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ZEE जानकारी: कौन थे विनायक दामोदर सावरकर?

28 मई को...136 वर्ष पहले... वर्ष 1883 में महाराष्ट्र के नासिक में वीर सावरकर का जन्म हुआ था.

ZEE जानकारी: कौन थे विनायक दामोदर सावरकर?

चुनाव में हारने वाली पार्टी को आत्मचिंतन करना चाहिए कि क्यों हारे. लेकिन, कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है. जनता ने कांग्रेस की विचारधारा को दो बार ख़ारिज कर दिया. पहले 2014 में, फिर 2019 में. कांग्रेस को अब बीजेपी से लड़ने के लिए नई विचारधारा चाहिए . 

लेकिन, पार्टी दो बार की हार से कोई सबक लेने को तैयार नहीं है. हिंदुत्व और वीर सावरकर का विरोध अब कांग्रेस के DNA में शामिल हो चुका है. और शायद DNA को बदलना बहुत मुश्किल होता है.  तभी तो, बार-बार हारने के बाद भी कांग्रेस, पुराने राजनीतिक फॉर्मूले आज़माने की गलती कर रही है. 

मंगलवार को स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की जयंती है. आज ही के दिन... 28 मई को...136 वर्ष पहले... वर्ष 1883 में महाराष्ट्र के नासिक में वीर सावरकर का जन्म हुआ था.

लेकिन कांग्रेस ने आज भी वीर सावरकार का अपमान किया. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सावरकर की तुलना, देश को बांटने वाले मुहम्मद अली जिन्ना से की. बघेल ने वीर सावरकर को Two Nation Theory यानी हिंदुओं और मुसलमानों के लिए अलग-अलग राष्ट्र के सिद्धांत का समर्थक बताया है . 

ऐसा लगता है कि कांग्रेस के नेता, गांधी परिवार के अलावा किसी भी महापुरुष को महान मानने को तैयार नहीं हैं. पंडित नेहरू का सच बताने से कांग्रेस बहुत आहत होती है. लेकिन सावरकर का अपमान करना कांग्रेस पार्टी अपना कर्तव्य मानती है .

वर्ष 2018 में राहुल गांधी ने भी संसद के अंदर सावरकर को अपमानित करने वाला बयान दिया था. भूपेश बघेल और कांग्रेस के दूसरे नेता, देश बांटने की सज़ा जिन्ना के बजाय सावरकर को देना चाहते हैं. 

कांग्रेस की विचारधारा अब प्रदूषित हो चकी है. राहुल गांधी को ये जानकारी नहीं है कि उनकी दादी इंदिरा गांधी ने वीर सावरकर की प्रशंसा की थी. 

वीर सावरकर पर शोध कर रहे इतिहासकार विक्रम संपत ने अपने एक लेख में लिखा है कि वर्ष 1966 में जब सावरकर की मृत्यु हुई थी, तब इंदिरा गांधी ने कहा था कि सावरकर का नाम साहस और देशभक्ति का दूसरा नाम है . सावरकर एक महान क्रांतिकारी थे और अनगिनत लोगों ने उनसे प्रेरणा ली थी . 

एक और इतिहासकार जयवंत जोगलेकर ने भी अपनी किताब 'Veer Savarkar Father of Hindu Nationalism' में इंदिरा गांधी के इस बयान का ज़िक्र किया है . क्या कांग्रेस के पास इन ऐतिहासिक तथ्यों का कोई जवाब है ? 

सच्चाई ये है कि कांग्रेस ने बीजेपी की राष्ट्रवाद की विचारधारा पर प्रहार करने के लिए सावरकर पर हमला किया. कांग्रेस के राज में भी स्कूल की किताबों में सावरकर को वीर सावरकर ही पढ़ाया गया. लेकिन जैसे-जैसे देश की राजनीति में बीजेपी का प्रभाव बढ़ा, कांग्रेस की नफरत, वीर सावरकर के प्रति बढ़ती गई. कांग्रेस की ये नफरत...राजनीतिक है. 

हमने इंदिरा गांधी के ऐतिहासिक बयान का ज़िक्र किया. अब हम आपको सावरकर के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचार सुनवाएंगे. राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता आजकल अटल बिहारी वाजपेयी की काफी प्रशंसा करते हैं. उनको भी अटल जी का ये ऐतिहासिक बयान बहुत ध्यान से सुनना चाहिए . 

((कांग्रेस को सबूत मांगने की आदत पड़ चुकी है. इसीलिए अब कांग्रेस वीर सावरकर की वीरता और देशभक्ति के भी सबूत मांग रही है. हमने आज इस विषय पर काफी अध्ययन किया है, ताकि आप को सच पता चले.))

सावरकर ने Two Nation Theory की शुरुआत नहीं की. मुस्लिम समाज सुधारक और शिक्षाविद सर सैयद अहमद खान को Two Nation Theory का संस्थापक माना जाता है . हम आपको ये बात पहले भी कई बार बता चुके हैं. एक बार फिर इस बात को दोहरा रहे हैं . 

कई विद्वान दावा करते हैं कि वीर सावरकर ने अपनी किताब 'हिंदुत्व' में 1920 में Two Nation Theory की बात कही थी . लेकिन सच ये है कि इस घटना से करीब 33 वर्ष पहले वर्ष 1887 में सर सैयद अहमद खान ने Two Nation Theory की बात की थी .

सर सैयद ने 28 दिसंबर 1887 को एक भाषण में Two Nation Theory की बात की थी . सर सैयद ने कहा था कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग कौम हैं. अगर आप चाहें तो काजी मुहम्मद अदील अब्बासी की किताब ख़िलाफ़त आंदोलन के Page Number 26 पर सर सैयद का भाषण को पढ़ सकते हैं. इस किताब को नेशनल बुक ट्रस्ट ने प्रकाशित किया है.

सर सैयद की Two Nation Theory को बाद में मुस्लिम लीग ने अपना लिया. प्रसिद्ध शायर मुहम्मद इक़बाल और मुस्लिम विचारक चौधरी रहमत अली ने मुसलमानों के लिए अलग देश की मांग उठाई. मुहम्मद अली जिन्ना, London में वकालत कर रहे थे. मुहम्मद इकबाल ही जिन्ना को London से वापस भारत लाए. फिर जिन्ना ने Two Nation Theory के आधार पर पाकिस्तान की मांग की . 

उस वक्त के मुस्लिम विद्वान खुद ही अपने आपको एक अलग कौम मान रहे थे. तब Two Nation Theory पर अपने विचार रखते हुए सावरकर ने भी हिंदू और मुसलमानों को अलग राष्ट्र कहा था. लेकिन उन्होंने देश को बांटने की बात कभी नहीं की थी. सावरकर ने हमेशा अखंड भारत की बात कही. और आज भी आप देखते होंगे कि सावरकर की विचारधारा को मानने वाले लोग अखंड भारत की बात करते हैं. 

संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने सावरकर के साहित्य का अध्ययन किया था. उन्होंने अपनी किताब 'पाकिस्तान या भारत का विभाजन' में सावरकर विचारों और उनके idea of india पर विस्तार से लिखा है. अंबेडकर की किताब के पेज नंबर 149 पर लिखा है... 

ये बात सुनने में भले ही विचित्र लगे लेकिन एक राष्ट्र बनाम दो राष्ट्र के प्रश्न पर मिस्टर सावरकर और जिन्ना साहब के विचार परस्पर विरोधी होने के बजाय एक-दूसरे से पूरी तरह मेल खाते हैं . दोनों ही इस बात को स्वीकार करते हैं और ज़ोर देते हैं कि भारत दो राष्ट्र हैं . एक मुस्लिम राष्ट्र और एक हिंदू राष्ट्र, उनमें मतभेद केवल इस बात पर है कि इन दोनों राष्ट्रों को किन शर्तों पर एक दूसरे के साथ रहना चाहिए . जिन्ना कहते हैं कि हिंदुस्तान के दो टुक़ड़े कर देने चाहिए... हिंदुस्तान और पाकिस्तान . मुस्लिम कौम पाकिस्तान में रहे और हिंदू कौम हिंदुस्तान में रहे. लेकिन दूसरी तरफ मिस्टर सावरकर, इस बात पर ज़ोर देते हैं कि भारत में दो राष्ट्र हैं लेकिन भारत को हिंदू और मुसलमान में नहीं बांटा जाएगा . 

ये भीम राव अंबेडकर की बहुत प्रसिद्ध किताब है जिसको आप भी पढ़ सकते हैं. अंबेडकर ने सावरकर के साहित्य को पढ़ने के बाद ये बात लिखी थी. इससे पता चलता है कि सावरकर के राष्ट्र की कल्पना में मुसलमानों का भी स्थान था. 

सावरकर ने मुसलमानों को वोट का अधिकार देने की बात की थी. सावरकर ने भारत के बंटवारे का विरोध किया था . उन्होंने अल्पसंख्यकों को उनके सभी अधिकार देने का वादा किया था वो मुस्लिम धर्म और संस्कृति की रक्षा के समर्थक थे . 

कांग्रेस, इंदिरा गांधी की बात मानने को तैयार नहीं है. इतिहासकारों की बात मानने को तैयार नहीं और संविधान का निर्माण करने वाले अंबेडकर की बात मानने को भी तैयार नहीं. कांग्रेस ना ही सच स्वीकार करना चाहती है और ना ही अपनी विचारधारा में कोई सुधार करना चाहती है. यही कांग्रेस पार्टी के पतन की वजह भी है. ))

ये दुष्प्रचार किया जाता है कि वीर सावरकर ने अंग्रेज़ों से माफी मांगी थी. 
सावरकर... जेल से बाहर रहकर देश की सेवा करना चाहते थे. वो ये मानते थे कि मातृभूमि की सेवा करने के लिए आज़ाद होना होगा. सिर्फ इस आधार पर सावरकर का मूल्यांकन करना, सावरकर के साथ अन्याय है. 

कई बार महापुरुषों ने अपना लक्ष्य पाने के लिए अलग-अलग रणनीति अपनाई है. महात्मा गांधी ने पहले विश्व युद्ध के दौरान भारत के वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड को एक पत्र लिखा था. इस पत्र की कुछ लाइनें हम आज पूरे देश को सुनाना चाहते हैं.

महात्मा गांधी ने लिखा था कि युद्ध के दौरान अगर मेरा बस चले तो मैं भारत के हर सक्षम निवासी को साम्राज्य की सेवा में बलिदान कर दूं.

हमें ये मानना चाहिए कि अगर हम ब्रिटिश साम्राज्य की सेवा कर पाए तो उस सेवा के माध्यम से ही हमने स्वराज पा लिया. 

इसलिए मेरी नजर में ये साफ है कि हमें अपने हर व्यक्ति को ब्रिटिश साम्राज्य की रक्षा में लगा देना चाहिए . 

पत्र के आखिर में महात्मा गांधी ने लिखा..

मैं ऐसा लिख रहा हूं - क्योंकि मैं ब्रिटिश राष्ट्र से प्यार करता हूं और मैं हर भारतीय में अंग्रेजों के प्रति वफादारी पैदा करना चाहता हूं.

हमने आज इस बारे में कुछ इतिहासकारों से भी बात की. सावरकर के जीवन पर रिसर्च कर रहे इतिहासकार विक्रम संपत के विचार, आपका ज्ञान बढ़ा सकते हैं. वो वीर सावरकर के जीवन से जुड़ी घटनाओं पर एक पुस्तक भी लिख रहे हैं. आज विक्रम संपत ने एक वीडियो के ज़रिए अपने विचार हमें भेजे हैं. आप भी उनकी बातें सुनिए.