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ZEE जानकारी: ...जब 1971 के युद्ध की जीत का फायदा नहीं उठा पाया भारत

भारत की सेना ने पाकिस्तान को पूर्वी और पश्चिमी...दोनों मोर्चों पर हराया था. भारत ने पाकिस्तान के 90 हज़ार से ज़्यादा सैनिकों को युद्ध बंदी बना लिया था.

ZEE जानकारी: ...जब 1971 के युद्ध की जीत का फायदा नहीं उठा पाया भारत

किसी भी युद्ध को अगर मैदान में जीत लिया जाए...लेकिन मेज़ पर आकर उस विजय का फ़ायदा ना उठाया जाए...तो इसे जीत नहीं...समझौता कहा जाएगा.

1971 के युद्ध के बाद भारत के साथ यही हुआ था. भारत की सेना ने पाकिस्तान को पूर्वी और पश्चिमी...दोनों मोर्चों पर हराया था. 
भारत ने पाकिस्तान के 90 हज़ार से ज़्यादा सैनिकों को युद्ध बंदी बना लिया था. पाकिस्तान में पंजाब और सिंध के कई इलाक़ों में भारतीय सेना का क़ब्जा हो गया था. हमारी फ़ौज नियंत्रण रेखा को पार करके पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर में भी कई किलोमीटर अंदर तक चली गई थीं.

कुल मिलाकर पाकिस्तान की 15 हज़ार वर्ग किलोमीटर ज़मीन भारत के पास आ गई थी. ये इतनी ज़मीन थी...जिसमें दिल्ली जैसे 10 शहर बसाए जा सकते हैं. या नागालैंड जितना बड़ा एक राज्य बनाया जा सकता है.

ये पाकिस्तान की करारी हार थी. लेकिन जब भारत की इस विशाल जीत के बाद पाकिस्तान को मेज़ पर समझौते के लिये आना पड़ा...तो हम ऐसी कई बातों को मनवाने में नाकाम रहे, जो कश्मीर का मुद्दा हमेशा के लिये ख़त्म कर देतीं.

दिसंबर 1971 में 13 दिनों तक चले युद्ध के 6 महीने बाद 2 जुलाई 1972 को भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता हुआ था.
इस समझौते में लिखा गया कि दोनों पक्ष सभी विवाद शांतिपूर्ण तरीके से निपटाएंगे.
हर मतभेद को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाया जाएगा .
दोनों देश एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे.
और जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा का उल्लंघन नहीं किया जाएगा.

1971 का युद्ध जीतने के बाद भारत चाहता तो पाकिस्तान पर कश्मीर को लेकर दबाव बना सकता था . लेकिन तब शिमला समझौते में इंदिरा गांधी ने सदभावना दिखाते हुए पाकिस्तान को पूरी ज़मीन वापस कर दी थी. इसलिये अगर डिप्लोमेसी में इसे भारत की हार नहीं कहेंगे...तो इसे बड़ी जीत भी नहीं कह सकते. 
लेकिन Article 370 हटाये जाने के बाद आज देश में विपक्ष...खासकर कांग्रेस और कई बुद्धिजीवी शिमला समझौते की बात कर रहे हैं. कश्मीर पर नैतिकता की बहुत बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं. लेकिन हम पाकिस्तान की नैतिकता से बहुत अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं.

Pakistan Peoples Party के अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी ने शिमला समझौते को लेकर कुछ ऐसी बात बताई हैं...जो आज विपक्ष और बुद्धिजीवियों को ज़रूर सुननी चाहिये. पाकिस्तान की National Assembly में उन्होंने कहा है कि 1971 का युद्ध जीतने के बावजूद भारत ने पाकिस्तान के सामने जो शर्त रखीं...वो बहुत कमज़ोर थीं. आसिफ़ अली ज़रदारी पाकिस्तान के राष्ट्रपति भी रह चुके हैं. 

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो उनकी पत्नी थीं. और बेनज़ीर भुट्टो पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की बेटी भी थीं. वर्ष 1972 में ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे...और उन्हीं के साथ पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किये थे.

पाकिस्तान जानता था कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक़ भारत को पाकिस्तान के 90 हज़ार सैनिकों को देर सवेर लौटाना ही पड़ेगा.और अगर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की ज़मीन भारत के पास रह गई...तो उसे वापस लेना नामुमकिन हो जाएगा.

लेकिन भारत को लगा कि पाकिस्तान को अपने 90 हज़ार सैनिकों की ज़्यादा चिंता है. जबकि ऐसा नहीं था.

जिस देश ने कारगिल की जंग में मारे गये अपने सैनिकों के शव लेने से इनकार कर दिया था...उसी बे-ग़ैरत पाकिस्तान ने 1971 में युद्ध बंदी बनाये गये अपने 90 हज़ार सैनिक वापस लेने में भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी. पाकिस्तान को सिर्फ़ अपनी ज़मीन की फ़िक्र थी. 

पाकिस्तान जानता था कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक़ भारत को पाकिस्तान के 90 हज़ार सैनिकों को देर सवेर लौटाना ही पड़ेगा.और अगर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की ज़मीन भारत के पास रह गई...तो उसे वापस लेना नामुमकिन हो जाएगा.

लेकिन भारत को लगा कि पाकिस्तान को अपने 90 हज़ार सैनिकों की ज़्यादा चिंता है. जबकि ऐसा नहीं था.

जिस देश ने कारगिल की जंग में मारे गये अपने सैनिकों के शव लेने से इनकार कर दिया था...उसी बे-ग़ैरत पाकिस्तान ने 1971 में युद्ध बंदी बनाये गये अपने 90 हज़ार सैनिक वापस लेने में भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी. पाकिस्तान को सिर्फ़ अपनी ज़मीन की फ़िक्र थी. 

शिमला समझौते को लेकर पाकिस्तान की नीयत साफ़ होती तो वो भारत से अच्छे रिश्ते रखता, दोनों देश साथ-साथ तरक़्क़ी करते. लेकिन पाकिस्तान ने भारत से दुश्मनी जारी रखी, और 90 के दशक में कश्मीर में आतंकवाद फैलाकर उसने भारत को Thousand Cuts यानी हज़ारों घाव देने वाली नीति पर काम करना शुरू कर दिया.
लेकिन भारत से नफरत की बुनियाद पर जन्म लेने वाला पाकिस्तान धीरे-धीरे आज नर्क में बदल गया है.

पाकिस्तान की आर्थिक हालत बेहद ख़राब है.
पाकिस्तान को इस साल अपने रक्षा बजट में भी कटौती करनी पड़ी है . इस साल पाकिस्तान का रक्षा बजट 1 लाख 15 हज़ार करोड़ रुपये का है . जबकि भारत का रक्षा बजट 3 लाख 18 हज़ार करोड़ रुपये है .
पाकिस्तान को कई बार मिन्नतें करने के बाद...IMF यानी International Monetary Fund से 42 हज़ार करोड़ रुपये का उधार मिला है . इसे चुकाने के लिए पाकिस्तानी नागरिकों पर अतिरिक्त Tax लगाए गए हैं . पाकिस्तान की सरकार ने अपने बजट में Income Tax को 5 से 35 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है . पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में इस वक्त महज़ 55 हज़ार करोड़ रुपये हैं. इतनी रक़म से पाकिस्तान सिर्फ 17 महीने तक दूसरे देशों से सामान खरीद सकता है .

पाकिस्तान की हालत ये है कि वहां के लोग 10 से 12 रुपये में मिलने वाली नान भी नहीं खरीद पा रहे हैं. इमरान ख़ान को कुछ दिन पहले एक बैठक करके..नान की कीमते कम करने का ऐलान करना पड़ा था . पाकिस्तान की मौजूदा हालत को समझने के लिए आपको वहां के पत्रकार हसन निसार का एक Video देखना चाहिए . ये वीडियो देखकर आपको समझ आ जाएगा कि कैसे पाकिस्तान अपने नागरिकों को दो वक्त की रोटी तक नहीं दे पा रहा है. लेकिन भारत को परमाणु हमले की धमकी देता रहता है.