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zee jaankari: एक व्यक्ति के आत्महत्या से 135 लोगों का जीवन होता है प्रभावित

हिंदू धर्म में भी आत्महत्या को पाप माना जाता है और इसकी निंदा की जाती है. लेकिन फिर भी ये सिलसिला हज़ारों वर्षों से चला आ रहा है

zee jaankari: एक व्यक्ति के आत्महत्या से 135 लोगों का जीवन होता है प्रभावित

अब इमरान ख़ान की पार्टी के एक विधायक की बातें  आपको सुनाते हैं. इस व्यक्ति का नाम बलदेव कुमार है. जो इस वक्त भारत में है. और यहीं पर Political Asylum यानी राजनीतिक आश्रय चाहता है. पिछले वर्ष इस व्यक्ति ने ख़ैबर पख्तुनख्वा से Member of the Provincial Assembly की शपथ ली थी. और इसे इमरान ख़ान का क़रीबी भी माना जाता है. लेकिन अब ये पाकिस्तान में नहीं रहना चाहता. इसका कहना है, कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं. हिन्दू हों या मुस्लिम हों...कोई भी वहां पर सुरक्षित नहीं है. एक तथ्य ये भी है, कि बलदेव कुमार पर वर्ष 2016 में एक व्यक्ति की हत्या का आरोप लगा था.

हालांकि, बाद में उसे हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया था. दुनिया की सभी सभ्यताओं और संस्कृतियों में एक बात समान है ...कि ये सभी इंसानों के जीवन का सम्मान करती हैं . दुनिया का कोई भी धर्म ऐसा नहीं है जिसमें अपनी या किसी और की जान लेना सही माना गया हो . लेकिन फिर भी दुनिया में हर 40 Seconds में एक व्यक्ति अपनी जान दे देता है और हर वर्ष  8 लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं. यानी आत्महत्या अब एक महामारी में बदल गई है . आज World Suicide Prevention Day यानी विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस है . इसलिए आज हम जीवन की गहराइयों में छिपे आत्महत्या के अंधेरे को दूर करने वाला विश्लेषण कर रहे हैं .

अगर आप अपनी नौकरी से खुश नहीं हैं..तो आप इसे छोड़ सकते हैं . अगर आप किसी रिश्ते में प्रसन्न नहीं हैं तो आप उससे भी अलग हो सकते हैं. लेकिन जीवन के साथ आप ऐसा नहीं कर सकते . क्योंकि जीवन का निर्माण आपने नहीं किया है . और जिसका निर्माण आप नहीं करते उसे नष्ट करने का अधिकार भी आपके पास नहीं है . World Health Organization द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक जब भी कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है तो उससे जुड़े करीब 135 लोगों का जीवन प्रभावित होता है . ये लोग गहरे दुख और अवसाद में चले जाते हैं .

किसी भी जीवन की समाप्ति से उस व्यक्ति के जीवन साथी, बच्चे, परिवार, रिश्तेदार, दोस्त और साथी कर्मचारी बुरी तरह प्रभावित होते हैं. हर वर्ष करीब 20 करोड़ लोग आत्महत्या की कोशिश करते हैं . जबकि ऐसे लोगों की संख्या इससे भी कहीं ज्यादा है, जिनके मन में एक ना एक बार आत्महत्या का विचार ज़रूर आता है . World Suicide Prevention Day की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी . लेकिन आत्महत्याओं को रोकने की कोशिशें प्राचीनकाल से चली आ रही हैं . प्राचीन ग्रीस में आत्महत्या करने वाले व्यक्ति को अंतिम संस्कार से वंचित कर दिया जाता था . प्राचीन रोम में भी आत्महत्या गैरकानूनी मानी गई थी .

हिंदू धर्म में भी आत्महत्या को पाप माना जाता है और इसकी निंदा की जाती है. लेकिन फिर भी ये सिलसिला हज़ारों वर्षों से चला आ रहा है. यानी जीवन की शुरुआत के साथ ही मनुष्य ने इसे खत्म करने के तरीके और बहाने भी तलाश लिए.भारत में आत्महत्या करने वाले लोगों में से करीब 27 प्रतिशत पारिवारिक समस्याओं की वजह से अपनी जान देते हैं . बीमारी दूसरी सबसे बड़ी वजह है .  इसकी वजह से 15 प्रतिशत आत्महत्याएं होती हैं. जबकि वैवाहिक जीवन और प्यार से जुड़ी समस्याएं 10 प्रतिशत आत्महत्याओं के लिए जिम्मेदार है.

यानी परिवारों में प्रेम की मात्रा घट रही है और प्रेम में रिश्तों की अहमियत लगातार कम हो रही हैं . मनोवैज्ञानिक काम के बोझ को भी आत्महत्या की बड़ी वजह मानते हैं. भारत में 70 बड़ी कंपनियों के 8 हज़ार कर्मचारियों के बीच एक सर्वे किया गया. सर्वे में सामने आया कि करीब 8 प्रतिशत कर्मचारी भारी तनाव में हैं और आत्महत्या भी कर सकते हैं. आपकी नौकरी आपकी आर्थिक ज़रूरतों को पूरा करती है और आपका भविष्य संवारती है. लेकिन करियर में नई नई ऊंचाइयां छूने का दबाव, आपके Boss की डांट-फटकार और काम को तय समय पर खत्म करने की चुनौती कई बार मानिसक स्वास्थ्य की बलि ले लेती है .

भारत में भी आत्महत्या ने महामारी का रूप ले लिया है .हमारे देश में हर साल औसतन 1 लाख 30 हज़ार से ज्यादा लोग आत्महत्या कर लेते हैं. जबकि सड़क हादसों में मरने वाले भारतीयों की संख्या 1 लाख 50 हज़ार है. आतंकवादी और नक्सली हमलों में पिछले वर्ष 400 लोग मारे गए थे . यानी आत्महत्या भारत की खुशियों के लिए ग्रहण बन गई है .आत्महत्या से होने वाली मौतों के मामले में भारत पूरी दुनिया में TOP 25 देशों में शामिल है.

भारत इस लिस्ट में 21वें नंबर पर है . इस मामले में भारत के पड़ोसी देशों की Ranking हमसे बेहतर है . World Health Organization की 2018 की रिपोर्ट में भूटान 57वें, नेपाल 81वें, चीन 69वें, बांग्लादेश 120वें और पाकिस्तान 169 वें नंबर पर है . यानी भारत एशिया की Suicide Capital बनने की तरफ बढ़ रहा है .आत्महत्या हिम्मत की नहीं कायरता की निशानी है .

जीवन की परेशानियों का अंत आत्महत्या नहीं...आत्म विश्लेषण है. इसलिए जीवन की हर चुनौती को सीढ़ी बनाकर आगे बढ़िए और फिर भी अगर आप हताश हैं या निराश हैं तो आपको हमारा ये विश्लेषण ज़रूर देखना चाहिए. भारत में सबसे दुखी करने वाली बात युवाओं की आत्महत्या के आंकड़े हैं . भारत में आत्महत्या करने वालों में 33 प्रतिशत लोगों की उम्र 30 से 45 साल के बीच होती है. 

जबकि करीब 32 प्रतिशत लोगों की उम्र 18 से 30 साल के बीच होती है . मतलब ये कि युवाओं में जिंदा रहने या फिर जिंदादिली से जिंदगी जीने की चाहत कम हुई है. आत्महत्या को लेकर शहरों के आंकड़े और भी चौंकानेवाले हैं. National Crime Records Bureau की वर्ष 2015 की रिपोर्ट में शहरों में आत्महत्या का प्रतिशत 12.2 है . 

जबकि राष्ट्रीय स्तर पर आत्महत्या का आंकड़ा 10.6 प्रतिशत है . जीवन का अंत समस्याओं का अंत नहीं है. लेकिन दुनिया भर में कई लोगों ने खुद की जिंदगी का अंत कर समस्याओं के अंत का रास्ता चुना. ये वो लोग थे जो अपने क्षेत्र में एक वक्त बेहद सफल थे. लोगों के लिए प्रेरणा थे. लेकिन अचानक उन्होंने आत्महत्या का रास्ता चुन लिया.

शिखर पर बैठे सफल लोग जब Suicide का रास्ता चुनते हैं और जिंदगी की परेशानियों पर विजय पाने के बदले खुद को खत्म कर लेते हैं तो दुनिया हैरान रह जाती है. इसमे पहला नाम Marilyn Monroe का है. वो 1950 के दशक में Hollywood की सबसे मशहूर और खूबसूरत अभिनेत्री थी. अचानक 5 अगस्त 1962 को Marilyn Monroe की बॉडी उनके घर में मिली.

कुछ लोग उनकी मौत को रहस्य मानते हैं. लेकिन Los Angeles  पुलिस Marilyn Monroe की मौत को आत्महत्या ही मानती है. इसमे दूसरा नाम Robin Williams का है. Robin Hollywood के टॉप comedian थे. 11 अगस्त 2014 को उनकी मौत की खबर आई. Robin Williams की पत्नी ने खुलासा किया कि उनकी मौत खुदकुशी थी और अकेलेपन ने उनकी जान ले ली. वर्ष 2017 में अमेरिकी सिंगर Chester Bennington (चेस्टर बेनिंगटन) की आत्महत्या की खबर भी दुनिया में सुर्खियों में रही. वो कई वर्षों से डिप्रेशन में थे. और आखिरी में उन्होंने अपने शानदार Singing करियर को खुद की जान लेकर खत्म कर दिया.

International wrestler माइकल लुंग-बर्ग (Mikael Ljungberg) ने 34 वर्ष की उम्र में ही Suicide कर लिया था. वो Swedish नागरिक थे और ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत चुके थे. दो महीने पहले ही भारत में भी एक आत्महत्या की खबर ने लोगों को चौंकाया था. Cafe Coffee Day यानी CCD के मालिक ने V. G. Siddhartha ने नदी में कूदकर जान दे दी. ये वो लोग हैं जो दुनिया में मशहूर थे. लोगों के लिए Role Model थे. लेकिन कामयाबी और दौलत दोनों के शिखर पर पहुंचने के बाद भी इंसान खुश ही हो ये ज़रुरी नहीं है. नाकामयाब रिश्ते और अकेलापन किसी इंसान को कितना मजबूर कर सकते हैं - इसका जवाब इसी सच में छिपा है कि पैसा सब कुछ नहीं होता.

अंग्रेजी में एक कहावत है Money can not bring you happiness. आत्महत्या सिर्फ स्वयं पर की गई हिंसा नहीं है बल्कि ये आपके आसपास के लोगों को भी दुख पहुंचाती है . जीवन की यात्रा में खुद को बचाना महत्वपूर्ण है . इसके लिए आपको और ज्यादा पाने की चाहत और डर से छुटकारा पाना होगा . आज हम आपको मशहूर हिंदी फिल्म Three Idiots का एक सीन दिखाना चाहते हैं. इस सीन को देखकर आप समझ जाएंगे कि जीवन जीने का सही नज़रिया क्या होता है. महान मनोवैज्ञानिक सिगमंड फ्रायड मानते थे कि उदासी और दुविधा..आत्महत्या के दो सबसे बड़े कारण है .

इसलिए आज हम आपको दुख, उदासी और दुविधाओं से निपटने के तरीके भी बताएंगे . भगवान बुद्ध ने दुनिया को चार आर्य सत्य दिए थे . जिनके अनुसार दुनिया में दुख है . दुख का कारण है और ये कारण...तृष्णा यानी और ज्यादा पाने की चाहत है . इस दुख से मुक्ति पाई जा सकती है. लेकिन दुख से छुटकारे के लिए आपको एक निश्चित मार्ग पर चलना होगा .

सबसे पहले आपको अपनी इच्छाओं पर काबू पाना होगा . और जीवन ने जो कुछ आपको दिया उसे संतोष के भाव के साथ स्वीकार करना होगा . संतोष और समर्पण किसी संजीवनी जैसे हैं. और इनकी मदद से आप बुरे से बुरे हालात पर भी विजय हासिल कर सकते हैं. हमने आत्महत्या से जुड़े जो आंकड़े आपको दिखाए वो ये बताते हैं कि भारत में 37 प्रतिशत आत्महत्याएं रिश्तों की वजह से होती हैं. यानी लोग जिन रिश्तों के लिए जीवन जीते हैं...वही रिश्ते अब लोगों की जान ले रहे हैं . ये एक नष्ट होते समाज की निशानी है और हमें इसे बदलना ही होगा.