नायक नाना पाटेकर थे . फिल्म में नाना पाटेकर का किरदार लोगों को बारिश बेचा करता था . आज हमनें इसी फिल्म के एक मशहूर डायलॉग के जरिए छोटा सा वीडियो विश्लेषण तैयार किया है . जिससे आपको पानी की कीमत का अंदाज़ा हो जाएगा . 

हमें उम्मीद कि अब आप पानी का महत्व समझ गए होंगे, आप अपने घर और ऑफिस में आने वाले मेहमानों का सत्कार पहले की तरह करते रहेंगे . लेकिन जब बात पानी की आएगी तो आप एक बार उनसे ये ज़रूर पूछेंगे कि वो प्यासे हैं या नहीं .