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ZEE जानकारी: यातायात नियमों का पालन है जरूरी

21वीं सदी के भारत में सड़क पर चलती एक गाड़ी बंदूक के बराबर है. जो कभी भी आपकी जान ले सकती है. 

ZEE जानकारी: यातायात नियमों का पालन है जरूरी

अब हम देश की सड़कों पर आपकी मनमर्ज़ियों का एक DNA टेस्ट करेंगे . भारत के संविधान में भारत के लोगों को ट्रैफिक के नियम तोड़ने का मौलिक अधिकार नहीं मिला था. लेकिन आप भारत की किसी भी सड़क पर निकल जाइये. आपको एक मिनट में ये समझ में आ जाएगा, कि यहां के लोग ट्रैफिक के नियमों को तोड़ने में ज़रा सा भी संकोच नहीं करते. वो इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं और उन्हें कभी नियमों को तोड़ने का अपराधबोध नहीं होता. ऐसे लोग सड़कों को अपनी निजी संपत्ति मानते हैं. 

21वीं सदी के भारत में सड़क पर चलती एक गाड़ी बंदूक के बराबर है. जो कभी भी आपकी जान ले सकती है. वैसे, एक बंदूक से निकलने वाली गोली एक बार में कितने लोगों को मार पाएगी...5 या 6....लेकिन गाड़ी से एक साथ कई लोगों को कुचला जा सकता है. हमारे देश में बंदूक का लाइसेंस देने के लिए तो काफी सावधानी बरती जाती है. लेकिन गाड़ी का लाइसेंस धड़ल्ले से बांट दिया जाता है. दरअसल बिना किसी ट्रेनिंग के गाड़ी चलाने वाले बंदूक लेकर चलते हैं. विडंबना देखिए, अब तो आतंकवादियों ने भी बंदूक के साथ-साथ गाड़ियों को अपना हथियार बना लिया है.

हर रोज़ सड़क पर आपका सामना ऐसे लोगों से ज़रूर होता होगा. इनकी हरकतों पर आपको गुस्सा आता होगा, और आप खुद को असहाय महसूस करते होंगे. क्योंकि ऐसे अनुशासनहीन लोगों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता. लेकिन भारत के सिस्टम को अब ये समझ में आ गया है कि सिर्फ चालान काटने से बात नहीं बनेगी.

नियम तोड़ने वालों को जेल भेजना होगा. जुर्माने की रकम बढ़ानी होगी. लेकिन अगर देश में Wrong Side पर गाड़ी चलाने वाले सभी लोगों को जेल में डाल दिया गया, तो हमारे देश की सारी जेलें भर जाएंगी. ऐसी स्थिति उत्पन्न ना हो. इसके लिए लोकसभा में भी पिछले दो दिनों से चर्चा हो रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी ने, कल लोकसभा में Motor Vehicles Amendment Bill पेश किया. इस बिल में ट्रैफिक के नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए कठोर सज़ा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है. इसलिए सबसे पहले आप क़ागज़ और कलम लेकर इन बातों को Note कर लीजिए.

प्रस्तावित Bill में शराब पीकर गाड़ी चलाने पर जुर्माने की रकम 2 हज़ार रुपये से बढ़ाकर 10 हज़ार रुपये करने का प्रावधान है.

बिना हेलमेट गाड़ी चलाने पर 1 हज़ार रूपए का ज़ुर्माना और तीन महीने के लिए लाइसेंस ज़ब्त करने का प्रावधान
रखा गया है. फिलहाल ये ज़ुर्माना सिर्फ 100 रूपए है.

Rash Driving करने पर 5 हज़ार रुपये के जुर्माने का प्रस्ताव

बिना लाइसेंस के ड्राइविंग करने पर 5 हज़ार रुपये के जुर्माने का प्रावधान

जो लोग सीट बेल्ट नहीं लगाते, उनके लिए 1 हज़ार रुपये जुर्माने का प्रस्ताव 

अगर आप मोबाइल फोन पर बात करते हुए गाड़ी चलाते हैं, तो प्रस्तावित Bill के मुताबिक आपको 5 हज़ार रुपये देने पड़ सकते हैं.

किसी आपातकालीन गाड़ी को रास्ता नहीं देने पर पहली बार में 10 हज़ार रूपए के ज़ुर्माने का प्रावधान है.

अगर कोई नाबालिग गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके अभिभावक या गाड़ी के मालिक दोषी माने जाएंगे. इसके लिए 25 हज़ार रुपये के जुर्माने के साथ-साथ 3 साल की जेल की सज़ा का प्रावधान रखा गया है. साथ ही गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी रद्द हो सकता है. 

अगर सड़क के गलत डिजाइन, उसके निर्माण और उसके रखरखाव में कमी की वजह से किसी की मौत होती है, तो इसकी ज़िम्मेदारी Contractor, Consultant और Civic Agency पर तय होगी.

Over Loading के लिए 20 हज़ार रुपये के न्यूनतम जुर्माने का प्रावधान रखा गया है. 

अगर गाड़ी के कल-पुर्जे की Quality में कमी होने की वजह से दुर्घटना होती है, तो सरकार उन सभी गाड़ियों को बाज़ार से वापस लेने का अधिकार रखेगी.

इसके अलावा गाड़ी बनाने वाली कंपनी पर अधिकतम 500 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

DNA में हम हमेशा आपके सुखी और सुरक्षित जीवन को लेकर चिंतित रहते हैं. और कई बार अपने विश्लेषण के माध्यम से आपको सचेत करते रहते हैं. कई लोग हमारी सलाह को गंभीरता से लेते हैं. लेकिन, इसी भीड़ में कई लोग ऐसे भी हैं, जो अपनी जान की परवाह नहीं करते.

ऐसे लोगों को आज नितिन गडकरी की बातें सुननी चाहिए. सड़क सुरक्षा के विषय पर बोलते हुए नितिन गडकरी ने संसद में जिस सरल भाषा के साथ तथ्यों का ज़िक्र किया. उसी सरल भाषा और उन्हीं तथ्यों की मदद से हम आपको जागरुक करते रहते हैं. यहां पर हम अपनी पीठ नहीं थपथपा रहे. बल्कि सिर्फ इतना कहने की कोशिश कर रहे हैं, कि सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर हो जाइए. इससे पहले की काफी देर हो जाए.

सवाल ये है, कि सरकार को जुर्माने की रकम बढ़ाने और सज़ा कड़ी करने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा ? 

इसकी वजह आप खुद हैं.

भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की वजह से...देश को सालाना करीब 5 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है.
जो भारत के GDP का लगभग 3 प्रतिशत है.

भारत में 30 प्रतिशत Driving License फर्ज़ी हैं. 

2017 में पूरे भारत में क़रीब 1 लाख 48 हज़ार लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई. जो, आतंकवाद की वजह से मारे गए लोगों की संख्या से ज्यादा है. भारत की सड़कों पर रोज़ क़रीब 1300 हादसे होते हैं. हर रोज़ इन हादसों में 400 से ज़्यादा लोगों की मौत होती है. यानी हर घंटे क़रीब 17 लोगों की मौत भारत की सड़कों पर हो रही है.

2016 में गलत दिशा में ड्राइविंग करने की वजह से 17 हज़ार से ज़्यादा सड़क दुर्घटनाएं हुईं. जिनमें 7 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए.

Red light Jump करने की वजह से 8 हज़ार से ज़्यादा सड़क हादसे हुए. जिनमें 2 हज़ार 795 लोग मारे गये. 

वर्ष 2017 में 12 प्रतिशत ऐसे वाहन थे...जिन्हें Over-Loading यानी तय क्षमता से ज़्यादा भार के साथ चलाया जा रहा था.

2016 में भारत में 60 हज़ार 986 Truck Accidents हुए. जिनमें 16 हज़ार से ज़्यादा मौतें हुईं. 

इन हादसों की एक बड़ी वजह थी ट्रक डाइवरों की थकान. भारत में Truck Drivers के लिए आराम के घंटे निश्चित नहीं है. ज़्यादातर ट्रक ड्राइवर्स दिन में 14 से 17 घंटे तक ड्राइविंग करते हैं. और इस ड्राइविंग की थकान.. बड़ी दुर्घटनाओं की वजह बन जाती है.

2016 में देशभर में हुए सड़क हादसों में सबसे ज़्यादा मौतें, युवाओं की हुईं. और इन हादसों की सबसे बड़ी वजह है, वाहन चलाते हुए युवाओं की लापरवाही. मारे गए युवाओं में से करीब 46% लोग 18 से 35 साल के थे. 

सड़क दुर्घटना वाले अपराध के लिए हम सब ज़िम्मेदार हैं. फिर चाहे वो तेज़ रफ़्तार में गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति हो...या फिर ट्रैफिक के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले ट्रक और बस वाले हों. किसी को नियम क़ानून का कोई भय नहीं है.

1838 से लेकर 2018 तक भारत में 988 केंद्रीय क़ानून बने हैं. इसके अलावा हर राज्य के अपने स्थानीय और स्पेशल क़ानून हैं. 
और इनकी संख्या भी 65 सौ से ज़्यादा है. लेकिन पुराने क़ानून होने से या नए क़ानून बना देने से काम ख़त्म नहीं हो जाता. क्योंकि, लोगों के मन में मौजूदा क़ानून को लेकर ही कोई भय नहीं है. तो नए कानून का डर कहां से पैदा होगा ? कई मौकों पर ऐसे क़ानूनों को सही तरीके से लागू भी नहीं किया जाता. हमारे पास लोगों की भी कमी है. दिल्ली में 1 हज़ार 773 गाड़ियों पर एक ट्रैफिक पुलिसवाला है.

बैंगलुरु में 2 हज़ार 134 गाड़ियों पर एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी है. 15 लाख की आबादी वाले नोएडा में सिर्फ 166 ट्रैफिक पुलिसकर्मी हैं. दिल्ली की सड़कों पर 1 करोड़ से ज़्यादा गाड़ियों का बोझ है. जबकि दिल्ली की आबादी ढाई करोड़ है.
मुंबई की सड़कों पर 36 लाख से ज़्यादा गाड़ियों का बोझ है. महाराष्ट्र में 8 हज़ार से ज़्यादा गाड़ियों पर सिर्फ एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी है.

इससे आप स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा लगा सकते हैं. भारत में पुराने कानूनों में बदलाव करके सड़क पर यातायात को सुरक्षित बनाने की कोशिश हो रही है. लेकिन हमें लगता है कि भारत में नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए सिर्फ कानून ही काफी नहीं होंगे, भारत में वाहन चलाने वाले लोगों में सड़क पर चलने का संस्कार पैदा करने की भी बहुत ज़रूरत है. क्योंकि भारत में नियमों और कानूनों की कमी नहीं है.. भारत में इन कानूनों का पालन करने और इन्हें लागू करने की इच्छाशक्ति बहुत कम है.

आपको याद होगा कुछ दिनों पहले ही आगरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक बस हादसे में 29 लोगों की मौत हुई थी. 2012 से अब तक यमुना एक्सप्रेसवे पर 5000 से ज़्यादा हादसे हो चुके हैं. इन हादसों में 750 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. दरअसल हमें ऐसी सड़क दुर्घटनाओं की आदत पड़ गई है. अब हमें ऐसी दुर्घटनाएं परेशान नहीं करती हैं.

सड़क सुरक्षा को लेकर आज दूसरे देशों से भी सीखने की ज़रुरत है.

UAE में आगे और पीछे बैठने वाले सभी लोगों को सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य है. इस नियम का उल्लंघन करने वालों को साढ़े 7 हज़ार रुपये का जुर्माना देना पड़ता है. 

वहां पर Reckless Driving करने वालों पर 37 हज़ार रुपये से ज़्यादा का जुर्माना लगता है. और गाड़ी को 60 दिनों के लिए ज़ब्त कर लिया जाता है. दूसरों की जान ख़तरे में डालने वालों के लिए भी इसी जुर्माने का प्रावधान है.

Traffic Signals का उल्लंघन करने वालों को साढ़े 18 हज़ार रुपये का जुर्माना देना पड़ता है.

सिंगापुर की संसद में इसी साल एक नया Bill लाया गया है. जिसमें बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ 10 लाख रुपये के जुर्माने और तीन साल जेल की सज़ा का प्रावधान है.

जर्मनी जैसे देश में 2 से 3 उल्लंघन करने पर ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है. इसे वापस पाने के लिये ड्राइवर को फिर से परीक्षा देनी होती है.

ब्रिटेन में भी यही व्यवस्था लागू है. इसके अलावा वहां ट्रैफिक Rules तोड़ने पर साढ़े 8 हज़ार रुपये तक का चालान हो सकता है.

ऑस्ट्रेलिया में किसी भी ट्रक ड्राइवर के लिए 5 घंटे की ड्राइविंग के बाद 15 मिनट का ब्रेक लेना अनिवार्य है. जबकि पूरे हफ्ते में कम से कम.. एक बार ड्राइवर को पूरे 24 घंटों के लिए अपने ट्रक से दूर रहना होता है.

यूरोपियन यूनियन के देशों में एक दिन में सिर्फ 9 घंटे ट्रक चलाने की इजाज़त दी जाती है.. और इसका उल्लंघन ना हो इसके लिए Digital Monitoring भी होती.

इसी तरह Canada में किसी भी ट्रक ड्राइवर को 13 घंटे से ज्यादा ट्रक चलाने की इजाज़त नहीं दी जाती.

इसके अलावा, सिंगापुर सहित दुनिया के अलग-अलग देशों में सड़क सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर Technology का इस्तेमाल भी किया जाता है. उदाहरण के तौर पर चीन में Electronic Police ट्रैफिक के नियम तोड़ने वालों को Monitor करती है.

इसके अलावा Facial Recognition Surveillance Cameras की मदद से भी चीन में ट्रैफिक Violators पर कार्रवाई होती
है.

हमारे देश में काले शीशे लगाकर सड़क पर चलना फैशन माना जाता है. और जब ऐसे लोग पकड़े जाते हैं, तो घूस वाले जुगाड़तंत्र का इस्तेमाल करके बच निकलते हैं. 

ठीक इसी तरह बहुत से लोग अपनी कार के आगे और पीछे बंपर गार्ड या Crash गार्ड लगाते हैं. कार के अगले या पिछले हिस्से में लगीं स्टील की Rods या Frames को Crash Guards, Bull Bars या बंपर गार्ड भी कहा जाता है. लोग ऐसा इसलिए करते हैं.. ताकि कोई टक्कर होने पर.. गाड़ी में Scratch ना लगे. लेकिन ऐसे Crash Guards Fit करवाने से वाहन चालक और पैदल चलने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा होता है. लेकिन लोगों को इसकी भी परवाह नहीं है. 

प्रस्तावित Bill में जुर्माने की रकम को भले ही पहले के मुक़ाबले ज़्यादा कर दिया गया हो. लेकिन, इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, कि जुर्माना बढने से लोगों का डर ख़त्म हो या ना हो. रिश्वत की रक़म ज़रुर बढ़ जाएगी. सवाल ये है, कि ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले लोगों और भ्रष्ट अधिकारियों के मन में डर कैसे पैदा किया जाए ?

इसके लिए हम नई-नई Technology का इस्तेमाल कर सकते हैं. 
CCTV लगा सकते हैं.
चीन की तरह Facial Recognition Surveillance सिस्टम का उपयोग कर सकते हैं.
Digital Monitoring कर सकते हैं.

ऐसा करके हम काफी हद तक सिस्टम पर और लोगों पर नज़र रख सकते हैं. क्योंकि ये समय की मांग है. भारत में लापरवाही से वाहन चलाने वालों की चर्चा पूरी दुनिया मे हैं. वर्ष 2018 में अमेरिका की एक ऐजेंसी ने लापरवाही से गाड़ी चलाने वाले दुनिया भर के लोगों पर एक सर्वे किया था. जिसमें ये पाया गया कि भारत के लोग बड़ी लापरवाही से वाहन चलाते हैं और Driving के दौरान दूसरे लोगों का सम्मान नहीं करते. इस सर्वे में दुनिया भर के उन पर्यटकों को शामिल किया गया था, जो भारत में घूमने के लिए आए थे. यानी ये लोग भारत की संस्कृति और गौरवशाली इतिहास की जानकारी के साथ साथ... एक बुरा अनुभव भी लेकर गये थे. जो हमारे देश के लिए बहुत शर्म की बात है. लापरवाही से गाड़ी चलाने वालों को इस अनुशासनहीनता का जवाब देना बहुत ज़रूरी है.