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Zee Jaankari: भारतीय योगदान के बिना अमेरिका नहीं बन सकता Super Power

अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA में 36 प्रतिशत भारतीय हैं. इसी तरह अमेरिका के कुल डॉक्टरों में भारतीय मूल के डॉक्टरों की संख्या 38 प्रतिशत है . यानी भारतीयों के योगदान के बगैर अमेरिका Super Power होने का दर्जा खो सकता है. 

Zee Jaankari: भारतीय योगदान के बिना अमेरिका नहीं बन सकता Super Power

अमेरिका की संसद में इस वक्त 5 भारतीय मूल के सांसद हैं. अमेरिका के कुल वैज्ञानिकों में भारतीयों की संख्या 12 प्रतिशत है . जबकि अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA में 36 प्रतिशत भारतीय हैं. इसी तरह अमेरिका के कुल डॉक्टरों में भारतीय मूल के डॉक्टरों की संख्या 38 प्रतिशत है . यानी भारतीयों के योगदान के बगैर अमेरिका Super Power होने का दर्जा खो सकता है. और अब हमारे देश में रहने वाले 135 करोड़ भारतीय भी अमेरिका के लिए उतने ही महत्वपर्ण हो गए हैं. क्योंकि कूटनीति की दुनिया में भारत Supwer Power बनने की तरफ बढ़ने लगा है .

नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल होने का फैसला करके Donald Trump ने दोनों देशों के रिश्तों को पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत कर दिया है. हालांकि, ये बात तय है, कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को Trump का फैसला पसंद नहीं आया होगा. इस बीच पाकिस्तान के अखबार The Express Tribune ने एक बहुत बड़ा दावा किया है. 3 सितंबर को Saudi Arabia के उप-विदेश मंत्री और UAE के विदेश मंत्री इस्लामाबाद गए थे. वो भी एक संदेश के साथ. इन दोनों प्रभावशाली मुस्लिम देशों द्वारा पाकिस्तान को दो बड़ी बातें कही गईं.

पहली बड़ी बात ये थी, कि इमरान ख़ान की सरकार को भारत के साथ Backdoor Diplomacy की सलाह दी गई. और दूसरी बड़ी बात ये थी, कि इन दोनों देशों द्वारा इमरान ख़ान को नसीहत दी गई, कि वो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने से बचें. नरेंद्र मोदी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग ना हो. और ना ही उनकी तुलना किसी तानाशाह से की जाए. ये बैठक बहुत गुप्त थी. जिसमें पाकिस्तान, UAE और Saudi Arabia के विदेश मंत्रालय से जुड़े अधिकारी मौजूद थे.

लेकिन पाकिस्तान के अखबार ने सूत्रों के हवाले से अंदर हुई बातचीत का एक अंश प्रकाशित किया है. जिसमें लिखा गया है, इसके अलावा दोनों देशों की तरफ से पाकिस्तान को ये भी नसीहत दी गई, कि नरेंद्र मोदी पर आक्रामक होना बंद करें. और इसके लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया गया, वो थे, Stop Targeting Modi. UAE और Saudi Arabia, दोनों ही देश भारत के गहरे मित्र हैं. और अब ये दोनों देश खुलकर भारत और नरेंद्र मोदी के समर्थन में आ गए हैं. और ये बात पाकिस्तान को बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की Howdy Modi वाली जुगलबंदी के लिए आपको 22 सितम्बर तक इंतज़ार करना होगा.

लेकिन इस कार्यक्रम से 6 दिन पहले हम आपको ये ज़रुर बता सकते हैं, कि इस वक्त भारतीय सेना और अमेरिका की सेना क्या कर रही है ? Washington में इस वक्त दोनों देशों की सेनाएं एक युद्ध अभ्यास कर रही हैं. इस Exercise की शुरुआत 5 सितम्बर को हुई थी, जो 18 सितम्बर तक चलेगी. ये 15वां मौका है, जब भारत और अमेरिका की सेना एक साथ अभ्यास कर रही हैं.

जिसका मकसद है, एक दूसरे के काम करने के तरीके को समझना. लेकिन युद्ध अभ्यास की तस्वीरों के बीच सबसे दिलचस्प तस्वीर कल आई. जब भारत और अमेरिका के सैनिकों ने एक साथ, Assam Regiment का Regimental Song गाया. जिसके बोल थे, ''बदलू-राम का बदन ज़मीन के नीचे हैं...पर हमको उसका राशन मिलता है''. इस गीत के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है, जो हम आपको आगे बताएंगे,

पहले आप दोनों देशों के सैनिकों की ये जुगलबंदी देखिए. Assam Regiment के Regimental Song में जिस 'बदलू-राम' का ज़िक्र किया गया है. वो Assam Regiment के ही सैनिक थे. बदलू-राम Second World War के दौरान Assam Regiment का हिस्सा थे. Second World War के दौरान ही वर्ष 1944 में 'कोहिमा की लड़ाई' हुई थी. जिसमें भारत और जापान के बीच युद्ध हुआ था.

इसी युद्ध में बदलू-राम शहीद हो गए थे. बहादुर बदलू-राम को उनकी शहादत के लिए तो याद किया ही जाता है. लेकिन उन्होंने शहीद होने के बाद भी कई सैनिकों की जान बचाकर मिसाल कायम कर दी. क्योंकि बदलू-राम के शहीद होने के बाद भी उनकी रेजीमेंट के रसद प्रबंधक.. उनके नाम का राशन लेते रहे.

ये सिलसिला कुछ महीनों तक चलता रहा. जब जापान की सेना ने भारतीय सेना के दस्ते को घेर लिया, तब राशन आना बंद हो गया. उस वक्त बदलू-राम के नाम से जमा करके रखा गया राशन ही, सैन्य दस्ते के काम आया और कई जवानों की जान बच गई. भारतीय सेना के शौर्य की ऐसी अनगिनत कहानियां हैं..

जो हम आपके साथ Share करते रहते हैं. सैनिकों का कर्ज़ तो हम शायद कभी नहीं चुका सकते. लेकिन उनके बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानने की कोशिश ज़रूर कर सकते हैं . हम जितना ज़्यादा उन्हें जानेंगे, खुद को उतना ही उनके करीब महसूस करेंगे.