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ZEE जानकारी :विधानसभा चुनाव नतीजों से बीजेपी को क्या सीख मिली है?

बीजेपी के लिए सबक ये है कि Core Voter को नाराज़ करना किसी भी पार्टी को महंगा पड़ सकता है .

ZEE जानकारी :विधानसभा चुनाव नतीजों से बीजेपी को क्या सीख मिली है?

मध्य प्रदेश और राजस्थान का चुनाव हारने के बाद बीजेपी को एक बहुत बड़ा सबक मिला है . वो सबक ये है कि Core Voter को नाराज़ करना किसी भी पार्टी को महंगा पड़ सकता है .

मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीजेपी के Core Voter यानी सवर्णों ने ही बीजेपी से दूरी बना ली . सवर्णों की नाराज़गी की मुख्य वजह थी SC/ST Act में बदलाव . 

इसी वर्ष 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST (Prevention of Atrocities) Act में संशोधन किया था और इससे जुड़े मामलों में आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा था कि ये कानून SC/ST पर अत्याचार रोकने के लिए बनाया गया था. लेकिन इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है. लेकिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलट दिया . 

केंद्र सरकार के इस फैसले से पूरे देश में ही सवर्ण काफी आहत नज़र आए . पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए . Social Media पर सवर्णों ने संगठन बनाकर NOTA का Button दबाने का अभियान चलाया. 

NOTA का मतलब होता है .... None of the above... यानी EVM में ऊपर दी गई पार्टियों में से कोई भी नहीं . 

NOTA का Button दबाने वाले लोग वो होते हैं जो मतदान केंद्र तक आते हैं और किसी भी पार्टी को वोट ना देकर, NOTA का Button दबा देते हैं. इसका मतलब है कि वो किसी भी पार्टी को Vote नहीं देना चाहते. NOTA का Button दबाने का फैसला करने वाले ज़्यादातर लोग सत्ता में बैठी पार्टी को सबक सिखाना चाहते हैं .

मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी NOTA का Button दबाकर लोगों ने बीजेपी की सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा प्रकट किया . 

अगर आप वोटों के गणित को देखेंगे तो आपको ये बात आसानी से समझ में आ जाएगी कि NOTA वाले Votes ने कैसे बीजेपी की हार की कहानी लिख दी . 

मध्य प्रदेश में बीजेपी को 1 करोड़ 56 लाख 42 हज़ार 980 वोट मिले . 

जबकि कांग्रेस पार्टी को 
1 करोड़ 55 लाख 95 हज़ार 153 वोट मिले . 

य़ानी मध्य प्रदेश में बीजेपी को 47 हज़ार 827 वोट ज्यादा मिले.

मध्य प्रदेश में बीजेपी के वोट ज्यादा होने के बाद भी ये अंतर सीटों में नहीं बदल पाया. 

क्योंकि मध्य प्रदेश में 5 लाख 42 हजार 295 वोट NOTA के हिस्से में चले गये. इनमें से ज़्यादातर लोग वही थे जिन्होंने पिछले चुनावों में बीजेपी को वोट दिया था . लेकिन बीजेपी से नाराज़ होकर इन्होंने NOTA का Button दबाया . 

इसी तरह राजस्थान में भी सवर्ण... SC/ST Act पर सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने से नाराज़ थे. 

राजस्थान में कांग्रेस पार्टी को 1 करोड़ 39 लाख 35 हजार 201 वोट मिले . 

जबकि बीजेपी को 1 करोड़ 37 लाख 57 हजार 502 वोट मिले . 

कांग्रेस को बीजेपी के मुकाबले 1 लाख 77 हजार 699 वोट ज्यादा मिले . 

लेकिन Note करने वाली बात ये है कि राजस्थान में 
4 लाख 67 हज़ार 781 लोगों ने NOTA का Button दबाया . 

SC/ST Act पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट देने का बीजेपी का दांव अब उल्टा पड़ चुका है . सवर्णों को अपना Vote Bank मानने वाली बीजेपी को ये फैसला बहुत महंगा पड़ा है. 
 
वैसे आपने भी ये बात नोट की होगी कि सोशल मीडिया पर भी बीजेपी की हार की वजहों का सटीक विश्लेषण किया जा रहा है . 

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर Viral हो रही है... जिसमें लिखा है किसान उगाना भी जानता है और काटना भी. 
इस तस्वीर का संदेश साफ है कि किसानों ने हाथ नहीं काटा, बल्कि कमल काट दिया. हाथ कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिह्न है और कमल बीजेपी का. यानी बीजेपी किसानों के गुस्से को समझ नहीं पाई. 

ये गुस्सा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पिछले कुछ समय से पनप रहा था. लेकिन बीजेपी किसानों के मन को पढ़ नहीं पाई. जबकि कांग्रेस ने किसानों के लिए अपने घोषणापत्र में बड़े ऐलान कर दिए. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने सरकार बनते ही किसानों का कर्ज़ा माफ करने की घोषणा की और इसका उसे फायदा भी हुआ. 

बीजेपी को ये समझ में आ गया होगा कि जय जवान और जय किसान के नारे को... धरातल पर साकार करने का वक्त आ गया है. क्योंकि किसानों की ये नाराज़गी बीजेपी को आगे लोकसभा चुनावों में भारी पड़ सकती है. इसलिए बीजेपी को जल्द से जल्द किसानों की नाराज़गी को दूर करना होगा. 

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की इस बेल्ट को हिंदी हार्टलैंड का हिस्सा माना जाता है. लेकिन चुनावी नतीजों से ऐसा लगता है कि जनता ने बीजेपी के हार्ट यानी दिल की सर्जरी कर दी. इस सर्जरी से Recover करने के लिए बीजेपी के पास ज़्य़ादा समय नहीं है. 
अब उसे कुछ राजनीतिक Multi vitamins लेने होंगे.