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ZEE जानकारी: भारत की बड़ी कामयाबी, मसूद अजहर वैश्विक आतंकवादी घोषित

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने की कोशिश चल रही थी. लेकिन बार-बार चीन इसमें रुकावट बन रहा था.

ZEE जानकारी: भारत की बड़ी कामयाबी, मसूद अजहर वैश्विक आतंकवादी घोषित

आज सबसे पहले हम भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक विजय से जुड़ी एक बड़ी ख़बर का विश्लेषण करेंगे. पाकिस्तान के प्रिय आतंकवादी और भारत में पाकिस्तान के भक्तों के चहेते, मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर दिया गया है. 

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने की कोशिश चल रही थी. लेकिन बार-बार चीन इसमें रुकावट बन रहा था. इस बार भारत के दबाव में चीन ने अपनी भूल सुधार ली है.
 
चीन ने संयुक्त राष्ट्र में मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के ख़िलाफ़ technical hold हटा लिया और मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर दिया गया. चीन का कहना है कि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के प्रस्ताव को उसने ग़ौर से पढ़ा और फिर वो इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि मसूद अज़हर को ग्लोबल आतंकी घोषित किया जाना चाहिये. 

ये भारत के लिये बड़ी कूटनीतिक जीत है, और ये पाकिस्तान के लिये बहुत बड़ी हार है. भारत ने बिना गोली चलाये पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल 27 अप्रैल को चीन के वुहान गये थे. 2017 में भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद के बाद ये प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच अनौपचारिक, और ऐतिहासिक मुलाक़ात थी. वुहान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का शहर है. देखा जाये तो ठीक एक साल बाद वुहान summit का रिज़ल्ट आ गया है. मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी मानने के बाद चीन अब भारत के साथ आतंकवाद के खिलाफ़ एक मंच पर है. हम कह सकते हैं कि चीन अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान को छोड़कर अब आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने वाले भारतीय़ कैंप में शामिल हो गया है. अब से थोड़ी देर पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस बड़ी कामयाबी के बारे में देश को बताया है.

वुहान में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग...दोनों ने क़रीब 9 घंटे एक साथ बिताये थे. दोनों के बीच 7 मुलाक़ातें हुई थीं.
तब प्रधानमंत्री के इस दौरे को अनौपचारिक बताकर विपक्ष ने कई सवाल उठाये थे. लेकिन आज ये साबित हो गया कि ये भारत की कूटनीति की बहुत बड़ी जीत है. मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने की कोशिश पिछले दस सालों से चल रही थी. 

ये फ़ैसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 Sanctions Committee ने लिया है. ये कमेटी वर्ष 1999 में अल क़ायदा के आतंकवादियों और उससे जुड़े संगठनों पर पाबंदी लगाने के लिये बनाई गई थी. 

फ्रांस ने मसूद अज़हर को ग्लोबल आतंकवादी घोषित किए जाने के फैसले का स्वागत किया है. फ्रांस ने कहा है कि फ्रेंच कूटनीति लगातार अजहर को प्रतिबंधित करने की कोशिश कर रही थी. खासतौर पर फरवरी में पुलवामा हमले के बाद फ्रांस ने 15 मार्च को मसूद अज़हर पर राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिबंध लगाया था.

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हम 1267 समिति में संवाद और परामर्श के ज़रिये सूचीबद्ध मुद्दों के समाधान का समर्थन करते हैं. हमारा मानना है कि इसमें अधिकतर सदस्यों की आम-सहमति है.
लेकिन पाकिस्तान को लेकर चीन का नर्म रुख़ जारी है

चीन ने कहा है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में बड़ा योगदान दिया है. पाकिस्तान के सहयोग को पूरी दुनिया में पहचान मिलनी चाहिये. चीन आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध में पाकिस्तान की मदद करता रहेगा.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाय़ी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने कहा है कि इस फैसले में छोटे, बड़े सभी देश साथ आए और मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में आतंकवादी घोषित किया गया. मसूद अज़हर के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ही पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी. इस हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हुए थे.

हमारे पास वो डॉज़ियर है जो भारत ने संयुक्त राष्ट्र के साथ साथ दुनिया के कई देशों को सौंपा था. इस डॉज़ियर में जैश-ए-मोहम्मद और मसूद अज़हर के ख़िलाफ़ आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के पक्के सबूत दिये गये थे. इसी के आधार पर मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया गया है...अब आपको बताते हैं कि मसूद के ख़िलाफ़ भारत के डॉज़ियर की बड़ी बातें क्या हैं...

डॉज़ियर में मसूद अज़हर के परिवार के 19 लोगों के नाम शामिल हैं
भारत के इस डॉज़ियर में पुलवामा में हुए आतंकी हमले का भी ज़िक्र है
मसूद अज़हर के परिवार के ये लोग जैश-ए-मोहम्मद के जरिए आतंक फैलाने में जुटे हुए हैं
डॉज़ियर के मुताबिक़ मसूद अज़हर आतंकवादियों को 'समुद्री जिहाद' की ट्रेनिंग भी दे रहा था...जिसके ज़रिये मुंबई में 26-11 जैसे दूसरे हमले की प्लानिंग रची जा रही थी.
डॉजियर में अल रहमत ट्रस्ट और तलबा-अल-मुराबितून से मसूद अज़हर चैरिटी फंड ले रहा था...इस फंड का इस्तेमाल वो भारत में आतंकवाद फैलाने के लिये कर रहा है.
डॉज़ियर में मसूद के ऐसे कई रिश्तेदारों का ज़िक्र भी है जिसमें भारतीय सुरक्षाबलों ने कश्मीर में मार गिराया है.

अब आपको संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और वहां मसूद अज़हर के खिलाफ हुई कार्रवाई से जुड़ी पूरी प्रक्रिया के बारे में बताते हैं. 

संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं.
इनमें 5 स्थायी सदस्य हैं. जिनके नाम है - अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन.
इसके अलावा 10 अस्थाई सदस्य हैं. इनमें बेल्जियम, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरू, पोलैंड और दक्षिण अफ्रीका शामिल है. हालांकि भारत का नाम इनमें नहीं है. यहां आपको बता दें कि ये 10 अस्थाई सदस्य देश, हर दो वर्षों में बदलते रहते हैं. 
सुरक्षा परिषद के 5 स्थायी सदस्य हैं, चीन, फ्रांस, Russia, ब्रिटेन और अमेरिका
इन पांचों देशों को एक विशेष शक्ति दी गई है. इसे वीटो पावर कहते हैं

Veto लैटिन भाषा का शब्द है. जिसका अर्थ होता है 'मैं अनुमति नहीं देता हूं'. 

भारत भी सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है...हालांकि भारत 7 बार अस्थायी सदस्य रहा है. आख़िरी बार 2011-2012 में भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य बनाया गया था...लेकिन अस्थायी सदस्य देश के पास वीटो पावर नहीं होती...ये ताक़त सिर्फ़ स्थायी सदस्य देश...यानी अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के पास है

अब तक यही वीटो पावर भारत की कोशिश के आगे सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई थी. क्योंकि चीन इस शक्ति का ग़लत इस्तेमाल करके हमेशा मसूद अज़हर को बचा लेता था. चीन ने कई बार संयुक्त राष्ट्र में रुकावट डाली.

भारत ने 2009 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समिति में मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आंतकवादी घोषित करने का प्रस्ताव रखा था. 2016 में भी प्रस्ताव लाया गया, लेकिन चीन दोनों बार इसके आड़े आ गया. इसके बाद 2017 में अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के समर्थन से प्रस्ताव पारित किया था....लेकिन तब भी चीन ने इसका समर्थन नहीं किया. इस बार भी शुरुआत में चीन ने Technical Hold लगा दिया.

लेकिन आखिरकार उसे भारत और दुनिया के दूसरे देशों के दबाव में आकर मसूद अज़हर के मुद्दे पर अपना Stand वापस लेना ही पड़ा. और इस तरह इस आतंकवादी को Global Terrorist घोषित कर दिया गया. संयुक्त राष्ट्र की तरफ़ से अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित होने का मतलब ये हुआ, कि अब उस पर कई पाबंदियां लग जाएंगी.

मसूद अज़हर और उसके आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सभी बैंक खाते सीज़ कर दिये जाएंगे.
उसकी सभी संपत्तियों पर सरकार का क़ब्ज़ा हो जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े देशों के लोग उसकी किसी भी तरह की मदद नहीं कर पाएंगे.
कोई देश मसूद अज़हर या उसके संगठन को हथियार भी नहीं दे पाएगा
अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित होने के बाद मसूद अज़हर पर Travel Ban लग जाएगा. यानी उसकी Entry ऐसे किसी भी देश में नहीं हो पाएगी जो संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है

आज आपको ये भी समझना होगा कि देश के इतिहास में जब कोई ऐतिहासिक भूल होती है तो कैसे आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ता है. मसूद अज़हर को भारत ने ही 20 साल पहले छोड़ दिया था. और इसके बाद इस आतंकवादी ने अपना संगठन जैश-ए-मोहम्मद बनाया. और तब से लेकर आज तक, इसने भारत के सीने पर कई बड़े घाव किए हैं. और बार बार भारत का खून बहाया है. 

दिसम्बर 1999 में जब Indian Airlines की Flight, IC-814 को हाईजैक किया गया था. उस वक्त 178 यात्रियों की रिहाई के लिए 3 खूंखार आतंकवादियों का सौदा किया गया था. और उन्हें भारत की जेल से रिहा करके और हवाई जहाज में बैठाकर कंधार ले जाया गया था. आपमें से बहुत सारे लोगों को ये बात पता नहीं होगी, कि जब रिहा होने के बाद ये आतंकवादी पाकिस्तान पहुंचे, तो उनका स्वागत किस तरह किया गया था ?

ये तीन आतंकवादी थे, मौलाना मसूद अज़हर. मुश्ताक अहमद ज़रगर और अहमद उमर सईद शेख

सबसे पहले इन तीनों आतंकवादियों का Bio-Data देखिए. मसूद अज़हर, जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख है. और पिछले 20 साल से पाकिस्तान के बहावलपुर में बैठकर अपने Headquarter से आतंक की फैक्ट्री चला रहा है. 

मुश्ताक अहमद ज़रगर, पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के मुज़फ्फराबाद में बड़े आराम से रहता है. और वहीं से आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देता है. ये वही आतंकवादी है, जिसने दिसम्बर 1989 में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का अपहरण किया था. और उसकी रिहाई के एवज में भारत को 5 आतंकवादियों को छोड़ना पड़ा था. 

अहमद उमर सईद शेख पाकिस्तानी मूल का ब्रिटिश आतंकवादी है. जिसने वर्ष 2002 में The Wall Street Journal के पत्रकार Daniel Pearl का अपहरण करके उनकी हत्या कर दी थी. 11 सितम्बर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकवादी हमले की Planning में भी इसका अहम किरदार था. और आतंकवाद की दुनिया में इसे ओसामा बिन लादेन का Special Son कहा जाता है. 

रिहाई के बाद इन तीनों ही आतंकवादियों ने अफगानिस्तान में ओसामा बिन लादेन से मुलाकात की थी. और इस मुलाकात की मेज़बानी की थी, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने. लादेन से मुलाकात के बाद ही ISI ने मसूद अज़हर के संगठन जैश-ए-मोहम्मद को खड़ा किया. और उसे भारत विरोधी कार्रवाई के लिए तैयार किया. अब सवाल ये है, कि पाकिस्तान ऐसे आतंकवादियों का स्वागत-सत्कार क्यों करता है?

20 साल पहले रिहा होने के बाद मसूद अज़हर कांधार से पाकिस्तान चला गया. उस वक्त खुद पाकिस्तान की सरकार ने कहा था, कि अगर मसूद अज़हर पाकिस्तान लौटता है, तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. क्योंकि, पाकिस्तान में उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है. शायद इसीलिए, 20 साल पहले पाकिस्तान लौटने पर मसूद अज़हर का भव्य स्वागत किया गया था. Media Reports के मुताबिक उस वक्त पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के तत्कालीन DG, लेफ्टिनेंट जनरल Mahmud Ahmed खुद गाड़ी चलाकर उसे Receive करने पहुंचे थे. 

कांधार से पाकिस्तान पहुंचने के बाद 9 जनवरी 2000 को मसूद अज़हर बहावलपुर पहुंचा था. उस वक्त पूरी सुरक्षा के बीच इस आतंकवादी ने रैली की थी. Road Show किया था. बंदूक लहराई थीं. और एक ज़हरीला भाषण दिया था. तब इस आतंकवादी ने पाकिस्तान की सरकार की शह पर धमकी दी थी, कि वो कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए 5 लाख लोगों को इकट्ठा करेगा. 

इसके ठीक एक हफ्ते पहले मसूद अज़हर ने पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तान की पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच कराची में भी एक रैली की थी. क़रीब 10 हज़ार लोगों की भीड़ के बीच हुई इस रैली में, इस आतंकवादी ने पाकिस्तानी जनता से कश्मीर घाटी में जेहाद शुरु करने की अपील की थी. उस समय रैलियां करने के साथ साथ, मसूद अज़हर बंद कमरे में बैठकर इंटरव्यू दे रहा था और भारत के खिलाफ युद्ध लड़ने की धमकी दे रहा था. इसलिए जो इमरान ख़ान आज मसूद अज़हर को लेकर भारत से सबूत मांग रहे हैं, उन्हें इस आतंकवादी की 19 साल पुरानी बातें सुननी चाहिए. मसूद अज़हर ने ये बातें किसी और देश में नहीं, बल्कि पाकिस्तान में ही कही थीं.

जैश ए मोहम्मद, अल-कलाम नाम की एक Online Magazine निकालता है. जिसे आप जैश-ए-मोहम्मद का मुखपत्र भी कह सकते हैं. 

इसी वर्ष मार्च में, इसमें एक संपादकीय लेख, प्रकाशित किया गया था. जिसका शीर्षक था, Negative And Condemnable Face Of The Indian Media.

इस लेख में Zee News और आपके पसंदीदा शो DNA का नाम लिया गया था. मेरा नाम लिया गया था. और बलोचिस्तान में पाकिस्तान के पापों का प्रसारण करने वाली Zee News की रिपोर्ट का भी ज़िक्र किया गया था. 

अब आप ये देखिए, कि जैश-ए-मोहम्मद के लेख में Zee News का ज़िक्र करते हुए, किस तरह मसूद अज़हर ने भारत विरोधी एजेंडा चलाने की कोशिश की थी.

लेख में लिखा था, कि 14 फरवरी को पुलवामा हमले के बाद भारतीय मीडिया ने पाकिस्तान के खिलाफ माहौल बनाया है. भारत का मीडिया झूठ के सहारे माहौल को हवा दे रहा है. नौबत यहां तक पहुंच गई है कि मीडिया जो भी झूठ बोल दे, वहां की जनता उसे 100 फीसदी सच मान लेती है. इसलिए भारत के मशहूर चैनल Zee News के प्रोग्राम DNA के एंकर सुधीर चौधरी अपने प्रोग्राम में अक्सर इस बात को जोर देकर कहते हैं कि बांग्लादेश को तोड़ने के पीछे भारत का हाथ था और बलोचिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवादी गतिविधि को बढ़ाने में, भारत का हाथ है. इस लेख में आगे ये भी लिखा था, कि DNA में खुलकर कहा जाता है कि भारत की सरकार पकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई में तेज़ी लाकर.. फिर से पाकिस्तान के टुकड़े कर दे.

यहां पर ध्यान देने वाली बात ये है, कि अब जैश ए मोहम्मद जैसा संगठन भी Information Warfare के लिए Online Platform का इस्तेमाल कर रहा है. और इसी के माध्यम से वो ना सिर्फ अपनी Reach बढ़ा रहा है. बल्कि अपनी आतंकवादी सोच की Marketing भी कर रहा है. 

वैसे जैश ए मोहम्मद आज से नहीं, बल्कि पिछले 20 वर्षों से ही Zee News की राष्ट्रवादी पत्रकारिता से बहुत परेशान है. <<1999 People Watching 
दिसम्बर 1999 में जब मसूद अज़हर को रिहा कराने के लिए जैश के आतंकवादियों ने IC-814 की Hijacking की थी. उस वक्त भी Zee News, जैश-ए-मोहम्मद और मसूद अज़हर की एक-एक गतिविधि के बारे में देश को सूचित कर रहा था. 20 साल पहले उसकी रिहाई से लेकर पाकिस्तान पहुंचने तक Zee News ने मसूद अज़हर को काफी क़रीब से Track किया था. और उस वक्त पूरी दुनिया ने Zee News के माध्यम से ही इस Hijacking से जुड़े तथ्य अपनी टीवी स्क्रीन पर देखे थे.

वैसे मसूद अज़हर के Global Terrorist घोषित हो जाने के बाद भी, ऐसा नहीं है कि वो आतकंवाद फैलाना बंद कर देगा. क्योंकि यहां ये जानना ज़रूरी है कि हाफिज़ सईद पिछले 11 वर्षों से एक Global Terrorist है. उसे मुंबई हमले के बाद 10 दिसंबर 2008 को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने Global Terrorist घोषित किया था. अमेरिका ने तो हाफिज़ सईद पर करीब 70 करोड़ रुपये का इनाम भी रखा है. लेकिन इसके बावजूद वो पाकिस्तान में खुलेआम घूमता है, और भारत में आतंक फैलाने का मौका ढूंढता रहता है. इसलिए इन आतंकवादियों के Permanent इलाज की ज़रूरत है. और वो इलाज डोसियर या कागज़ी कार्रवाई से संभव नहीं है. उसके लिए मिसाइल की मार और सर्जिकल स्ट्राइक की ज़रूरत है.