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ZEE जानकारी: ताकत के नशे में चूर नेता कर रहे हैं देश को शर्मिंदा

आए दिन ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं जिनमें नेताओं के कर्म देश को शर्मिंदा कर रहे हैं.

ZEE जानकारी: ताकत के नशे में चूर नेता कर रहे हैं देश को शर्मिंदा

आपको भारत के लोकतंत्र पर बहुत गर्व होगा. हमारे देश के हर नागरिक को इस पर नाज़ करना चाहिये. यही दुनिया भर में भारत की सबसे बड़ी पहचान है. हमारे देश को दुनिया महात्मा गांधी, पंडित नेहरू और सरदार पटेल के नाम से जानती है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से जो नेता भारत में हेडलाइन बन रहे हैं...वो हमारे लोकतंत्र में खलनायक की तरह उभरे हैं.

आज उत्तराखंड के एक बीजेपी विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है...जिसमें वो हथियार लेकर नाच रहे हैं. इस वीडियो में उनके पास एक कार्बाइन है...दो रिवॉल्वर और पिस्तौल भी हैं. पिस्तौल उन्होंने मुंह में दबाई हुई है और नाच रहे हैं.

कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन एक पत्रकार से अभद्रता के मामले में पहले ही बीजेपी से निलंबित चल रहे हैं. और अब इस वीडियो ने साबित कर दिया है कि शराब के साथ वो सत्ता के नशे में किस तरह डूबे हुए हैं. कुंवर प्रणव सिंह अपने नाम के आगे चैंपियन लिखते हैं...वो उत्तराखंड के ख़ानपुर से बीजेपी विधायक हैं और लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं. आज इनके विधानसभा क्षेत्र और राज्य के लोगों को ये तस्वीरें देखकर शर्म आ रही होगी. 

वीडियो में बीजेपी विधायक कुंवर प्रणव सिंह अपने समर्थकों के साथ...जो बातें कर रहे हैं वो हम आपको सुना भी नहीं सकते. एक विधायक के मुंह से ऐसी अभद्र भाषा शोभा नहीं देती है. इसलिये उन्होंने अपनी इस हरकत के साथ अपने क्षेत्र और राज्य की जनता के साथ अपनी पार्टी को भी बहुत निराश किया है. प्रणव सिंह चैंपियन बीजेपी से पहले कांग्रेस में थे. 

वर्ष 2012 में वो ख़ानपुर से ही कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीते थे. इसके बाद वो बीजेपी में शामिल हुए और वर्ष 2017 में वो बीजेपी के टिकट पर दोबारा विधायक बने. इसलिये ऐसे नेताओं की पार्टी नहीं, उनकी फ़ितरत और उनके सोच को समझना ज़रूरी है. ऐसे नेता हमारे लोकतंत्र पर धब्बा हैं. और उन्हें अपने पद पर रहने का कोई अधिकार नही हैं. आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ऐसी हरकत करने वाले नेता अपनी जनता की बातों को लेकर कितने गंभीर होंगे. बीजेपी ने कहा है कि कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी. 

आए दिन ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं जिनमें नेताओं के कर्म देश को शर्मिंदा कर रहे हैं.

कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन से पहले 4 जुलाई को महाराष्ट्र में सिंधु दुर्ग से कांग्रेस के विधायक नितेश राणे ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी के एक इंजीनीयर पर कीचड़ डाला था. नितेश राणे महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नारायण राणे के बेटे हैं.

इससे पहले 26 जून को इंदौर में बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय ने एक नगर निगम के अधिकारी की क्रिकेट बैट से पिटाई की थी. आकाश बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं.

इस घटना की काफ़ी आलोचना हुई थी और ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी ने बीजेपी की संसदीय बैठक में कहा था कि किसी का घमंड बर्दाश्त नहीं किया जाएगा चाहे वो किसी का भी बेटा क्यों ना हो. इसके बाद आकाश विजयवर्गीय को पार्टी की तरफ़ से नोटिस भी जारी किया गया. लेकिन इसके बाद अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है

इसी वर्ष 6 मार्च को बीजेपी के बेलगाम नेताओं की एक तस्वीर सामने आई थी...जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी के पूर्व सांसद शऱद त्रिपाठी ने अपनी ही पार्टी के विधायक की जूतों से पिटाई कर दी थी.

उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर में एक बैठक के दौरान उन्होंने अपनी पार्टी के एक विधायक को पीट डाला था. पार्टी की तरफ़ से उन्हें ये सज़ा मिली कि बीजेपी ने इस लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया था.

ये घटनाएं बताती हैं कि हमारे नेताओं में घमंड की भावना कैसे बढ़ती जा रही है. चाहे आकाश विजयवर्गीय हो...नीतेश राणे हों...या फिर कोई प्रणव सिंह चैंपियन जैसे विधायक. ये सभी भारत के लोकतंत्र पर दाग़ लगा रहे हैं. 

अक्सर ऐसे वीडियो भी आते हैं जब कोई विधायक या सांसद टोल प्लाज़ा पर हंगामा करता है, क्योंकि वो अपने लंबे क़ाफ़िले का टोल टैक्स नहीं देना चाहता. भारत में लाल बत्ती का कल्चर वर्ष 2017 में खत्म कर दिया गया था...लेकिन आज भी ख़ुद को VIP मानने वाले कई लोग Toll Plaza पर 50 रुपये का Tax देने के बजाय लड़ने को तैयार हो जाते हैं. एयरपोर्ट पर अपनी सुरक्षा जांच होने पर उन्हें ग़ुस्सा आ जाता है.

वो आम नागरिक की तरह कतार में लगना पसंद नहीं करते हैं. ऐसे लोग हमारे देश की संसद तक पहुंच जाते हैं. सोचिये जो जनता की इज़्ज़त नहीं करता है...वो संसद में जाकर कैसे उनकी बातें करेगा. वो कैसे उनके मुद्दे उठाएगा.

ऐसे नेता अपने लिये भव्यता, धूमधाम और चमक-धमक वाला ट्रीटमेंट चाहते हैं. भारत में इसे Special Treatment कहा जाता है...और इस शब्द का इस्तेमाल दिखावे के लिये ज़्यादा किया जाता है. नेता और रसूख़दार लोग इसका इस्तेमाल ख़ुद को आम नागरिक से अलग दिखाने में करते हैं.

इस मानसिकता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार प्रहार कर चुके हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से पहले 25 मई को NDA की बैठक में ये संदेश दिया था कि भारत को एक साफ़ सुथरी राजनीति की ज़रूरत है. आजकल हमारे देश में न्यू इंडिया की बात की जा रही है. ज़ाहिर है ये नेता इसका हिस्सा नहीं बन सकते. ये बुनियादी तौर पर नये भारत की परिकल्पना के विरोधी हैं. इसलिये पूरे देश और राजनीतिक दलों के लिये ये गहराई से विचार करने वाला विषय है.