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ZEE जानकारी: भारत की सड़कों को कब मिलेगी अतिक्रमण से मुक्ति?

आपके आसपास कोई ना कोई ऐसी सड़क ज़रूर होगी.. जिस पर अतिक्रमण हुआ होगा.. कोई ना कोई ऐसा फुटपाथ ज़रूर होगा.. जिस पर किसी ने अवैध कब्ज़ा कर लिया होगा.

ZEE जानकारी: भारत की सड़कों को कब मिलेगी अतिक्रमण से मुक्ति?

अब हम देश की एक बड़ी राष्ट्रीय समस्या की बात करेंगे... जिसका नाम है अतिक्रमण.

शहर कोई भी हो, अतिक्रमण वाली समस्या से हर कोई परेशान है. आपके आसपास कोई ना कोई ऐसी सड़क ज़रूर होगी.. जिस पर अतिक्रमण हुआ होगा.. कोई ना कोई ऐसा फुटपाथ ज़रूर होगा.. जिस पर किसी ने अवैध कब्ज़ा कर लिया होगा...या उस पर वाहन चल रहे होंगे और आप उसे देखकर किसी तरह अपना गुस्सा पी जाते होंगे. आपकी ये मौन स्वीकृति इस समस्या का एक बहुत बड़ा कारण हैं . आपको इसके ख़िलाफ़ ना कहने की हिम्मत करनी होगी.

जब तक आप समस्या के ख़िलाफ़.... ना कहना नहीं सीखेंगे, तब तक समाज में कोई बदलाव नहीं आयेगा . ऐसा नहीं कि आपने सड़क पर चलते हुए इस समस्या को देखा ना हो या इससे परेशान ना हुए हों . लेकिन आपने इस समस्या को हमेशा सिस्टम के भरोसे छोड़ दिया. और सिस्टम ने आपके लिए कुछ नहीं किया . 

आज ऐसे लोगों को जागरूक करने के लिए हमारे पास बैंगलुरू से एक वीडियो आया है . इस वीडियो में दो बुज़ुर्ग... फुटपाथ पर बाइक चलाने वाले एक युवक का विरोध कर रहे हैं. इनका कहना है कि फुटपाथ को सिर्फ़ पैदल चलने वालों के लिए रहने दीजिये .इस पर अतिक्रमण मत कीजिए. पहले आप ये वीडियो देखिये. इस वीडियों में पूरे देश के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है . 

इन बुज़ुर्गों की हिम्मत और विरोध की शक्ति से आगे युवक को हार माननी पड़ी और फुटपाथ छोड़कर जाना पड़ा. फुटपाथ पर वाहन चलाने से रोकने के लिए बैंगलुरू में कुछ बुज़ुर्गों ने एक मुहिम चलाई हुई है. इस मुहिम को पूरे देश में फैलाने की ज़रूरत है. जब तक आप समस्या को पैदा करने वालों का विरोध नहीं करेंगे . उन्हें रोकेंगे नहीं, तब तक उसमें कोई सुधार नहीं लाया जा सकता है. 

Central Road Research Institute के एक आंकड़े के मुताबिक दिल्ली शहर के 50 प्रतिशत से ज़्यादा फुटपाथों पर अवैध कब्ज़ा हो चुका है . ये देश के एक शहर का आंकड़ा है. इस हिसाब से आप पूरे देश की स्थिति का अंदाज़ा लगा सकते हैं . 

सड़क और परिवहन मंत्रालय के मुताबिक अवैध कब्जे से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की वजह से हर साल 2 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो जाती है. यानी भारत में अतिक्रमण की समस्या जानलेवा स्तर तक पहुंच चुकी है. 

हमारा सिस्टम चाहे तो अतिक्रमण को शुरुआत में ही रोक सकता है. लेकिन वो इस समस्या को बढ़ाने में यक़ीन रखता है, क्योंकि इसमें बहुत फायदा है और रिश्वत की बड़ी संभावनाएं हैं.

Indian Council of Social Science Research की एक study के मुताबिक सिर्फ मुंबई में ही अवैध वसूली का ये रैकेट करीब एक हज़ार करोड़ रुपये का है. जबकि दिल्ली में ऐसे Vendors से हर वर्ष करीब 6 सौ करोड़ रुपये वसूले जाते हैं . 

कुछ लोग फुटपाथ को अपनी जागीर समझते हैं और उन लोगों पर हमारे भ्रष्ट सिस्टम की कृपा बरसती है. अतिक्रमण और अवैध पार्किंग की वजह से ही देश में ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा होती है . 

इसका दूसरा बड़ा कारण ये भी है कि देश में सड़कों की क्षमता के मुक़ाबले वाहनों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है. अपनी कार में बैठने वाले सपने को पूरा करने की चक्कर में भारत में तीन गुनी रफ़्तार से वाहन खरीदे जा रहे हैं . 

पिछले वर्ष देश भर में हर दिन करीब 54 हज़ार वाहन खरीदे गये . जबकि दस साल पहले हर दिन 18 हज़ार वाहन ही ख़रीदे जा रहे था . सड़कों पर लगातार बढ़ती वाहनों की लंबी लाइन ने महानगरों को जाम कर दिया है . ये समस्या बड़े स्तर पर वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण बनती है. यानी ये सारी समस्याएं आपस में जुड़ी हुई हैं . ट्रैफिक Jam से पैदा होने वाला तनाव.... प्रदूषण से होने वाली जानलेवा बीमारियों पर ख़त्म होता है . प्रदूषित हवा की वजह से शहरों में रहने वाले लोगों की नसें जाम हो रही हैं. लेकिन इस बात से किसी को कोई फर्क़ नहीं पड़ रहा है 

अब आप ये समझ गए होंगे कि अतिक्रमण हमारे पूरे देश की कितनी बड़ी समस्या बन चुका है. लेकिन हैरानी की बात ये है कि कोई राजनेता या राजनीतिक दल इस विषय पर बात नहीं करना चाहता .