close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

ZEE जानकारी: कालजयी साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के जीवन और लेखन से जुड़ी खास बातें

मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी में हुआ था . मुंशी प्रेमचंद का असली नाम... धनपत राय श्रीवास्तव था . 

ZEE जानकारी: कालजयी साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के जीवन और लेखन से जुड़ी खास बातें

अब हम सामाजिक न्याय की बात करने वाले ...कालजयी साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की बात करेंगे . जिनका बुधवार (31 जुलाई) को जन्मदिन है .  मुंशी प्रेमचंद को इसीलिए कालजयी साहित्यकार कहा जाता है . क्योंकि उनके उपन्यास, कहानियां और नाटक आज भी प्रासंगिक है . प्रेमचंद के साहित्य को समय की सीमा में नहीं बांधा जा सकता है . 

मुंशी प्रेमचंद का जन्म आज से 139 वर्ष पहले... 31 जुलाई 1880 को वाराणसी में हुआ था . मुंशी प्रेमचंद का असली नाम... धनपत राय श्रीवास्तव था . उनको बदले हुए नाम के साथ लिखना पड़ा क्योंकि वर्ष 1908 में अंग्रेज़ों ने उनके पहले उर्दू कहानी संग्रह 'सोज़े वतन' को ज़ब्त कर लिया था . देशप्रेम की कहानियों की वजह से इस कहानी संग्रह की बची हुई प्रतियों को जला दिया गया था . 

अंग्रेज़ों की निगाहों से बचने के लिए उनको अपना नाम बदलना पड़ा . मुंशी प्रेमचंद... उनका असली नाम नहीं है . लेकिन उनका साहित्य इतना प्रसिद्ध हुआ कि वो बदले हुए नाम से ही मशहूर हो गए . आज धनपत राय श्रीवास्तव को कोई नहीं जानता है . लेकिन मुंशी प्रेमचंद का नाम पूरे देश को पता है . जबकि ये दोनों एक ही व्यक्ति के नाम हैं . 

सन् 1900 में यानी 20 वर्ष की उम्र में मुंशी प्रेमचंद ने सरकारी स्कूल में अध्यापक की नौकरी शुरू की .  प्रेमचंद करीब 33 वर्षों तक साहित्य लिखते रहे . ये वो दौर था जब भारत पर अंग्रेज़ों का राज था . उस वक्त भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी . एक तरफ अंग्रेज़ों का अत्याचार जारी था और दूसरी तरफ अनुसूचित जाति के लोगों पर ज़मींदार वर्ग भी अत्याचार कर रहा था . 

उस दौर में बहुत सारे साहित्यकार भी थे जो अंग्रेज़ों की चापलूसी करने वाली कहानियां लिख रहे थे . लेकिन प्रेमचंद के साहित्य में व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह का भाव था . उनकी कहानियों, नाटकों और उपन्यासों में देशभक्ति, सामाजिक आंदोलन और राजनीतिक संघर्ष का मिश्रण नज़र आता है . प्रेमचंद का साहित्य, भेदभाव और शोषण की सामाजिक समस्याओं के खिलाफ विद्रोह है . 

एक बात जो शायद बहुत सारे लोगों को नहीं पता होगी . मुंशी प्रेमचंद, महात्मा गांधी के बहुत बड़े समर्थक थे . वर्ष 1920 से 1922 के बीच जब महात्मा गांधी ने अ-सहयोग आंदोलन चलाया . मुंशी प्रेमचंद ने भी अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था .

हिंदी सिनेमा पर भी प्रेमचंद का प्रभाव है .शतरंज के खिलाड़ी मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी है . प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सत्यजीत Ray ने इस पर एक हिंदी फिल्म बनाई . कहानी के नाम पर ही फिल्म का नाम रखा गया... शतरंज के खिलाड़ी . 

हिंदी सिनेमा के नायक और प्रेमचंद के कहानियों और उपन्यासों के नायक में बहुत समानता है . दोनों में व्यवस्था के प्रति विद्रोह और स्वाभिमान का भाव देखा जाता है . आपने ऐसी बहुत सी हिंदी फिल्में देखी होंगी जिनमें एक गरीब और पिछड़े वर्ग की पृष्ठभूमि से निकला हुआ नायक, अत्याचार करने वाले जमीदारों और अमीरों के खिलाफ संघर्ष करता है . इस तरह की फिल्मों की कहानी पर प्रेमचंद के साहित्य का प्रभाव बहुत स्पष्ट देखा जा सकता है . आधुनिक भारत के निर्माण में प्रेमचंद के साहित्य का भी बहुत बड़ा योगदान है . इसीलिए आज हमने प्रेमचंद के संपूर्ण जीवन का एक ज्ञानवर्धक विश्लेषण किया .