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पाकिस्तान में इमरान खान के तख्ता पलट की आशंका का विश्लेषण

तख्तापलट के लिए इस Brigade का इस्तेमाल पहली बार वर्ष 1958 में हुआ था. जब पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल अयूब ख़ान ने वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्ज़ा को उनके पद से हटा दिया था और सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था.

पाकिस्तान में इमरान खान के तख्ता पलट की आशंका का विश्लेषण

हमारा अगला विश्लेषण एक सवाल पर आधारित है. और वो सवाल ये है, कि क्या पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान जाने वाले हैं? क्या पाकिस्तान की सेना इमरान ख़ान का तख्ता पलटने की तैयारी कर रही है? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तानी सेना की Triple One (111) Brigade की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. और सभी सैनिकों को वापस Duty पर पहुंचने के लिए कहा गया है. Triple One Brigade रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना के Headquarter में तैनात रहती है. इस Brigade का इस्तेमाल, पाकिस्तान में हुए हर तख्तापलट में किया गया है. इसलिए इसे Coup Brigade भी कहते हैं.

तख्तापलट के लिए इस Brigade का इस्तेमाल पहली बार वर्ष 1958 में हुआ था. जब पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल अयूब ख़ान ने वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्ज़ा को उनके पद से हटा दिया था और सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था. इसके अलावा वर्ष 1969, 1977 और 1999 में भी तख्तापलट के लिए पाकिस्तानी सेना ने अपनी इसी Brigade का इस्तेमाल किया था. ये Brigade रावलपिंडी में तैनात रहती है. रावलपिंडी से इस्लामाबाद की दूरी सिर्फ 21 किलोमीटर है. इसलिए, ये बहुत कम समय में इस्लामाबाद पहुंच सकती है और तख्तापलट कर सकती है.

तख्ता पलट की आशंका इसलिए भी मज़बूत लग रही है, क्योंकि आजकल पाकिस्तान की आर्थिक नीतियां वहां के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा तय कर रहे हैं. जनरल बाजवा ने पाकिस्तान के प्रमुख कारोबारियों से एक गुप्त मुलाकात की है. आप इस वक्त उसी मुलाक़ात की तस्वीरें देख रहे हैं. हम इसे गुप्त इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि, पाकिस्तानी सेना द्वारा जारी इस Video में तस्वीरें तो हैं. लेकिन बंद कमरे में हो रही बातचीत को Mute कर दिया गया है. Reports के मुताबिक, सेना प्रमुख और कारोबारियों के बीच हुई ये तीसरी मीटिंग थी. इस दौरान सुरक्षा और गोपनीयता का खास ख्याल रखा गया. यही कारण है कि मीटिंग में लिए गए फैसलों की पूरी जानकारी नहीं मिल सकी. हालांकि, ऐसी ख़बरें हैं, कि जनरल बाजवा ने पाकिस्तानी कारोबारियों से कहा, कि वो अर्थव्यवस्था सुधारने के उपाय बताएं और ज्यादा निवेश करें. कारोबारियों के सुझावों को तत्काल प्रभाव से संबंधित अधिकारियों और मंत्रालयों तक पहुंचाया गया. और सेना द्वारा इन पर अमल के आदेश भी दिए गए.

इस वक्त पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. वर्तमान में पाकिस्तान की विकास दर सिर्फ 2 फीसदी है. बजट घाटा 8 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है. जो 30 साल में सर्वाधिक है. एक अनुमान के मुताबिक अगले 12 महीनों के अंदर पाकिस्तान में महंगाई दर 13 प्रतिशत हो जाएगी. जो 10 वर्षों में सबसे ज़्यादा होगा. बतौर प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को अर्थ व्यवस्था और अर्थ तंत्र का अनुभव नहीं है और दूसरी बड़ी बात ये है, कि इमरान ख़ान की Approval Rating में गिरावट आई है. यानी पाकिस्तान में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है, जो उन्हें पसंद नहीं करते. पिछले वर्ष चुनाव के दौरान उन्हें पसंद करने वाले लोगों की संख्या 64 प्रतिशत थी. जो अगस्त 2019 में घटकर 46 फीसदी हो गई है. ये वो तमाम वजहें हैं, जो पाकिस्तान में एक और तख्तापलट की तरफ इशारा कर रही हैं. कारोबारियों के साथ जनरल बाजवा की मुलाकात को आप सीधे-सीधे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में दखल कह सकते हैं. और ये एक प्रकार से तख्तापलट करने का नर्म तरीका भी है. पाकिस्तान पहले भी कई बार सैन्य शासन से गुज़र चुका है. यानी वहां पर तख्ता पलट हो चुका है और इस बार भी आशंका उसी बात की है.

पाकिस्तान में सेना ही देश चलाती है और देश की बड़ी बड़ी Industries भी सेना द्वारा ही संचालित की जाती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में पाकिस्तान में सेना के पास 1 लाख 42 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा का कारोबार था. और तीन साल बाद यानी वर्ष 2019 में पाकिस्तानी सेना का क़ारोबार, 7 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का हो चुका है. पाकिस्तान की सेना, पाकिस्तान में 50 से ज़्यादा Projects खुद चलाती है. पाकिस्तान की सेना ने अलग-अलग Projects चलाने के लिए 5 Foundations बनाएं हैं. जिनके नाम हैं, फौजी फाउंडेशन, शाहीन फाउंडेशन, बहरिया फाउंडेशन, Army Welfare Trust और Defence Housing Authorities. इन सभी संस्थाओं की कमान पाकिस्तान के सैन्य अफसरों के हाथ में होती है. और ये सारे अफसर इन संस्थाओं से खूब पैसा कमाते हैं.

एक आंकड़े के मुताबिक पाकिस्तान की कुल ज़मीन का 12 प्रतिशत सेना के पास है. पाकिस्तान में सैन्य अफसरों को कौड़ियों के भाव ज़मीनें दे दी जाती हैं. और इन ज़मीनों को वहां के सैन्य अफसर Market Rate पर बेचकर करोड़ों रुपये कमाते हैं. पाकिस्तान में सेना कई कंपनियां चलाती है, जिनके ऊंचे पदों पर पाकिस्तानी सेना के ही Retired Officers काबिज़ हैं. पाकिस्तान की सेना CornFlakes, अनाज, आटा, शहद, चॉकलेट और कस्टर्ड पाउडर तक बनाती है. और आपको ये भी बता दें कि भारत से कश्मीर छीनने का दावा करने वाली पाकिस्तानी सेना Readymade खीर भी बनाती है.

पाकिस्तान की सेना Employment Exchange भी चलाती है और सीमेंट भी बेचती है. पाकिस्तान की कई बड़ी Petroleum कंपनियों की मालिक भी वहां की सेना ही है. इतना ही नहीं पाकिस्तान की सेना Askari Bank के नाम से एक प्राइवेट बैंक भी चलाती है और ये बैंक पाकिस्तान के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों में से एक है. यानी पाकिस्तान में सेना का अपना खुद का एक पूरा सिस्टम है और वहां पर प्रधानमंत्री चाहे कोई भी हो सत्ता की चाबी सेना के पास ही रहती है.