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ZEE जानकारी: लोकसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत क्या कहती है?

प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर बीजेपी को स्पष्ट बहुमत देकर पूरे भारत ने दुनिया को बता दिया है कि वो डिवाइडर नहीं Unifier हैं. 

ZEE जानकारी: लोकसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत क्या कहती है?

9 मई को अमेरिकी पत्रिका TIME ने ट्विटर पर अपने 20 मई के edition का कवर पेज ट्वीट किया. इस पर नरेंद्ग मोदी को Divider In Chief लिखा था. ये विदेशी मीडिया का भारत के लोकतंत्र पर बहुत बड़ा हमला था. इस मैगज़ीन ने अपने कवर पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर लगाकर ये बताने की कोशिश की थी कि वो भारत को बांट रहे हैं. लेकिन कल आये जनादेश ने अंतरराष्ट्रीय साज़िश को जवाब दे दिया है. प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर बीजेपी को स्पष्ट बहुमत देकर पूरे भारत ने दुनिया को बता दिया है कि वो डिवाइडर नहीं Unifier हैं...यानी उन्होंने देश को लोकतंत्र वाले धागे में पिरो लिया है. ये जीत सिर्फ़ सीट की नहीं, बल्कि देश को एकजुट करने वाली जीत है. 

बीजेपी को मिला बहुमत प्रधानमंत्री मोदी के विकास और राष्ट्रवाद वाली राजनीति की कामयाबी है.
इस जीत में भारत की सबसे पुरानी सामाजिक बुराई जातिवाद ख़त्म होती हुए नज़र आ रही है.
धर्म को राजनीतिक हथियार बनाने वाली विपक्ष की रणनीति भी इस बार फेल हुई है.
उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में विपक्षी दलों ने मुस्लिम वोट बैंक को लेकर जो रणनीति तैयार की थी. मोदी ने उसे सोशल इंजीनियरिंग से नाकाम कर दिया है. 
इस चुनाव के दो ही किरदार थे. गरीबी और गरीबी मिटाने वाले. गरीबों ने वोट देकर गरीबी मिटाने वाली सरकार को चुना.
इस जीत में ग़रीबों तक पहुंचाई गई योजनाओं की सफलता पर मुहर लगी है.
इस जीत में भारत और इंडिया की सबसे बड़ी पार्टनरशिप छुपी हुई है.
मोदी को 22 करोड़ 60 लाख से ज़्यादा वोट वाला बहुमत देकर जनता ने बताया है कि उन्हें देश के हित में कड़े फ़ैसले लेने वाला नेता पसंद है.
नरेंद्र मोदी के आलोचक कहते हैं कि देश बदल गया है...देखा जाये तो सही मायने में देश बहुत हद तक बदल गया है...ये मोदी युग है

इस लोकसभा चुनाव में देश की 224 लोकसभा सीटों पर बीजेपी को 50 प्रतिशत से ज़्यादा वोट मिला है.
इसमें हिंदी बेल्ट यानी उत्तर भारत की 141 सीट शामिल हैं.

देश के 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बीजेपी को 50 प्रतिशत से ज़्यादा वोट मिला है.
अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़ में बीजेपी को आधे से ज़्यादा वोट मिले. 

प्रधानमंत्री मोदी में देश का विश्वास और मज़बूत हुआ है. बीजेपी ने पिछली बार जीती सीटों में से 82 प्रतिशत फिर से जीत लीं.
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीजेपी के विजेता सांसदों का वोट मार्जिन बढ़ा है

इस बार चार सीट ऐसी हैं जहां बीजेपी उम्मीदवार 6 लाख से ज़्यादा के मार्जिन से जीते हैं.
ये सीट हैं गुजरात की नवसारी, हरियाणा की करनाल, हरियाणा की फ़रीदाबाद और राजस्थान की भीलवाड़ा लोकसभा सीट. जबकि देश की 12 लोकसभा सीट ऐसी हैं जहां बीजेपी उम्मीदवार 5 से 6 लाख वोट के बीच मार्जिन से जीते हैं.
ये पूरा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के इर्द-गिर्द ही लड़ा गया है. इस बार वो ही चैलेंजर और वो ही डिफेंडर थे.
उनके नेतृत्व, उनके व्यक्तित्व और उनकी छवि का फ़ायदा सिर्फ़ बीजेपी ने ही नहीं बल्कि NDA के साथी दलों को भी मिला है.
देश के 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस बार NDA ने clean sweep किया है.
ये वो आंकड़े हैं जिनके आधार पर प्रधानमंत्री मोदी Divider नहीं Unifier कहे जाएंगे. वैसे पश्चिम मीडिया प्रधानमंत्री मोदी को लेकर कुतर्कों वाले कई लेख और रिपोर्ट तैयार कर चुकी है. लेकिन भारत की जनता ने उन्हें जवाब दे दिया है.

दोष उनकी नज़र का नहीं, उनके नज़रिए का है. कमी ढूंढने वाले शायद इस जनादेश में भी खोट तलाश लें. पर, आप निश्चिंत रहिए. आपने बिल्कुल सही चुनाव किया है.

इस बार कांग्रेस के 9 पूर्व मुख्यमंत्री लोकसभा चुनाव हार गये हैं. 

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित उत्तर पूर्व दिल्ली सीट से हार गई. उन्हें दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने हरा दिया. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह भोपाल से हार गये. उन्हें बीजेपी की साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने हराया. 
महाराष्ट्र में कांग्रेस के दो पूर्व मुख्यमंत्री भी चुनाव हारे.
सोलापुर से सुशील कुमार शिंदे और नांदेड़ से अशोक चव्हाण चुनाव हारे हैं
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत नैनीताल से चुनाव हार गये.
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा सोनीपत से हार गये.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके वीरप्पा मोइली इस बार चिकबल्लपुर से चुनाव हार गये.
मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा तुरा सीट पर हार गए.
अरुणचाल प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके नबाम तुकी अरुणाचल पश्चिम से हार गये हैं. उन्हें गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने हराया.

देश उन नेताओं को भी नकार रहा है जो कभी उनके प्रदेश की कमान संभाल चुके हैं. इसलिये कांग्रेस को बहुत गहराई से सोचने की ज़रूरत है. कल कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक होगी. इस दौरान राहुल गांधी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े की पेशकश कर सकते हैं. इस करारी हार से कांग्रेस के शीर्ष नेताओं और कार्यकर्ताओं में काफ़ी रोष है. राहुल गांधी को अब इस्तीफ़ा दे ही देना चाहिये. इससे कांग्रेस को फ़ायदा ही होगा. और अगर कांग्रेस को फ़ायदा होगा तो गांधी परिवार को भी फ़ायदा होगा.

इस बार बीजेपी को देश भर में 37 प्रतिशत वोट मिले हैं. ये वर्ष 2014 में हुए लोकसभा से 6 प्रतिशत ज़्यादा है. तब बीजेपी को 31 प्रतिशत वोट मिले थे.
लोकसभा चुनाव 7 राउंड में हुए. बीजेपी ने हर दौर में बढ़त बनाए रखी थी. उसका वोट शेयर भी बाक़ी दलों से ज़्यादा रहा.

पहले चरण में 91 सीटों पर मतदान हुआ...इनमें बीजेपी ने 36 प्रतिशत वोट के साथ 31 सीटें जीतीं. 2014 में बीजेपी ने इनमें से 32 सीट जीती थीं.
दूसरे राउंड में 95 सीटों पर मतदान हुआ. इनमें बीजेपी को 38 सीट हासिल हुईं. दूसरे चरण तक बीजेपी की सीट का आंकड़ा 69 हो गया था. 
तीसरे चरण में 116 सीटों पर वोटिंग हुई. इनमें बीजेपी को 67 सीट मिलीं. ये बीजेपी का बड़ा स्कोर था.
चौथे चरण में 71 सीटों पर मतदान हुआ. इस चरण में बीजेपी का वोट शेयर 6.5 फीसदी बढ़ गया. बीजेपी को 49 सीट मिलीं. और इसी के साथ बीजेपी की कुल सीट 185 हो गईं. 

पांचवे चरण में 51 सीटों पर वोटिंग हुई और इनमें बीजेपी ने 42 सीटें जीतीं. यानी पांचवें चरण तक बीजेपी बहुमत के दरवाज़े तक पहुंचने लगी थी. उसने इस दौर तक 236 सीट जीत ली थीं. चुनाव का छठा चरण निर्णायक रहा. और इसमें बीजेपी का वोट शेयर 12 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ गया. बीजेपी ने इस चरण में 59 में से 45 सीट पर जीत दर्ज की. यानी बीजेपी छठे चरण में ही बहुमत हासिल कर चुकी थी. उसकी सीटों की तादाद 281 हो गई थी. ऐसे में चुनाव का आख़िरी चरण बीजेपी के लिये बोनस राउंड था...और उसमें भी बीजेपी का वोट शेयर 7.6 प्रतिशत बढ़ गया. पार्टी ने इस चरण में 300 को आंकड़ा पार कर लिया था.

नरेंद्र मोदी की जीत पिछले 5 वर्षों में जनता के लिए किये गये काम का परिणाम है . मोदी सरकार को फिर से सत्ता में लाने का श्रेय उन योजनाओं का है भी है, जिसने 22 करोड़ों लोगों की ज़िंदगी बेहतर बनाई है

उज्ज्वला योजना से देश के 7 करोड़ 20 लाख गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन दिया गया. 
3 करोड़ किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ मिला. 
महंगे इलाज से मुक्ति दिलाने वाली आयुष्मान भारत योजना से 2 करोड़ 89 लाख लोगों को फ़ायदा हुआ . 
तो, 4 करोड़ 81 लाख लोगों को प्रधानमंत्री मुद्रा लोन से फ़ायदा मिला है.
करीब ढाई करोड़ घरों को पहली बार बिजली का कनेक्शन मिला. 

ये बदलाव ही पोलिंग बूथ पर जाकर वोट में बदले. और नरेंद्र मोदी को ऐतिहासिक जीत मिली.

इन योजनाओं के ज़मीनी असर से बेख़बर लोगों को लग रहा था कि उत्तर प्रदेश में बना समाजवादी पार्टी और BSP का गठबंधन, 23 मई के नतीजों को बदल देगा. ये जातिवाद के आधार पर बना गठबंधन था जिसके निशाने पर सिर्फ़ बीजेपी थी. लेकिन जब नतीजे आये तो ये वोट बैंक वाली राजनीतिक साज़िश पूरी तरह Flop साबित हो गई. 

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में बीजेपी गठबंधन को इस बार 64 सीट मिली हैं. यानी वर्ष 2014 के मुक़ाबले उसे 9 सीट कम मिली हैं. जबकि समाजवादी पार्टी और BSP का गठबंधन सिर्फ़ 15 सीट जीत पाया है. समाजवादी पार्टी को 5 और BSP को 10 सीट मिलीं.

समाजवादी पार्टी को 17.6 प्रतिशत और BSP को 19.3 प्रतिशत वोट मिले हैं. RLD को 1.6 वोट मिलें.
इस जातिवादी गठबंधन को कुल मिलाकर 38.5 प्रतिशत वोट मिला है. जबकि बीजेपी को इस बार 49.6 प्रतिशत वोट मिले हैं. 

यानी उत्तर प्रदेश में गठबंधन ने पूरी ताक़त लगाकर भी वो बीजेपी से आगे नहीं निकल पाया.
गठबंधन करने के बावजूद समाजवादी पार्टी पिछली बार की तरह 5 सीट ही जीती...जबकि 2014 में एक भी सीट ना जीतने वाली बहुजन समाज पार्टी इस बार 10 जीत गई. इस बार BSP को तो 2014 जितने ही वोट मिले...लेकिन समाजवादी पार्टी को 2014 के मुक़ाबले 5 प्रतिशत वोट का नुक़सान हुआ है. यानी समाजवादी पार्टी जिसे अपना वोट बैंक समझती है...उसने इस बार अखिलेश यादव की राजनीति को पसंद नहीं किया. उत्तर प्रदेश में यादव, मुसलमान और अनुसूचित जाति वाले इस Alliance का सफ़ाया हो गया है. हम कह सकते हैं कि उत्तर प्रदेश की जनता ने जातिवाद और मुस्लिम वोट बैंक वाली राजनीति की जगह प्रधानमंत्री मोदी को चुना है.