Breaking News
  • नोएडा: सेक्‍टर 64 की एक एक्‍सपोर्ट फैक्‍ट्री में आग, फायर ब्रिगेड की 16 गाड़ियां मौके पर मौजूद
  • बडगाम: जैश आतंकियों के 6 मददगार गिरफ्तार

ZEE जानकारी: सभी समस्याओं की जड़- 'जनसंख्या विस्फोट'

हमारे बच्चे जनसंख्या पर निबंध लिखते रहे और नेता गोष्ठियां और सेमीनार में हिस्सा लेते रहे, लेकिन फिर भी जनसंख्या बढ़ती रही. 

ZEE जानकारी: सभी समस्याओं की जड़- 'जनसंख्या विस्फोट'

आज सबसे पहले हम एक बोरिंग विषय की बात कर रहे हैं. ये ऐसा विषय है, जिसमें ना तो ग्लैमर है, ना चमक दमक है, न नोट हैं और ना ही वोट हैं और इस विषय में TRP भी नहीं है. और य़े जानते हुए भी आज हम आपको इस विषय के बारे में बताने की हिम्मत कर रहे हैं.

इस विषय का नाम है, जनसंख्या. बचपन में आपने भी स्कूल में भारत की बढ़ती हुई जनसंख्या की समस्या पर निबंध ज़रूर लिखा होगा. लेकिन असल में ये समस्या स्कूली किताबों से आगे बढ़ ही नहीं पाई. हमारे बच्चे जनसंख्या पर निबंध लिखते रहे और नेता गोष्ठियां और सेमीनार में हिस्सा लेते रहे, लेकिन फिर भी जनसंख्या बढ़ती रही. 
बड़ी बड़ी योजनाएं बनती रहीं, हम दो हमारे दो के नारे भी चले, परिवार नियोजन यानी Family Planning भी हुई, बड़े बड़े अभिनेता और अभिनेत्रियां सरकारी विज्ञापनों से पैसे कमाकर भी चले गए, लेकिन जनसंख्या का बढ़ना रुका नहीं.

आप अगर ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि भारत की हर समस्या के पीछे जो मूल समस्या है, वो है बढ़ती हुई आबादी. गरीबी, भुखमरी, बेरोज़गारी, कमज़ोर शिक्षा व्यवस्था, कमज़ोर स्वास्थ्य सेवाएं, बढ़ते हुए अपराध, प्रदूषण, पीने के लिए साफ पानी की कमी और गंदगी....इन सारी समस्याओं की जड़ में एक मूल समस्या है, जिसका नाम है जनसंख्या. यहां तक कि आरक्षण की समस्या भी जनसंख्या की वजह से पैदा हुई है.

आज विश्व जनसंख्या दिवस है. जिस तरह लोग सुबह अलार्म को बंद करके दोबारा सो जाते हैं, ठीक उसी तरह भारत भी हर बार विश्व जनसंख्या दिवस वाले अलार्म को बंद करके फिर से सो जाता है. 

हमें लगता है कि बढ़ती जनसंख्या के ख़तरे का अलार्म आपको हर रोज़ सुनना चाहिए. जनसंख्या जैसे विषय पर चर्चा करने के लिए हम और आप किसी एक दिन के मोहताज नहीं हैं. आज हम आपको दुनिया की आबादी से जुड़ी बहुत सारी जानकारी देंगे. और जनसंख्या और उसके प्रभावों पर बात करेंगे. 

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक अभी दुनिया की जनसंख्या 760 करोड़ है, जो 2030 में बढ़कर 860 करोड़, 2050 में 980 करोड़ और वर्ष 2100 में 1120 करोड़ हो जाएगी. 

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक दुनिया की जनसंख्या में हर वर्ष 8 करोड़ 30 लाख नये लोग जुड़ जाते हैं. 

चीन और भारत अभी दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश हैं. चीन की जनसंख्या 141 करोड़ और भारत की जनसंख्या 135 करोड़ से ज्यादा है. 

दुनिया की जनसंख्या में चीन की भागीदारी 19% की और भारत की करीब 18% की है. 

United Nations के मुताबिक अगले 6 वर्षों में भारत की जनसंख्या चीन से आगे निकल जाएगी. और अगले 10 वर्षों में चीन की जनसंख्या कम होनी शुरू होगी, जबकि भारत की जनसंख्या वर्ष 2061 तक लगातार बढ़ेगी. और तब तक भारत की जनसंख्या 168 करोड़ हो जाएगी, इसके बाद जनसंख्या घटेगी. 

1950 में भारत की जनसंख्या 37 करोड़ थी, और अगले 50 वर्षों यानी सन 2000 में जनसंख्या 100 करोड़ के पार हो गई. और इसके बाद सिर्फ 18 वर्षों में भारत की जनसंख्या में 35 करोड़ की वृद्धि हुई है. 

क्या आपने कभी इस बात की कल्पना की है कि बहुत जल्द आपको, अपने शहर में गाड़ी चलाने के लिए सड़क नहीं मिलेगी. पीने के लिए साफ पानी नहीं मिलेगा. हवा इतनी प्रदूषित होगी कि आप सांस नहीं ले पाएंगे. और हर दूसरे कदम पर अवैध कब्ज़े होंगे. ये सब कुछ इसलिए होगा क्योंकि हमारे शहरों में आबादी का विस्फोट हो चुका है. आबादी के RDX में आग लग चुकी है.

अभी दुनिया की 55% आबादी शहरी इलाकों में रहती है, जो 2050 तक 68% हो जाएगी. 

दुनिया के शहरों पर 2050 तक 250 करोड़ लोगों का बोझ बढ़ जाएगा, जिसमें से 90% एशिया और अफ्रीका के शहर होंगे. ज़ाहिर है इस बोझ में भारत का शेयर बहुत ज़्यादा है.

अगले 32 वर्षों में भारत के शहरों में 41 करोड़ से ज्यादा लोग बढ़ जाएंगे. 

और इसमें भी भारत की राजधानी दिल्ली सबसे आगे है. 2028 तक दिल्ली दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला शहर बन जाएगा. 

अभी जापान की राजधानी टोक्यो सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है, वहां की जनसंख्या 3 करोड़ 70 लाख है, जबकि एक अनुमान के मुताबिक इस वक़्त दिल्ली की जनसंख्या करीब 2 करोड़ 90 लाख है. लेकिन सिर्फ 10 वर्षों के बाद दिल्ली की आबादी टोक्यो को पीछे छोड़ देगी. 2028 में दिल्ली की जनसंख्या 3 करोड़ 72 लाख हो जाएगी और टोक्यो की आबादी 3 करोड़ 68 लाख हो जाएगी. 

ये समस्या सिर्फ दिल्ली की नहीं है. बल्कि पूरे देश की है. वैसे तो पूरी दुनिया की जनसंख्या बढ़ रही है. लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रभाव भारत पर पड़ रहा है. भारत में लोग गांवों को छोड़कर शहरों की तरफ भाग रहे हैं. और इसके लिए भी पिछले 70 वर्षों की सरकारी नीतियां ही जिम्मेदार हैं. क्योंकि देश में हर राजनीतिक पार्टी की सरकारों ने ग्रामीण इलाकों में कभी ऐसी सुविधाएं ही नहीं दीं, जो शहरों में हैं. ग्रामीण इलाकों में ना तो अच्छी शिक्षा की सुविधा है और ना ही स्वास्थ्य सुविधाएं हैं. इसीलिए लोगों को गांव छोड़कर शहरों की तरफ जाना पड़ता है. इसकी वजह से शहरों में भीड़ बढ़ गई है. और अब भीड़ की वजह से शहरों की क्षमताएं भी जवाब देने लगी है. 

1950 तक दुनिया के शहरों में सिर्फ 75 करोड़ लोग रहते थे, लेकिन अब यानी 2018 में ये जनसंख्या बढ़कर 420 करोड़ हो चुकी है. 

1990 में भारत के शहरों में 22 करोड़ लोग रहते थे, जो सिर्फ 28 वर्षों में बढ़कर 45 करोड़ हो चुके हैं. और अगले 32 वर्षों यानी 2050 तक 81 करोड़ हो जाएंगे.