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ZEE जानकारी: जानें क्या है पीएम मोदी की नई टीम की खासियत?

प्रधानमंत्री ने अमित शाह को गृह मंत्री बनाया है. वो अब सरकार में unofficial नंबर two हैं. 

ZEE जानकारी: जानें क्या है पीएम मोदी की नई टीम की खासियत?

प्रधानमंत्री मोदी की नई टीम की ख़ास बात है कि इसमें Continuity भी है और नयापन भी. ये टीम अब प्रधानमंत्री मोदी के साथ अमित शाह की भी है. कई पुराने मंत्रियों के साथ नए चेहरे भी हैं. इन में सबसे बड़ा नाम तो ख़ुद अमित शाह का ही है. आज हम आपको मोदी सरकार के दस बड़े मंत्रियों के बारे में बताएंगे जो देश के भविष्य पर सबसे बड़ी छाप छोड़ेंगे.

प्रधानमंत्री ने अमित शाह को गृह मंत्री बनाया है. वो अब सरकार में unofficial नंबर two हैं. माना जा रहा है कि उनकी स्थिति बहुत कुछ वाजपेयी सरकार के समय लालकृष्ण आडवाणी जैसी रहने वाली है. वाजपेयी सरकार में आडवाणी गृह मंत्री थे, बाद में उन्हें उप प्रधानमंत्री बनाया गया था.

राजनाथ सिंह को इस बार रक्षा मंत्रालय दिया गया है. वैसे कैबिनेट की जो लिस्ट जारी की गई.  उसमें दूसरे नंबर पर राजनाथ सिंह का नाम था. उन्होंने कल शपथ भी प्रधानमंत्री मोदी के ठीक बाद ली थी. निर्मला सीतारमण को इस बार वित्त मंत्रालय की ज़िम्मेदारी दी गई है. इस बार अरुण जेटली ख़राब स्वास्थ्य की वजह से कैबिनेट का हिस्सा नहीं हैं.

नई टीम मोदी में सबसे Surprising Face हैं, विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर. जनवरी 2018 में विदेश सचिव पद से रिटायर हुए थे. पिछली सरकार में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ी थीं.  शपथ से कुछ घंटे पहले ही जयशंकर का नाम सामने आया. और शपथ ग्रहण समारोह में उनको देखकर लोग हैरान थे.

यानी नए मंत्रिमंडल के इन बड़े पदों से इस बार दो दिग्गज अरुण जेटली और सुषमा स्वराज बाहर हैं. जबकि अमित शाह और एक Techocrat S.जयशंकर की एंट्री हुई है. ये Cabinet Committe on Security यानी CCS में बड़ा बदलाव है. CCS में प्रधानमंत्री के अलावा गृह मंत्री, विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री शामिल होते हैं.

CCS से बाहर मंत्रिमंडल की बात करे तब एक चेहरा सबसे चर्चित रहा है. जिसका काम बोला. और ये काम लोगो की जुबान पर भी था. ये हैं सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी...उनका सड़क परिवहन मंत्रालय बरक़रार रखा गया है, और साथ में उन्हें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय की भी ज़िम्मेदारी दी गई है.

नरेंद्र सिंह तोमर को ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ-साथ कृषि मंत्री बनाया गया है. 

इससे पहले ये विभाग राधा मोहन सिंह के पास था. लेकिन तमामा योजनाओं के बावजूद वो किसानों की नाराज़गी दूर नहीं कर पाये. विपक्ष भी चुनाव में किसानों की परेशानी को बार-बार मुद्दा बनाता रहा था. प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2020 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात कई बार कर चुके हैं. और यही वजह है कि राधामोहन सिंह इस बार कैबिनेट से बाहर हैं.

रविशंकर प्रसाद को क़ानून मंत्रालय, टेलीकॉम मंत्रालय और साथ में IT मंत्रालय की भी ज़िम्मेदारी गई है.
स्मृति ईरानी को इस बार कपड़ा मंत्रालय के साथ महिला और बाल विकास मंत्रालय भी दिया गया है.
पीयूष गोयल को इस बार रेल मंत्रालय के साथ वाणिज्य मंत्रालय की ज़िम्मेदारी भी दी गई है.
हरिद्वार से सांसद बने रमेश पोखरियाल निशंक देश के नए मानव संसाधन विकास मंत्री हैं.
HRD मंत्री रहे प्रकाश जावड़ेकर को इस बार सूचना प्रसारण मंत्रालय के साथ पर्यावरण मंत्रालय की भी ज़िम्मेदारी मिली है.
धर्मेंद्र प्रधान के पास पेट्रोलियम मंत्रालय बरक़रार है.

डॉ हर्षवर्धन को इस बार विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ स्वास्थ्य मंत्रालय भी दिया गया है. एक डॉक्टर के रूप में वो इसे बेहतर तरीक़े से चला सकते हैं. दिल्ली से बनाये गये वो अकेले मंत्री हैं.

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की कमेस्ट्री ने भारत की राजनीति में ऐतिहासिक परिवर्तन किए हैं . 2014 में मोदी और शाह की मेहनत से बीजेपी ने बहुमत हासिल किया था . और 2019 में भी इस जोड़ी ने पुराना इतिहास दोहराया . अब ये दोनों नेता और करीब होकर काम करने जा रहे हैं . नई सरकार में अमित शाह, गृह मंत्री हैं . इससे पहले नरेंद्र मोदी सरकार चला रहे थे और अमित शाह पार्टी चला रहे थे . लेकिन अब दोनों मिलकर सरकार चलाएंगे . यानी सरकार अब और ज्यादा मजबूती से काम करेगी .

17 वर्ष पहले भी नरेंद्र मोदी ने गुजरात में अमित शाह को अपना गृहमंत्री बनाया था . और अब केंद्र में भी नरेंद्र मोदी ने वही इतिहास दोहरा दिया है . गुजरात की सरकार में भी मोदी के बाद शाह नंबर Two थे और 2019 की मोदी सरकार में भी अमित शाह Number Two हैं . 

अमित शाह ने भले ही राजनाथ सिंह के बाद मंत्री पद की शपथ तीसरे नंबर पर ली है . लेकिन वो सरकार में मोदी के सबसे ज्यादा करीब हैं और गृह मंत्री के रूप में भी वो सरकार में अघोषित Number Two हैं . 2004 से पहले देश ने अटल-आडवाणी का युग देखा था और 2014 के बाद से देश मोदी-शाह के युग को देख रहा है. बड़ी बात ये है कि मोदी और शाह की जोड़ी राजनीति में अजेय है.

गुजरात में इन दोनों नेताओं ने बीजेपी की जड़ें इतनी मजबूत कर दी हैं कि करीब 25 वर्षों के बाद भी कांग्रेस वहां सत्ता में नहीं लौट पाई है . मोदी और अमित शाह के सफल राजनीतिक रिकॉर्ड को देखकर लगता है कि अब कांग्रेस के लिए लंबे समय तक केंद्र की सत्ता में लौट पाना बहुत मुश्किल है . 

गृह मंत्री के रूप में अमित शाह के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. अमित शाह ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में बार-बार संविधान के Article 370 और 35 A को खत्म करने की बात कही है. अब गृहमंत्री के रूप में उनको अपनी ही कही गई बात को लागू करना है . जम्मू और कश्मीर में अलगाववादी मानसिकता की जड़ में संविधान का Article 370 और 35 A है . जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पहले ही इस मामले में भारत विरोधी बयान दे चुके हैं . ऐसे में अमित शाह के लिए Article 370 और 35 A को खत्म करना आसान नहीं है . 

बालाकोट में एयर स्ट्राइक के बाद कश्मीर में आतंकवादियों के हौसले पस्त हैं . लेकिन आंतरिक सुरक्षा अब भी देश के लिए बड़ी चुनौती है . अमित शाह को नक्सलवाद की समस्या से भी जूझना होगा . इसके अलावा पूर्वोत्तर में भी आतंकवादी संगठनों को जड़ से खत्म करना आज भी बड़ी चुनौती है . 

अमित शाह की एक और बड़ी जिम्मेदारी है बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान . असम में केंद्र सरकार को National Register of Citizens यानी NRC को लागू कराना है . अमित शाह पश्चिम बंगाल के अलावा, पूरे देश में भी NRC लागू करने की बात कह चुके हैं . इसके अलावा नागरिकता संशोधन विधेयक को लागू करवाना भी अमित शाह के लिए बड़ी चुनौती है . क्योंकि इन दोनों ही मुद्दों पर केंद्र सरकार को पहले भी विपक्ष का विरोध झेलना पड़ा था . इस बार भी विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार के सामने चुनौतियां खड़ी करेगा . इन सभी चुनौतियों का सामना अब मोदी और शाह की जोड़ी को मिलकर करना है . 

इस बार पूरे देश की नज़र इस बात पर थी कि अरुण जेटली के बाद भारत का वित्त मंत्री कौन होगा ? क्योंकि पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शपथ ग्रहण समारोह से एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर कोई पद न देने का अनुरोध किया था. इसके बाद वित्त मंत्री के पद के लिए लोग अमित शाह और पीयूष गोयल के नाम की भी चर्चा कर रहे थे. लेकिन एक बार फिर प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने सबको चौंकाने वाला फैसला लिया और निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्री के पद पर नियुक्त किया . 

इससे पहले जब प्रधानमंत्री मोदी ने निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाया था, तब भी लोग आश्चर्य चकित हुए थे. निर्मला सीतारमण भारत की पहली महिला पूर्णकालिक रक्षा मंत्री रहीं. इस बार एक और राजनीतिक कीर्तिमान उनके नाम के साथ दर्ज हो गया है. निर्मला सीतारमण अब भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री भी बन चुकी हैं. 59 वर्ष की उम्र में निर्मला सीतारमण राजनीति में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रही हैं. आज मंत्री पद संभालते ही आर्थिक मोर्चे पर सरकार के लिए बुरी खबरें आई हैं . बेरोज़गारी दर बढ़ गई है, विकास दर में कमी आई है और राजकोषीय घाटा भी बढ़ा है . यानी सरकार को अब सबसे ज़्यादा काम आर्थिक मोर्चे पर ही करना है . 

मोदी सरकार की नई टीम में सबसे अलग नाम है विदेश मंत्री S. जयशंकर का. S. जयशंकर जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक विदेश सचिव रहे थे. उनको मोदी सरकार की आक्रामक विदेश नीति को लागू कराने का श्रेय जाता है. 

64 वर्षीय जयशंकर का अनुभव चीन के साथ रिश्ते सुधारने में बहुत काम आया है. ख़ास तौर पर जब डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं आमने सामने थीं, तब विदेश सचिव के तौर पर इस संकट को ख़त्म करने में उन्होंने प्रमुख रोल निभाया था. इसमें चीन में काम करने का उनका लंबा अनुभव भी काम आया था. विदेश सचिव नियुक्त किए जाने से पहले

जयशंकर दिसंबर 2013 से जनवरी 2015 तक अमेरिका में भारत के राजदूत थे.
वो सबसे ज़्यादा समय तक चीन में भारत के राजदूत रहे थे. वो जून 2009 से दिसंबर 2013 तक चीन में भारत के राजदूत रहे थे. 
प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने चीन का दौरा किया था. इस दौरान चीन में भारत के राजदूत रहे S. जयशंकर से उनके संबंध और मज़बूत हुए.

इससे पहले वर्ष 2007 से 2009 तक सिंगापुर में वो भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं.
जयशंकर को वर्ष 2000 में चेक रिपब्लिक में भारत का राजदूत बनाया गया था.
वो वर्ष 2004 से 2007 तक विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव थे. तब उन्होंने अमेरिका के साथ हुई न्यूक्लियर डील में बहुत महत्वपूर्ण रोल निभाया था.
S. जयशंकर 1977 बैच के IFS ऑफ़िसर थे. 

विदेश सचिव पद से रिटायर होने के बाद S. जयशंकर Tata Sons में Global Corporate Affairs के प्रेसीडेंट पद पर काम कर रहे थे. 
उनको विदेश मंत्री बनाए जाने के बड़े राजनीतिक संदेश हैं. नरेंद्र मोदी की सरकार क़ाबिल लोगों को बिना राजनीतिक अनुभव के भी सरकार में बड़े पद देना चाहती है. ताकि, देश के विकास में उनके अनुभव का लाभ लिया जा सके.

2019 में बीजेपी को मिले विराट जनादेश में मोदी सरकार की कुछ योजनाओं का बड़ा रोल माना जाता है. उज्जवला योजना इन में से एक है. प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं को धुएं वाले चूल्हे से मुक्ति दिलाने के लिए इस योजना की शुरुआत की थी. 

उज्जवला योजना को लागू करने में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को प्रमोशन के साथ दोबारा वही मंत्रालय दिया गया है. वो पिछली सरकार में पेट्रोलियम विभाग के स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री थे. इस बार उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. 

प्रधानमंत्री मोदी ने 1 मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया से उज्जवला योजना की शुरुआत की थी. इसका लक्ष्य तीन साल में 5 करोड़ रसोई गैस कनेक्शन बांटना था. इस योजना में अब तक देश के 714 ज़िलों में 7 करोड़ 19 लाख 6 हज़ार 812 गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं.

इस योजना की चर्चा सबसे पहले 2017 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के बाद हुई थी. बीजेपी को उत्तर प्रदेश में शानदार कामयाबी मिली थी. 1991 के बाद पहली बार बीजेपी को अपने दम पर बहुमत मिला था. इस जीत में उज्जवला योजना का योगदान माना गया. जिसके बाद मोदी सरकार ने इसे ज़ोर-शोर से पूरे देश में लागू किया था.

नई टीम मोदी में जिसकी सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है, वो ओडिशा के सांसद प्रताप चंद्र सारंगी हैं. प्रताप चंद्र सारंगी को उनके सादे जीवन के लिए पहचाना जाता है. कल शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के बाद सबसे ज़्यादा तालियां प्रताप सारंगी के लिए ही बजीं. 

कभी भिक्षु बनने की चाह रखने वाले प्रताप चंद्र सारंगी को मोदी सरकार में दो मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी मिली है.

उन्हें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री के साथ-साथ, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्रालय में भी राज्य मंत्री बनाया गया है. 

सफेद दाढ़ी, सिर पर सफेद बाल, साइकिल और बैग ही प्रताप चंद्र सारंगी की पहचान है. 

प्रताप चंद्र सारंगी नई मोदी सरकार के सबसे ग़रीब मंत्री हैं...और आप सोच रहे होंगे कि मोदी कैबिनेट में सबसे अमीर मंत्री कौन है..?

अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल मोदी सरकार की सबसे अमीर मंत्री हैं. 52 वर्षीय हरसिमरत कौर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री बन गई हैं. लोकसभा चुनाव में दिए गए हलफनामे के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 217 करोड़ रुपये है. वो पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बहू और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल की पत्नी हैं

मोदी सरकार में सबसे कम उम्र की मंत्री स्मृति ईरानी हैं. 43 वर्षीय स्मृति ईरानी को इस बार कपड़ा मंत्रालय के साथ महिला और बाल विकास मंत्रालय भी दिया गया है. वहीं सबसे ज़्यादा उम्र वाले मंत्री रामविलास पासवान हैं. 73 वर्षीय पासवान को फिर से उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय दिया गया है