ZEE जानकारी : हमारा समाज और सिस्टम सड़क दुर्घटनाओं को कब गंभीरता से लेना शुरू करेगा

नए आंकड़ों के मुताबिक भारत में एक साल में करीब 1 लाख 48 हज़ार लोग सड़क दुर्घटनाओं में मर रहे हैं. यानी हर साढ़े तीन मिनट में, एक व्यक्ति की मौत हो रही है. 

ZEE जानकारी :  हमारा समाज और सिस्टम सड़क दुर्घटनाओं को कब गंभीरता से लेना शुरू करेगा

1 लाख 48 हज़ार... ये नंबर आपको याद कर लेना चाहिए, और हर रोज़, घर से निकलने से पहले इस नंबर की गंभीरता को समझना चाहिए. आज ख़बरें तो बहुत हैं... लेकिन ये नंबर आज पूरे देश से ऊंची आवाज़ में कह रहा है... Me Too.. यानी मेरे बारे में भी बात करो.

नये आंकड़ों के मुताबिक भारत में एक साल में करीब 1 लाख 48 हज़ार लोग सड़क दुर्घटनाओं में मर रहे हैं. यानी हर साढ़े तीन मिनट में, एक व्यक्ति की मौत हो रही है. इतने लोग भारत के किसी युद्ध में नहीं मरे. अगर पिछले 20 वर्षों में हुए सभी आतंकवादी हमलों में मारे गये लोगों की संख्या को जोड़ लिया जाए तो भी ये संख्या 1 लाख 48 हज़ार तक नहीं पहुंचेगी. भगवान ना करे, लेकिन ऐसी कोई दुर्घटना आपके साथ या आपके परिवार के किसी सदस्य के साथ भी हो सकती थी. आप बच गये... लेकिन बहुत से लोग ऐसे थे जो नहीं बच पाए. 

इस रिपोर्ट में ये भी लिखा हुआ है कि हमारे देश में Helmet और Seat Belt ना लगाने की वजह से हर रोज़ 177 लोगों की मौत होती है

वर्ष 2017 में Helmet ना लगाने की वजह से हर रोज़ 98 Bike सवार मारे गए. और Seat Belt ना पहनने की वजह से हर रोज़ कार पर सवार 79 लोगों की मौत हुई. इसके अलावा अपनी गाड़ी या Bike चलाते वक्त फोन पर बात करने वाले 9 लोग हर रोज़ सड़क दुर्घटना में मारे गए. 

Road Accidents में 2016 के मुकाबले 2017 में कम लोगों की मौत हुई है, लेकिन ये फर्क ज़्यादा नहीं है. लेकिन, चिंता की बात ये है कि भारत के लोग Safety Gears और Devices का इस्तेमाल ठीक से नहीं करते. और इसकी वजह से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ गया है.

पिछले वर्ष ऐसी दुर्घटनाओं में जितनी भी मौतें हुईं, उनमें से सबसे ज़्यादा 48 हज़ार 746 Bike सवार थे. इनमें से भी क़रीब 74 फीसदी मौतें सिर्फ इसलिए हुईं, क्योंकि लोगों ने Helmet नहीं पहना था.

2017 में Accident के दौरान Helmet ना होने की वजह से 36 हज़ार लोग मारे गए. जबकि, वर्ष 2016 में ये आंकड़ा 10 हज़ार 135 लोगों का था. यानी हमारे देश के लोग पहले से ज़्यादा लापरवाह हो गये.

इसके अलावा 2017 में Seat Belt ना लगाने की वजह से 26 हज़ार 896 लोग मारे गए. 

जबकि, गाड़ी या Bike चलाते वक्त मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की वजह से पूरे देश में 3 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई.

इस दौरान 64 प्रतिशत से ज़्यादा दुर्घटनाएं सीधी सड़कों पर हुईं. जहां कोई मोड़ नहीं था. 73 फीसदी से ज़्यादा दुर्घटनाओं के दौरान मौसम बिल्कुल साफ था. यानी उस वक्त ना तो बारिश हो रही थी और ना ही तेज़ आंधी-तूफान आया था. लेकिन तेज़ रफ्तार और गैर ज़िम्मेदारी से गाड़ी चलाने की वजह से लोग मारे गये. और इसके लिए वो खुद ज़िम्मेदार थे.

सोचने वाली बात ये है, कि आज से 48 साल पहले यानी वर्ष 1970 में सिर्फ 15 हज़ार लोग सड़क दुर्घटना में मारे गए थे. और इन 48 सालों में ये आंकड़ा 15 हज़ार से 10 गुना ज़्यादा बढ़ चुका है. इस दौरान वाहनों की संख्या भी बढ़ी है... लेकिन हमारे देश के लोग बढ़ते हुए ट्रैफिक में वाहन चलाने का अनुशासन नहीं सीख पाए. मार्च 2016 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कुल मिलाकर 23 करोड़ रजिस्टर्ड वाहन हैं. और ये वाहन अपने आप में चलते फिरते हथियार हैं. जो कभी भी... किसी की भी जान ले सकते हैं. इन आंकड़ों का सीधा सा मतलब ये है कि भारत में चलने वाला हर वाहन.. अपने आप में AK-47 राइफल से कम नहीं है. ये गाड़ियां किसी बंदूक की तरह लोगों का खून बहाती रहती हैं.. और हमारा सिस्टम इन मौतों को कभी गंभीरता से नहीं लेता. जो लोग हर रोज़ सड़क दुर्घटनाओं में मर रहे हैं उनके लिए कोई Protest नहीं होता.. कोई प्रदर्शन नहीं होता.. कोई नेता आंदोलन नहीं करता.

इसकी एक बड़ी वजह ये है, कि हमारा समाज और सिस्टम सड़क दुर्घटनाओं को कभी गंभीरता से लेता ही नहीं है. सड़क हादसा होने के बाद हमेशा ये मान लिया जाता है कि भगवान को यही मंज़ूर था.. और यही सोच हमारी सबसे बड़ी समस्या है. आज़ादी के 71 साल बाद भी देश के लोगों को सड़कों पर सुरक्षित चलने का स्वराज नहीं मिला है... ये अपने आप में राष्ट्रीय शर्म और राष्ट्रीय शोक का विषय है. और इसके लिए जितना ज़िम्मेदार हमारा सिस्टम है, उससे भी ज़्यादा ज़िम्मेदार हमारे देश के लापरवाह लोग हैं. अगर लोग इसी तरह नियम और क़ानून की धज्जियां उड़ाएंगे और सड़कों को अपनी जागीर समझेंगे... तो दुर्घटनाओं का ये आंकड़ा कभी कम नहीं होगा.
 
गाड़ी या Bike चलाने के लिए सिर्फ Driving Licence का होना ज़रुरी नहीं है. इसके लिए आपके अंदर ज़िम्मेदारी से गाड़ी चलाने का अनुशासन भी होना चाहिए. लेकिन समस्या ये है, कि हमारे देश के लोग बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं, दूसरों को ज्ञान भी देते हैं. लेकिन कभी उन बातों पर खुद अमल नहीं करते. ऐसे सभी लोगों को कायदे और कानून का सम्मान सिखाने के लिए आज अमेरिका की एक महिला का उदाहरण देना ज़रुरी है. Jacqueline नामक इस महिला पर अमेरिका में गलत तरीके से गाड़ी पार्क करने के लिए जुर्माना लगा दिया गया था. जिसकी सुनवाई कोर्ट में होनी थी. लेकिन, सुनवाई से तीन दिन पहले कुछ अज्ञात लोगों ने उसके पैर में गोली मार दी. वो हॉस्पिटल में थी. उसके पैर से गोली नहीं निकाली गई थी. लेकिन घायल होने के बावजूद.. सुनवाई वाले दिन ये महिला, जज के सामने पहुंच गई. और उसने ऐसा सिर्फ इसलिए किया, क्योंकि वो अपने देश के कानून का सम्मान करती थी. और अपनी बात कहना चाहती थी. इसके बाद क्या हुआ, इसे समझने के लिए आपको जज और इस महिला के बीच हुई बातचीत का ये छोटा सा हिस्सा ध्यान से सुनना चाहिए. इसमें आपके लिए सीखने को बहुत कुछ है.
  
यहां हम इस समस्या के कुछ समाधान भी आपके सामने रखना चाहते हैं.

पहली ज़रूरत ये है कि ट्रैफिक के नियमों का पालन ना करने पर जुर्माने की रकम बढ़ाई जाए. ताकि लोग कानूनों का सम्मान करें.

गाड़ी में डैशबोर्ड कैमरा लगाना अनिवार्य किया जाए.. ताकि उसके वीडियो की मदद से दुर्घटना के कारणों का पता चले.

जो लोग लापरवाही से गाड़ी चलाते हैं, उनका इंश्योरेंस महंगा कर दिया जाए. 

जाली लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया पर अंकुश लगाया जाए. 

सड़कों पर अतिक्रमण रोकने के लिए कड़े कानून होने चाहिए और उनका पालन भी भी सख़्ती से होना चाहिए. 

समय समय पर ड्राइवर्स का टेस्ट हो.. ताकि ये पता चले कि उनके अंदर किसी वाहन को सुरक्षित तरीके से चलाने की योग्यता है या नहीं. 

सरकार को technology की मदद से ऐसे Sensors और कैमरे लगाने चाहिएं.. जिनसे नियम तोड़ने वालों को पकड़ा जा सके.

सरकार की ये ज़िम्मेदारी होनी चाहिए कि सारी सड़कें यातायात के लिए सुरक्षित हो... सड़कें.. टूटी-फूटी नहीं होनी चाहिएं...उनमें गड्ढे नहीं होने चाहिएं और उन पर किसी तरह का अतिक्रमण भी नहीं होना चाहिए.

लेकिन सब कुछ सरकार पर नहीं छोड़ा जा सकता. इस समस्या को सुधारने के लिए आपको भी मेहनत करनी होगी.

आपके लिए पहली सलाह ये है कि आप अपनी गाड़ी में बैठने के बाद 'Seat Belt' लगाना शुरु कर दें, और 'Bike' पर बैठने से पहले Helmet पहनना शुरु कर दें. 

और दूसरी सलाह ये है कि अपनी Car या Bike चलाते हुए Mobile Phone के इस्तेमाल को 'तत्काल प्रभाव' से बंद कर दें. 

क्योंकि, अगर आपने अपनी आदत, नहीं बदली, तो आपके साथ भी दुर्घटना हो सकती है.

समस्या ये है कि हमारे देश में तरक्की हो रही है, सुख सुविधाएं हैं, शक्तिशाली इंजन वाली गाड़ियां हैं, अच्छी सड़कें हैं.. हाइवे और एक्सप्रेस-वे हैं... Technology है, लेकिन लोगों को इन सुविधाओं का इस्तेमाल करना नहीं आता. हमें लगता है कि किसी भी देश का विकास करने और उसे सुपरपावर बनाने के लिए वहां के लोगों का काबिल होना बहुत ज़रूरी है. काबिलियत और अनुशासन के बगैर विश्वगुरू बनने की उम्मीद नहीं की जा सकती.

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