ZEE जानकारी: जनता के पैसे से नेताओं के '5 स्टार पर्यटन'

आज यदि आप भारतीय लोकतंत्र में नैतिकता तलाश करने की कोशिश करेंगे तो आपको बहुत निराशा होगी. 

ZEE जानकारी: जनता के पैसे से नेताओं के '5 स्टार पर्यटन'

आज यदि आप भारतीय लोकतंत्र में नैतिकता तलाश करने की कोशिश करेंगे तो आपको बहुत निराशा होगी. क्योंकि देश की राजनीति में आदर्शों और नैतिकता की Expiry Date खत्म हो गई है. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि एक वोटर के तौर पर आज की तस्वीरें देखकर देश चिंतित हैं... तो पूरी सच्चाई जानकर आपका दुख और बढ़ जाएगा. क्योंकि नैतिकता से दूरी की शुरुआत आपके वोट डलने से पहले हो जाती है... विधानसभा चुनाव में एक उम्मीदवार के लिए खर्च की सीमा 28 लाख रुपए है... लेकिन ज्यादातर उम्मीदवार खर्च का झूठा हलफनामा पेश करते हैं.

अलग अलग तरीकों से अपने खर्च को कम करके दिखाते हैं . लेकिन नैतिक मूल्यों में आई ये कमी... देश में कभी बहस का मुद्दा नहीं बनती है . ऐसे हालात देखकर आप भी सोचेंगे कि क्या अब नैतिकता को लेकर भी कानून बनाया जाना चाहिए ? लेकिन देश में माननीय नेताओं ने खुद को हमेशा कानून से ऊपर माना है... इसलिए अगर ऐसा कानून बना... तो भी उसका असर होने की उम्मीद ना के बराबर है .

महाराष्ट्र में पिछले 3 दिनों से जो राजनीति हो रही है उसे संवैधानिक बताकर देश के संविधान का महत्व कम करने की कोशिश हो रही है . आज ये समझना चाहिए कि करोड़ों भारतीयों के लिए संविधान का निर्माण कैसे किया गया था . 9 दिसंबर 1946 को भारत की संविधान सभा का गठन किया गया था... भारतीय संविधान के निर्माण के लिए ये सभा बनाई गई थी .

आजादी के बाद 29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान की रचना का काम शुरु हो गया था .Doctor भीमराव अंबेडकर... संविधान निर्माण के लिए बनी निर्मात्री समिति के अध्यक्ष बनाए गए थे . संविधान सभा को देश का संविधान बनाने में 2 वर्ष... 11 महीने और 17 दिन लगे थे

26 नवंबर 1949 को संविधान के निर्माण का काम पूरा हो गया था . वर्ष 2015 से इस दिन को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है . 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के सभी 284 सदस्यों ने संविधान पर अपने हस्ताक्षर किए... उस दिन हल्की बारिश हो रही थी... जिसे शुभ संकेत माना गया था . इसके बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू कर दिया गया... और इसी दिन भारत गणतांत्रिक देश बन गया . इसलिए हर वर्ष 26 जनवरी को पूरा देश गणतंत्र दिवस मनाता है .

वर्ष 1949 को आज के ही दिन Doctor अंबेडकर ने संविधान सभा में एक ऐतिहासिक भाषण दिया था.. जिसमें उन्होंने देश पर आगे आने वाली चुनौतियों का सटीक अनुमान लगाया था . Doctor अंबेडकर ने कहा था... स्वतंत्रता के बाद कोई भी चीज गलत होने पर ब्रिटिश लोगों को दोष देने का बहाना समाप्त हो गया है.

अब यदि कुछ गलत होता है तो हम किसी और को नहीं, स्वयं को ही दोषी ठहरा सकेंगे. समय तेजी से बदल रहा है. लोग जनता ‘द्वारा‘ बनाई सरकार से ऊबने लगे हैं. यदि हम संविधान को सुरक्षित रखना चाहते हैं, जिसमें जनता की, जनता के लिए और जनता द्वारा बनाई गई सरकार का सिद्धांत स्थापित किया गया है तो हमें प्रतिज्ञा करनी चाहिए कि ‘हम हमारे रास्ते में खड़ी बुराइयों की पहचान करने और उन्हें मिटाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.' देश की सेवा करने का यही एक रास्ता है.

यानी उस वक्त ही Doctor अंबेडकर समझ गए थे... कि भविष्य में देश की जनता को किस प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा . उन्होंने ये भी कहा था कि जहां नैतिकता और अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष होता है, वहां जीत हमेशा अर्थशास्त्र की ही होती है. उन्होंने संविधान को लेकर 70 वर्ष पूर्व एक चेतावनी दी थी... जो आज के राजनीतिक हालात पर सौ प्रतिशत सही है.
 

वैसे सोचने वाली बात ये है कि Doctor अंबेडकर पर राजनीति तो सभी ने की, लेकिन उनके विचारों को किसी ने भी, आगे नहीं बढ़ाया. Doctor अंबेडकर के नाम पर आज भी वोट मांगे जाते हैं . लेकिन उनके आदर्शों और भारत की बेहतरी के लिए सुझाए गए उनके फॉर्मूलों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है . देश का संविधान बनाने के लिए Doctor अंबेडकर सहित कई महान लोगों ने तपस्या की थी . लेकिन इसके बावजूद आज आदर्श भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है .

दुनिया का सबसे बड़ा संविधान भारत का है... इसमें 1 लाख 46 हज़ार से ज्यादा शब्द हैं . संपूर्ण संविधान... 448 अनुच्छेद... 12 अनुसूचियां और 24 भागों में विभाजित है . और दुनिया का दूसरा बड़ा संविधान नाइजीरिया का है जिसमें करीब 66 हजार शब्द हैं... यानी भारतीय संविधान में इससे दोगुना बड़ा है .

जबकि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के संविधान में करीब 7 हजार 7 सौ शब्द ही हैं. दुनिया की 5 बड़ी ताकतों में एक France के संविधान में करीब 10 हजार शब्द हैं

हमारे पड़ोसी चीन के संविधान में लगभग 10 हजार 900 शब्द हैं...इसका अर्थ ये है कि संविधान चाहे कितना भी विस्तृत तरीके से लिखा गया हो... उसके दुरुपयोग की संभावना हमेशा बनी रहती है .आज शिवसेना के विधायक कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना नेता मान रहे हैं तो कांग्रेस के विधायक...उद्धव ठाकरे के फैसलों की रक्षा करने के वादे कर रहे हैं. यानी अलग अलग विचारधारा वाली पार्टियां अब सत्ता के लिए अपने सारे सिद्धातों को दांव पर लगाने को तैयार हैं . और नेताओं की व्यक्ति पूजा से भी किसी को परहेज़ नहीं है .

संविधान सभा में दिए गए अपने अंतिम भाषण में डॉ अंबेडकर ने व्यक्ति पूजा पर बड़ी चेतावनी दी थी . अफसोस इस बात का है कि इसके बावजूद उस समय की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने इसका पालन नहीं किया . उन्होंने कहा था.... हमें जॉन स्टुअर्ट मिल की उस चेतावनी को ध्यान में रखना चाहिए जो उन्होंने उन लोगों की दी है जिन्हें प्रजातंत्र को बनाए रखने में दिलचस्पी है . वह ये है कि अपनी स्वतंत्रता को एक महानायक के चरणों में समर्पित नहीं करें या उस पर विश्वास करके उसे इतनी शक्तियां ना दे दें कि वह संस्थाओं को नष्ट करने में समर्थ हो जाए . धर्म के क्षेत्र में भक्ति, आत्मा की मुक्ति का मार्ग हो सकता है, परंतु राजनीति में भक्ति या नायक-पूजा... पतन और अंतत: तानाशाही का सीधा रास्ता है .

अगर कांग्रेस ने Doctor अंबेडकर की इन बातों पर ध्यान दिया होता तो शायद वो बेहतर स्थिति में होती... क्योंकि एक परिवार की मानसिक गुलामी करने की वजह से ही आज कांग्रेस का पतन हो गया है .वर्ष 1952 में देश में पहली बार चुनाव हुए थे...ये भारत में लोकतंत्र की शुरुआत थी . चुनाव के बाद देश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी थी और पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने थे .

इन महान नेताओं पर देश में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने की जिम्मेदारी थी . लेकिन संविधान लागू होने के 9 वर्षों के बाद ही वर्ष 1959 में देश में लोकतांत्रिक मूल्यों के खत्म होने की पहली शुरुआत हो गई थी . उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी संविधान के तहत मिले अधिकारों का दुरुपयोग शुरु हो जाएगा.

आज आप ये सवाल भी पूछ सकते हैं कि हमारे देश में नैतिकता को लेकर कोई कानून क्यों नहीं बनता ? ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं, जब दागी नेता चुनाव लड़ते हैं, और चुनाव जीतकर विधानसभाओं में पहुंच जाते हैं . नैतिक रूप से अयोग्य होने के बावजूद इन्हें ये हमारे लोकतंत्र में योग्य साबित हो जाते हैं .

हम आपको ऐसे नेताओं के कुछ उदाहरण दिखाते हैं .

अतुल राय इस समय उत्तर प्रदेश के घोसी से बहुजन समाज पार्टी के सांसद हैं . उनके ऊपर बलात्कार का आरोप है ...और वो इस वक्त जेल में बंद हैं .

गोपाल कांडा इस समय हरियाणा के सिरसा से विधानसभा के सदस्य हैं . उन पर एक महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है . और वो विधायक हैं .

मुख्तार अंसारी मऊ के विधायक हैं . उन पर हत्या, अपहरण और दूसरे गंभीर आरोप हैं . वो भी इस समय जेल में बंद हैं .

कुलदीप सिंह सेंगर उत्तर प्रदेश के उन्नाव से विधायक हैं . उन पर बलात्कार और हत्या की साजिश में शामिल रहने के आरोप हैं . ये भी इस समय जेल में बंद है .

नैतिकता का कोई कानून होता , तो शायद ये सभी नेता संसद या विधानसभा के लिए नहीं चुने जाते, लेकिन हमारे संविधान बनाने वालों ने शायद इस दिन की कल्पना नहीं की थी .