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ZEE जानकारी: भारत में अल्पसंख्यक की परिभाषा क्या है?

भारत में अल्पसंख्यक की परिभाषा क्या है ? इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2017 में एक याचिका दायर की गई थी . 

ZEE जानकारी: भारत में अल्पसंख्यक की परिभाषा क्या है?

भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने कहा था कि मुसलमान, अल्पसंख्यक नहीं बल्कि भारत की दूसरी बहुसंख्यक आबादी है . लेकिन आज़ादी के बाद तुष्टीकरण के लिए मुसलमानों को अल्पसंख्यक घोषित कर दिया गया . भारत में अल्पसंख्यक की परिभाषा क्या है ? इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2017 में एक याचिका दायर की गई थी . इसी याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं जिनका आज हम विश्लेषण करेंगे . 

इस याचिका में मांग की गई थी कि देश में अल्पसंख्यक की परिभाषा तय की जानी चाहिए . 

आज सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि याचिका की Copy, Attorney General को सौंपी जाए . 

सुप्रीम कोर्ट ने Attorney General से याचिका पर सुझाव मांगे हैं . 

अब सुप्रीम कोर्ट इस पर 4 हफ्ते यानी करीब एक महीने के बाद सुनवाई करेगा . 

Attorney General की राय जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सरकार को अहम निर्देश दे सकता है . 

आज पूरे देश को Attorney General का मतलब भी समझना चाहिए .

Attorney General सर्वोच्च कानूनी सलाहकार होता है . 
आम तौर पर सुप्रीम कोर्ट के वकील को Attorney General बनाया जाता है . Attorney General की योग्यता, सुप्रीम कोर्ट के जज के बराबर होनी चाहिए . Attorney General को एक सांसद के बराबर सुविधाएं दी जाती हैं . Attorney General संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकता है . लेकिन उनको वोट का अधिकार नहीं है .

अब आपके मन में ये सवाल आया होगा कि देश में अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करने की ज़रूरत क्यों है ? 

देश में ये आम धारणा है कि भारत में हिंदू बहुसंख्यक हैं और बाकी धर्म के लोग अल्पसंख्यक हैं . लेकिन ये पूरी तरह सच नहीं है . देश में 6 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हिंदुओँ की आबादी 40 प्रतिशत से भी कम हो चुकी है . 

2011 की जनगणना के मुताबिक लक्षद्वीप में सिर्फ 2.7 प्रतिशत हिंदू हैं . 

मिज़ोरम में 2.75 प्रतिशत हिंदू हैं .

नागालैंड में कुल आबादी में केवल 8.75 प्रतिशत हिंदू हैं .

मेघालय में 11.53 प्रतिशत हिंदू हैं . 

जम्मू और कश्मीर की आबादी में 28.44 प्रतिशत हिंदू हैं . 

अरुणाचल प्रदेश में केवल 29 प्रतिशत हिंदू हैं . 

और पंजाब की आबादी में 38.49 प्रतिशत हिंदू हैं . 

लेकिन इनमें से किसी भी राज्य में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं मिला है. 

भारत के संविधान में अल्पसंख्यक की कोई परिभाषा नहीं दी गई है . 

लेकिन भारत के संविधान के Article 29 और 30 में अल्पसंख्यकों को विशेष संरक्षण का ज़िक्र है . 

Article 29 के मुताबिक जिन लोगों की अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उन्हें इसे बनाए रखने का अधिकार है . 

सरकार की मदद से चलने वाली किसी शिक्षण संस्था में धर्म, जाति या भाषा के आधार पर किसी को वंचित नहीं किया जाएगा .

Article 30 के मुताबिक धर्म या भाषा के आधार पर अल्पसंख्यक लोगों को अपनी रुचि के हिसाब से शिक्षण संस्थान चलाने का अधिकार है . 

अक्टूबर 1993 में तत्कालीन नरसिम्हा राव की सरकार ने 5 समुदायों को अल्पसंख्यक घोषित करने का नोटिफिकेशन जारी किया था... मुसलमान, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन . 

अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक ...ये शब्दावली भारतीय संस्कृति की नहीं है . मूल रूप से ये विचार यूरोप के विद्वानों का है . 

एशिया और यूरोप के देशों का इतिहास धर्म के नाम पर खून-खऱाबे से भरा हुआ है .

20वीं शताब्दी की शुरूआत में पूरे यूरोप और एशिया में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बहुत ज्यादा हिंसा हुई . खास तौर पर यहूदियों को निशाना बनाया गया . यहूदियों की संख्या कम होने की वजह से वो अपनी रक्षा भी नहीं कर सके . 

Turkey में पहले विश्व युद्ध के दौरान आर्मेनियन नस्ल के लाखों लोगों का नरसंहार किया गया . उन पर Russia के साथ मिले होने का आरोप लगा था. इस नरसंहार का आरोप Ottoman Empire पर है . 

दूसरे विश्व युद्ध से पहले और युद्ध के दौरान जर्मनी के तानाशाह Adolf Hitler ने बहुत बड़ी संख्या में यहूदियों का नरसंहार किया . 

यही वजह है कि 1945 में संय़ुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद पूरी दुनिया में अल्पसंख्यकों की रक्षा का एक भाव पैदा हुआ . 

लेकिन विश्व स्तर पर अल्पसंख्यक की कोई परिभाषा तय नहीं हो पाई . 

1992 में एक सहमति के साथ United Nations Minorities Declaration स्वीकार किया गया . 

इसके पहले Article के मुताबिक नस्ल, भाषा, संस्कृति और पहचान की आधार पर कम संख्या वाले लोगों की सुरक्षा की जानी चाहिए . इसे दुनिया में एक अंतरराष्ट्रीय कानून के तौर पर मान्यता प्राप्त है .

इस मामले में आज हम एक बड़ा सवाल उठाना चाहते हैं . जब भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है तो इसका मतलब है कि हर धर्म के नागरिक बराबर हैं . फिर कोई खुद को अल्पसंख्यक और कोई खुद को बहुसंख्यक क्यों कहना चाहता है ? 

हम इस सवाल पर विस्तार से बात करेंगे लेकिन पहले ये समझ लेते हैं कि धर्मनिरपेक्ष शब्द का मतलब क्या है ? 

हमारे देश के संविधान की मूल प्रस्तावना में धर्म-निरपेक्ष जैसा कोई शब्द नहीं था . ये शब्द संविधान की मूल प्रस्तावना में बाद में जोड़ा गया है . 

देश में इमरजेंसी के बाद 1976 में संविधान में 42वां संशोधन हुआ...और संविधान की प्रस्तावना में दो शब्द जोड़े गये...‘Secular’ यानी पंथ-निरपेक्ष और ‘Socialist’ यानी समाजवादी.

संविधान में तो Secular शब्द का अनुवाद पंथ-निरपेक्ष किया गया है...लेकिन इसे बाद में धर्मनिरपेक्ष कहा जाने लगा, और फिर देश की तमाम पार्टियों, डिज़ाइनर पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने इस शब्द का दोहन किया. 

धर्मनिरपेक्षता, 'पंथ-निरपेक्षता' या 'Secularism' 
एक संवैधानिक सिद्धांत है, जिसका मतलब है कि
किसी राज्य या देश की नीतियों का निर्माण धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए . और सभी धर्मों के लोग क़ानून और संविधान की नज़र में समान हैं . 

आज हम यही कहना चाहते हैं कि जब भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है . तब भारत में अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक की बात ही क्यों की जाती है ?

धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक तब तय किए जाते हैं, जब देश का एक धर्म तय हो . जैसे पाकिस्तान एक इस्लामिक देश है . तो वहां पर गैर मुसलमानों को अल्पसंख्यक कहा जा सकता है . 

लेकिन भारत का संविधान, किसी हिंदू राष्ट्र का संविधान नहीं है . भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है . हमारे देश का कोई धर्म नहीं है . इसीलिए यहां अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक का विषय ही नहीं उठना चाहिए . लेकिन ऐसा नहीं हुआ .

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तो एक बार ये बयान भी दिया कि भारत के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है और खास तौर पर अल्पसंख्यक मुसलमानों का . 

आज़ादी के बाद से ही अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण के लिए बहुसंख्यकों के साथ अन्याय किया जाता रहा है . 

भारत में बुद्धिजीवी ये Propaganda चलाते हैं कि अल्पसंख्यक खतरे में है . लेकिन सच ये है कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी का अनुपात घट रहा है . 

भारत में अल्पसंख्यक के नाम पर वोटबैंक वाली राजनीति होती है. अब इसी को पाकिस्तान से जोड़कर देखिए. पाकिस्तान खुद को इस्लामिक देश कहता है. लेकिन वहां पर खुद को मुसलमान मानने वाले अहमदिया समुदाय के लोगों के साथ कैसा व्यवहार होता है, आज ये भी आपको देखना चाहिए. पाकिस्तान में रहने वाले अहमदिया समुदाय के एक व्यक्ति ने कुछ दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump से मुलाकात की थी. और उन्होंने Trump को बताया था, कि पाकिस्तान में इस समुदाय के लोगों के लिए खुद को मुसलमान कहना कितना मुश्किल काम है ?