ZEE जानकारी: Hong Kong में चीन की 'दीवार' हिलाने वाले आंदोलन का विश्लेषण

हमारे देश में लोग कैसे कानूनों की दीवारें लांघने में यकीन रखते हैं ये आपने देखा लेकिन अब हम चीन की अर्थव्यवस्था वाली महान दीवार में आई दरार का विश्लेषण करेंगे. 

ZEE जानकारी: Hong Kong में चीन की 'दीवार' हिलाने वाले आंदोलन का विश्लेषण

हमारे देश में लोग कैसे कानूनों की दीवारें लांघने में यकीन रखते हैं ये आपने देखा लेकिन अब हम चीन की अर्थव्यवस्था वाली महान दीवार में आई दरार का विश्लेषण करेंगे. कहते हैं कि कि दीवारें लोगों को अलग करती हैं और पुल आपस में जोड़ते हैं. लेकिन चीन जैसे देशों को लगता है कि पैसों के दम पर किसी को भी चारदीवारी में कैद करके रखा जा सकता है. लेकिन अब चीन की ये दीवारें टूटने लगी हैं और हॉन्ग कॉन्ग में हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने..इसमें एक बड़ी दरार पैदा कर दी है.

हॉन्ग कॉन्ग में पिछले करीब 25 हफ्तों से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और इन विरोध प्रदर्शनों ने पूरी दुनिया में चीन की छवि को धूमिल कर दिया है . अर्थव्यवस्था, व्यापार, और उद्योग चीन की पहचान रहे हैं... लेकिन विरोध प्रदर्शनों की आग ने इसे गहरी चोट पहुंचाई है. हॉन्ग कॉन्ग की Polytechnic University... पिछले एक हफ्ते से इन सरकार विरोधी प्रदर्शनों का केंद्र बनी हुई है.

सैंकड़ों की संख्या में छात्र इस यूनिवर्सिटी के कैंपस में छिपे हुए हैं. पुलिस को अंदर आने से रोकने के लिए ये छात्र...आग वाले तीर, पेट्रोल बम और गुलेल का इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी हॉन्ग कॉन्ग की ये यूनिवर्सिटी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच एक युद्ध का मैदान बन गई है.

दूसरी तरफ पुलिस छात्रों पर काबू पाने के लिए आंसू गैस, Ruber Bullets, Bean Bag Bullets और sponge bullets का इस्तेमाल कर रही हैं. इन सभी हथियारों का प्रयोग विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. ये हथियार शारीरिक चोट तो पहुंचाते हैं. लेकिन जानलेवा नहीं होते हैं.

लेकिन अब हॉन्ग कॉन्ग की पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर छात्र कैंपस से बाहर नहीं निकले, तो पुलिस असली गोलियों का भी इस्तेमाल कर सकती है. हालांकि यूनिवर्सिटी में छिपे 500 से 600 छात्र बाहर निकल चुके हैं और 18 वर्ष से ऊपर के कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है. लेकिन अभी भी करीब 200 छात्र यूनिवर्सिटी के अंदर मौजूद हैं.

कुछ छात्र कैंपस से इसलिए भी बाहर निकल रहे हैं. क्योंकि उनके पास खाने-पीने का सामान खत्म हो चुका है और कैंपस के अंदर ठंड से बचने के उपाय भी नहीं हैं. जिन छात्रों को गिरफ्तार किया गया है. उनपर दंगा भड़काने के आरोप लगाए जा सकते हैं और इस अपराध में उन्हें 10 वर्ष की सज़ा भी हो सकती है. हॉन्ग कॉन्ग में हो रहे प्रदर्शन चीन की सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं.

विशेषकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए ये बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है. क्योंकि शी जिनपिंग की छवि एक ऐसे नेता की है. जो किसी भी घटना को अपने नियंत्रण से बाहर नहीं जाने देते हैं. लेकिन हॉन्ग कॉन्ग में हो रहे प्रदर्शन. शी जिनपिंग के राजनैतिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं. हॉन्ग कॉन्ग में जो प्रदर्शन प्रत्यर्पण कानून के खिलाफ शुरू हुए थे..

वो अब आज़ादी की लड़ाई में बदल गए हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चीन की सरकार..हॉन्ग कॉन्ग के नागरिकों की आवाज़ दबा रही है...जो लोग चीन की सरकार के विरोध में हैं उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और जेल में डाला जा रहा है. लेकिन हॉन्ग कॉन्ग के जो नेता चीन का पक्ष लेते हैं उन्हें सरकार में महत्वपूर्ण पद दिया जा रहा है. चीन की इसी दमनकारी नीति ने हॉन्ग कॉन्ग के हालात को बद से बदतर बना दिया है .

हॉन्ग कॉन्ग सिर्फ चीन के लिए नहीं बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है. हॉन्ग कॉन्ग को दुनिया की बैंकिंग प्रणाली का केंद्र माना जाता है. क्योंकि हॉन्ग-कॉन्ग की वित्तीय संस्थाएं 6 ट्रिलियन डॉलर्स यानी 420 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति और निवेश को Manage करती हैं . ये भारत की वर्तमान अर्थव्यवस्था से लगभग ढाई गुना ज्यादा है.

भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल 190 लाख करोड़ रुपये है . और भारत आने वाले कुछ वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर्स की अर्थव्यवस्था बनना चाहता है. हॉन्ग कॉन्ग के नागरिक..अपने अधिकारों की रक्षा के लिए चीन की सरकार से टकरा रहे हैं और चीन की तानाशाही वाली...दीवार को तोड़ रहे हैं. हॉन्ग- कॉन्ग के इन विरोध प्रदर्शनों ने कैसे शी जिनपिंग और उनकी नीतियों का पर्दाफाश कर दिया है... और कम्युनिस्ट सरकार की तानाशाह वाली नीतियों को दुनिया के सामने Expose कर दिया है ((ये आपको देखना चाहिए.))