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ZEE जानकारी: सूरत में इमारत में आग लगने से 19 छात्रों की मौत

शुरुआती जांच में पता चला है, कि शॉर्ट सर्किट की वजह से आग बहुत तेज़ी से फैली. मरने वाले छात्रों की उम्र 14 से 17 के बीच बताई जा रही है.

ZEE जानकारी: सूरत में इमारत में आग लगने से 19 छात्रों की मौत

आज हम सबसे पहले देश की सबसे बड़ी Killing Machine का DNA टेस्ट करेंगे. और लोगों को मारने वाली इस Machine का नाम है System....आज सूरत में इसी System का 36 सेकेंड वाला सबसे भयानक चेहरा सामने आया है. जिसने 19 छात्रों की जान ले ली. दुख की बात ये है, कि जिन लोगों की जान गई है. वो दरअसल अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन, वो ये भूल गए थे, कि उनके पीछे भी मौत है. और आगे भी मौत है. ये हादसा, क्यों और कैसे हुआ...ये समझने से पहले आज पूरे देश को 36 सेकेंड वाला ये Video देखना होगा. क्योंकि, इस वीडियो में ही इस दुखद विश्लेषण का सार छिपा है.

आपने जिस इमारत से लोगों को कूदते देखा, वो सूरत का बिज़नेस सेंटर है. ये चार मंज़िल की बिल्डिंग है. आग चौथे Floor पर लगी थी. जान बचाने के लिए छलांग लगाने वाले ज़्यादातर छात्र थे, जो यहां ट्यूशन लेने आए थे. यहां फैशन डिज़ाइनिंग और Maths की Classes होती थीं. और हादसे के वक्त 11वीं कक्षा की Maths की क्लास चल रही थी. क्लास में जाने के लिए जो सीढ़ियां थीं, वो लकड़ी की थीं. शुरुआती जांच में पता चला है, कि शॉर्ट सर्किट की वजह से आग बहुत तेज़ी से फैली. मरने वाले छात्रों की उम्र 14 से 17 के बीच बताई जा रही है.

ये Tution Classes बिल्डिंग में अवैध तरीके से चल रही थीं. इसके लिए ज़रूरी Building Use Permission नहीं ली गई थी. गुजरात में Building Use Permission के लिए कुछ बातें ज़रूरी होती हैं. जैसे कि Fire Department से Fire Saftey Clearance लेना पड़ता है. 15 मीटर से ऊंची इमारत में लिफ्ट इंस्पेक्टर्स से सर्टिफिकेट लेना होता है. लेकिन इस बिल्डिंग के मालिकों ने ऐसा नहीं किया था.

इमारत के ठीक नीचे टायर की भी एक दुकान थी. जिससे आग तेज़ी से फैली. यानी सिस्टम गहरी नींद में सोता रहा. इमारत में अवैध काम होते रहे. और आग ने 20 लोगों की जान ले ली. हमेशा की तरह इस बार भी देश के सिस्टम ने बिल्डिंग में लगी आग की जांच के आदेश दिए हैं. हादसे में मारे गए बच्चों के परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा कर दी गई है. Twitter पर दुख और संवेदना जता दी गई है. लेकिन, कोई ये नहीं पूछ रहा कि इस हादसे का ज़िम्मेदार कौन है? विडंबना इस बात की है कि हमारे देश में ना जाने कितने कोचिंग सेंटर और tution classes...आज भी, ऐसे ही, खुलेआम, बिना किसी अनुमति के चल रहे हैं. बच्चों के मां-बाप उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर बनाने, पढ़ाई में अच्छे नंबर लाने के लिए भेजते हैं. 

इन अवैध कोचिंग सेंटर और tution classes से न तो प्रशासन को परेशानी, ना छात्रों को परेशानी और ना ही मां-बाप को परेशानी है. क्योंकि उन्हें मौत को स्वीकार करने में कोई Objection नहीं है. भारत के 60 करोड़ वोटर्स ने इतनी सारी ताकतों को हराकर लोकसभा चुनाव में अपनी पसंद के नेता को तो चुन लिया. लेकिन भारत की जनता को सिस्टम की अवैध सोच से कोई आपत्ति नहीं है. क्योंकि भारत, एक NOC यानी No Objection Country बन चुका है.

हमारे देश के लोगों ने हर बुराई को ख़ुशी से स्वीकार कर लिया है. रिश्वत लेने पर No Objection है. बेईमानी पर No Objection है. प्रदूषण पर No Objection है. सार्वजनिक संपत्ति की चोरी पर No Objection है. आप ये भी कह सकते हैं कि भारत का हर आदमी.. NOC बांट रहा है. ये भारत का दोहरा चरित्र है. ये चरित्र देश को पतन की ओर ले जा रहा है.

कोई भी हादसा या कड़वा अनुभव.. एक सबक देकर जाता हैं. लेकिन हमारे देश में हादसों और गलतियों से सबक नहीं लिया जाता.

इसी वर्ष फरवरी के महीने में दिल्ली के एक होटल में आग लगने से 17 लोग मारे गए थे. इस हादसे में भी चौथी मंज़िल से नीचे कूदकर कुछ लोगों ने जान बचाने की कोशिश की. लेकिन मारे गए. इस होटल को Fire Department से NOC मिला हुआ था. लेकिन इसके बाद भी यहां पर आग को बुझाने वाले उपकरण काम नहीं कर रहे थे. होटल को सिर्फ़ चार मंज़िल तक बनाने की इजाज़त थी. लेकिन इस होटल में 6 मंज़िलें बनी हुई थीं .

दिसंबर 2017 में मुबंई के कमला Mills कंपाउंड में दो Restaurants में भी आग लगी थी. इस दुर्घटना में 14 लोगों की मौत हो गई थी. उसमें भी सिस्टम की लापरवाही पकड़ी गई थी.

दिसबंर 2011 में कोलकाता में एक अस्पताल में Short Circuit की वजह से आग लगी थी. इसमें 90 लोगों की मौत हो गई थी. 

13 जून 1997 को दिल्ली में उपहार सिनेमा में भयानक अग्निकांड हुआ था . तब इसमें 59 लोगों की मृत्यु हो गई थी. और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे . इस इमारत के मालिकों को अग्निकांड का दोषी पाया गया था . इनमें से एक दोषी... गोपाल अंसल को एक वर्ष की सज़ा हुई थी और वो व्यक्ति भी वर्ष 2017 में अपनी जेल की सज़ा पूरी होने के बाद छूट गया. हमारे देश में इंसानों की जान बहुत सस्ती है . ज़रा सोचिए कि 59 लोगों की मौत के लिए ज़िम्मेदार एक व्यक्ति को सज़ा हुई और वो भी एक वर्ष में जेल से छूट गया . उपहार सिनेमा के इस अग्निकांड को 22 साल बीत चुके हैं, लेकिन हम आज भी उसी जगह पर खड़े हैं, जहां 22 वर्ष पहले खड़े हुए थे.

हमारे देश में लोग जर्जर इमारतों के नीचे दबकर मर जाते हैं... गड्ढ़ों में गिरकर मर जाते हैं.... पुल गिरने से लोगों की मौत हो जाती है... लोग ट्रेन से कटकर मारे जाते हैं.. और इसका दोष सिस्टम पर डाल दिया जाता है. सवाल ये है कि ये सिस्टम कौन है? सिस्टम का कोई नाम नहीं होता, कोई चेहरा नहीं होता, दुनिया की किसी भी अदालत में सिस्टम को कठघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता, सिस्टम को फांसी पर नहीं लटकाया जा सकता. उसे किसी अपराध की सज़ा नहीं दी जा सकती. और लापरवाही का सिलसिला चलता रहता है. हमारे देश में सिस्टम की कमियां ही भ्रष्ट तंत्र को आगे बढ़ने की हिम्मत देती हैं. और इसके बुरे नतीजे जनता को भुगतने पड़ते हैं.