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Zee Jaankari: राम जन्मभूमि विवाद मामले में धार्मिक असहनशीलता का भी विश्लेषण

आज हम राम जन्मभूमि विवाद मामले में धार्मिक असहनशीलता का भी विश्लेषण करेंगे. सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई 16 अक्टूबर को पूरी हो चुकी है और 17 नवंबर तक फैसला आ जाएगा. 

Zee Jaankari: राम जन्मभूमि विवाद मामले में धार्मिक असहनशीलता का भी विश्लेषण

आज हम राम जन्मभूमि विवाद मामले में धार्मिक असहनशीलता का भी विश्लेषण करेंगे. सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई 16 अक्टूबर को पूरी हो चुकी है और 17 नवंबर तक फैसला आ जाएगा. अयोध्या मामले के मुस्लिम पक्ष ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में...Moulding Of Relief पर अपनी वैकल्पिक मांग एक सीलबंद लिफाफे में पेश की थी. लेकिन सीलबंद लिफाफे पर हिंदू पक्ष की आपत्ति के बाद उन्हें अपनी मांग रविवार को सार्वजनिक करनी पड़ी. Moulding Of Relief का मतलब होता है...कि अगर किसी पार्टी का दावा कानूनी आधार पर कोर्ट नहीं मान सकता है.

तो फिर वो कोर्ट से वैकल्पिक रास्ते की मांग करते हैं. अयोध्या मामले की सभी पार्टियों ने शनिवार को इसी Moulding Of Relief के तहत अपनी अपनी वैकल्पिक मांग सुप्रीम कोर्ट में जमा की और उसे जनता के सामने सार्वजनिक भी किया. लेकिन मुस्लिम पक्ष ने शुरू में इसे सीलबंद लिफाफे में दायर किया था.

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट खुद तय करे. कि किसे क्या राहत देनी है. कोर्ट ऐसा करते समय संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखे. कोर्ट को देश की राजनीति और भविष्य पर होने वाले असर को देखते हुए फैसला देना चाहिए. मुस्लिम पक्ष ने ये भी कहा...कि कोर्ट ये ध्यान रखे कि आने वाली पीढ़ियां इस फैसले को कैसे देखेंगी. हमारे पास आज ये हलफनामा मौजूद है. इस हलफनामे की मुख्य बातों को आपको पढ़ना चाहिए.

अब आप इस भाषा के आधार पर तय कीजिए कि मुस्लिम पक्ष...आखिर सुप्रीम कोर्ट से क्या कहने की कोशिश कर रहा है. Moulding The Relief के तहत पक्षकार अपने दावे के संबंध में एक नया विकल्प देते हैं. लेकिन इस नोट को पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मुस्लिम पक्षकार सुप्रीम कोर्ट को ये चेतावनी दे रहे हैं. कि अगर फैसला हमारे पक्ष में नहीं आया, तो देश में किस तरह का माहौल पैदा होगा.