Zee Jaankari: सड़कों पर चलने वाले वाहनों की वर्ण व्यवस्था का विश्लेषण

सड़कों पर जाति का प्रदर्शन करने वाली मानसिकता का विश्लेषण करने के लिए हमने आज भारत और अमेरिका से एक संयुक्त DNA टेस्ट किया है

Zee Jaankari: सड़कों पर चलने वाले वाहनों की वर्ण व्यवस्था का विश्लेषण

अब हम भारत में सड़कों पर चलने वाले वाहनों की वर्ण व्यवस्था का DNA टेस्ट करेंगे. वीर सावरकर ने भारत में जातिवाद को खत्म करने की बहुत कोशिश की. उनका विचार था कि भारतीय समाज को जातियों और वर्णों में बांटकर नहीं रखना चाहिए. लेकिन आज़ादी के 72 वर्षों के बाद भी भारत में लोगों ने अपनी जाति, वर्ण, धर्म, पद और प्रतिष्ठा का प्रदर्शन करना बंद नहीं किया है. लोग इस प्रदर्शन के लिए अपने वाहनों तक का सहारा लेते हैं. हमें लगता है कि अपनी गाड़ियों पर जाति, धर्म, और पद लिखवाने वाले लोग पहचान के संकट से गुजर रहे हैं और दूसरे लोगों पर अपना प्रभाव साबित करना चाहते हैं. इसलिए हम आज इस विकृत मानसिकता का एक विस्तृत विश्लेषण करेंगे.

सड़कों पर जाति का प्रदर्शन करने वाली मानसिकता का विश्लेषण करने के लिए हमने आज भारत और अमेरिका से एक संयुक्त DNA टेस्ट किया है. इसके ज़रिए हमने ये समझने की कोशिश की है कि क्या अमेरिका जैसे देशों में भी लोग अपनी पहचान का विज्ञापन अपनी गाड़ियों पर चिपका कर चलते हैं? हमारे DNA टेस्ट में क्या सामने आया ये हम आपको बाद में बताएंगे लेकिन पहले ये समझ लीजिए कि गाड़ियों के शीशों, और Number Plates पर पहचान के इस प्रदर्शन से जुड़े नियम क्या कहते हैं?

भारत के Motor Vehicle Act के मुताबिक Number Plates से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. यानी सरकार ने इसके लिए जो मानक तय किए हैं उसका पालन करना हर वाहन मालिक के लिए ज़रूरी है. कहने का मतलब ये है कि आप अपने वाहन की नंबर प्लेट पर अपनी जाति, धर्म, गुरु, पदनाम, अपनी संस्था का नाम और पेशे का प्रदर्शन या प्रचार नहीं कर सकते. नियमों के मुताबिक गाड़ियों की अगली या पिछली WindShield पर भी कुछ भी लिखने की इजाजत नहीं है. निजी चार पहिया वाहनों पर आप 500/120 MM से बड़ी नंबर प्लेट नहीं लगा सकते. बड़े Commercial वाहनों पर 340/200 MM से बड़ी नंबर प्लेट लगाने की इजाजत नहीं है. इसी तरह दोपहिया वाहनों पर आप 200/100 MM से बड़ी नंबर प्लेट नहीं लगा सकते. इन निमयों का उल्लंघन करने पर नए Motor Vehicle कानून के तहत 500 रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है.

आपकी जाति चाहे कोई भी हो, धर्म चाहे कोई भी हो, आप पत्रकार हो, डॉक्टर हो, वकील हो या फिर पुलिस वाले... आप अपने वाहन पर अपनी पहचान का इश्तिहार नहीं लगा सकते. लेकिन हमारे देश में नियमों की परवाह कोई नहीं करता है. हमने आज इस मानसिकता को समझने के लिए कुछ मनोवैज्ञानिकों, कानून के जानकारों और इतिहासकारों से बात की और ये समझने की कोशिश की कि भारत में लोग धर्म, जाति और पद की पहचान को लेकर इतने अहंकार से ग्रस्त क्यों है. कानून इस विषय पर क्या कहता है ये हमने आपको बताया. अब आपको बताते हैं कि इसके पीछे की मनोवैज्ञानिक सोच क्या है.

हमारे देश में लोगों को बचपन से ही ये बताया जाता है कि उनकी जाति क्या है उनका धर्म क्या है और ये भी सिखाया जाता है कि उनकी जाति और धर्म दूसरों से श्रेष्ठ है. यही वजह है कि भारत में लोगों को बचपन से ही धर्म और जाति के प्रदर्शन की लत लग जाती है, या यू कहें कि ये लत लगा दी जाती है. इसके अलावा जो लोग पहचान के संकट से गुज़र रहे होते हैं वो इस प्रदर्शन का सहारा लेकर खुद को प्रभावशाली दिखाने की कोशिश करते हैं और कई बार इसका मकसद दूसरों को नीचा दिखाना होता है. हमने जब इतिहासकारों से इस विषय पर बात की तो हमें पता चला कि भारत में जाति व्यवस्था की शुरुआत को लेकर कुछ भी पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता. लेकिन ऋगवेद के अनुसार हिंदू धर्म में चार वर्ण माने गए हैं. वर्णों का ये वर्गीकरण इसलिए किया गया था ताकि सामाजिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया जा सके. ठीक वैसे ही जैसे एक Car को चलाने के लिए 4 पहियों की ज़रूरत होती है. Car का एक पहिया भी अगर ठीक से काम नहीं करता तो पूरे वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है. ठीक ऐसे ही जब समाज में लोग अलग-अलग जातियों और धर्मों में बंट जाते हैं तो देश का संतुलन भी बिगड़ जाता है.

लेकिन अमेरिका जैसे विकसित देशों के लोग अपने देश का सामाजिक संतुलन नहीं बिगड़ने देते. हमने इस विषय पर अमेरिका के न्यू जर्सी शहर से भी रिपोर्टिंग की है. इस दौरान हमें पता लगा कि वहां लोग वाहनों की Number plates या फिर वाहनों की Body पर Stickers लगा तो सकते हैं. लेकिन इसके लिए आपको परिवहन विभाग की लिखित इजाजत लेनी होती है. फिर भी अमेरिका में लोग अपने पद या प्रतिष्ठा की नुमाइश वाहनों पर नहीं करते. वहां गाड़ियों पर Stickers और Posters बहुत दुर्लभ होते हैं और अगर कोई अपनी गाड़ी पर कुछ चिपकाता भी है तो वो ज्यादातर अमेरिका का राष्ट्र ध्वज ही होता है. इसलिए आज हमने New Delhi से लेकर New Jersy तक की सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों का एक वीडियो विश्लेषण किया है. ये विश्लेषण देखकर आप समझ जाएंगे कि कैसे एक देश की सड़कें और वहां के वाहन उस देश के सामाजिक संस्कारों का प्रदर्शन करते हैं. अमेरिका में रहने वाले लोग अपने देश को जाति, धर्म और पद वाली ताकत से नहीं बल्कि राष्ट्रवाद वाली Horse Power से आगे बढ़ाते हैं.