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ZEE जानकारी: भारत में साइबर घुसपैठ के खतरे का विश्लेषण

आरोपों के मुताबिक Pegasus की मदद से दुनिया के कई देशों की सरकारें अपने और दूसरे देश के नागरिकों पर नज़र रख रही थीं . लेकिन आज हम एक ऐसे वायरस का विश्लेषण करेंगे जिसका शिकार आम लोग नहीं बल्कि खुद दुनिया भर की सरकारें हो रही हैं 

ZEE जानकारी: भारत में साइबर घुसपैठ के खतरे का विश्लेषण

नई दिल्ली: युद्ध की रणनीति को लेकर लिखी गई मशहूर कितानों में एक है- The Art Of War . यानी युद्ध करने की कला . इस किताब के लेखक थे..चीन के महान युद्ध रणनीतिकार और दार्शनिक Sun Tzu (सुन त्जु) . उन्होंने इस किताब के पहले चैप्टर में लिखा है कि सभी प्रकार के युद्ध.. धोखे के दम पर जीते जाते हैं . आपको अपने दुश्मन को ये यकीन दिलाना होता है कि आप कमज़ोर हैं और उसकी सरहदों से बहुत दूर है . जब दुश्मन इस धोखे में आ जाता है तब उस पर पूरी शक्ति के साथ हमला कर देना चाहिए .

यानी युद्ध में विजेता बनने के लिए आपको अपने शत्रु को एक ऐसी आभासी दुनिया में ले जाना पड़ता है...जहां उसे आपकी असली ताकत दिखाई नहीं देती . आजकल की भाषा में आभासी दुनिया को वर्चुअल वर्ल्ड कहते हैं और अब दुनिया के ज्यादातर आधुनिक युद्ध इसी आभासी दुनिया यानी वर्चुअल वर्ल्ड में लड़े जा रहे हैं .और इस दुनिया में युद्ध का सबसे बड़ा मैदान बन गया है साइबर स्पेस .

साइबर स्पेस में भारत भी दुश्मनों द्वारा किए जा रहे हमले का शिकार लगातार बन रहा है .और आज की खबर ये है कि देश के दुश्मनों ने एक साइबर हमले के ज़रिए भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो में सेंध लगाने की कोशिश की है . सूत्रों के मुताबिक ये कोशिश आज से करीब 2 महीने पहले तब की गई थी जब भारत चंद्रयान Two की लॉन्चिंग में जुटा हुआ था .इसरो के कम्प्यूटर्स को हैक करने की ये कोशिश चंद्रयान Two की लॉन्चिंग से करीब 100 घंटे पहले की गई थी . हालांकि हैकिंग की घटना को लेकर अभी तक इसरो की तरफ से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है . लेकिन सूत्रों के मुताबिक इसरो पर ये साइबर हमला...डी-ट्रैक नामक वायरस की मदद से किया गया था .

इस वायरस के बारे में हमने आपको 31 अक्टूबर के DNA में बताया था . हमने आपको बताया था कि कैसे..इस वायरस की मदद से तमिलनाडु के 

कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई थी . यानी देश के दुश्मनों के निशाने पर सिर्फ भारत के आम नागरिक ही नहीं हैं .बल्कि देश के महत्वपूर्ण संस्थानों पर भी साइबर आतंकवाद का खतरा मंडरा रहा है. आज हम देश के आम लोगों और देश की सरकारों को इसी खतरे से आगाह करने वाला एक विश्लेषण करेंगे .हम आपको पिछले कुछ दिनों से अपनी इन्वेस्टिगेशन सीरीज के तहत लगातार ये दिखा रहे हैं कि कैसे आपके स्मार्टफोन्स से लेकर आपका कम्प्यूटर और वो तमाम इल्कट्रॉनिक Devices जो इंटरनेट की मदद से चलती है...सब हैकर्स के निशाने पर है . अब तक हमारी जांच में ये बात साफ हो चुकी है कि इज़रायल का NSO ग्रुप अपने एक Spyware.. Pegasus की मदद से दुनिया भर के कई लोगों की जासूसी कर रहा था .

आरोपों के मुताबिक Pegasus की मदद से दुनिया के कई देशों की सरकारें अपने और दूसरे देश के नागरिकों पर नज़र रख रही थीं . लेकिन आज हम एक ऐसे वायरस का विश्लेषण करेंगे जिसका शिकार आम लोग नहीं बल्कि खुद दुनिया भर की सरकारें हो रही हैं . इस वायरस का नाम है डी-ट्रैक . डी-ट्रैक का निर्माण पहली बार उत्तर कोरिया में कियागया था और इस वायरस की मदद से रक्षा और वित्त से जुड़े सरकारी संस्थानों को निशाना बनाया जा सकता है.

Google की एक कंपनी टोटल वायरस ने आशंका जताई है कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट पर हुए साइबर हमले के ज़रिए हैकर्स ने काफी Data चुरा लिया है . हालांकि हम इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते...लेकिन अगर इसमें ज़रा सी भी सच्चाई है तो ये बहुत डराने वाली बात है . हालांकि Nuclear Power Corporation of India Limited ने साफ किया है कि हैकर्स ने न्यूक्लियर प्लांट के किसी महत्वपूर्ण सिस्टम को हैक नहीं किया था . बल्कि इस हमले से सिर्फ Office में इस्तेमाल होने वाला एक सामान्य Computer प्रभावित हुआ था .

लेकिन दक्षिण कोरिया की राजधानी सिओल से संचालित होने वाली एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन... ईशू मेकर्स लैब का दावा है कि डी-ट्रैक वायरस की मदद से ही....2016 में दक्षिण कोरिया के एक सैन्य ठिकाने पर साइबर हमला किया गया था . साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों का ये भी दावा किया है कि उत्तर कोरिया Thorium पर आधारित Nuclear technology हासिल करना चाहता है . और भारत Thorium आधारित परमाणु ऊर्जा के मामले में बहुत आगे है .अब आप सोच रहे होंगे कि अगर देश के महत्वपूर्ण संस्थानों पर लगातार साइबर हमले हो रहे हैं..तो इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है ? अगर हैकर्स या दुश्मन देश ...भारत के न्यूक्लियर प्लांटs को नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहे हैं तो इसे रोकने का काम कौन करेगा ? और अगर भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम भी किसी दुश्मन देश के निशाने पर हैं तो फिर इसरो को सुरक्षा की गारंटी कौन देगा ?

भारत में ऐसे महत्वपूर्ण संस्थानों की साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी National Critical Information Infrastructure Protection Centre यानी NCIIPC की है .इस संस्था के पास ऊर्जा, बैंकिंग, टेलीकॉम, ट्रांसपोर्ट अलग अलग सरकारी विभागों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सरकारी कंपनियों की साइबर सुरक्षा करने की भी जिम्मेदारी है . लेकिन फिलहाल इस संस्था की तरफ से हैकिंग की इन खबरों पर कोई सफाई या बयान नहीं आया है . और हम NCIIP की प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहे हैं.

आज हमने इस विषय पर कुछ साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों से बात की...तो हमें पता चला कि फिलहाल इसरो जैसी संस्था पर कोई बड़ा खतरा नहीं है. लेकिन ये साइबर हमले आने वाले वक्त में भारत की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं . इसलिए देश की सरहदों की रक्षा करने के साथ-साथ...हमें अपनी डिजिटल दुनिया के मैदान में भी साइबर सैनिक उतारने होंगे.

अब आप समझ गए होंगे कि सिर्फ भारत के आम लोगों का Data ही नहीं बल्कि सरकार और देश की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थानों का Data भी खतरे में है .यानी साइबर आतंकवादी या दुश्मन देश अगर चाहें..तो न्यूक्लियर प्लांट को Hack करके तबाही मचा सकते हैं. उड़ने हुए विमानों को क्रैश करा सकते हैं . सड़क पर ट्रैफिक व्यवस्था को अव्यवस्थित करके...कोहराम मचा सकते हैं . देश के बैकों से लाखों करोड़ों रुपये की चोरी कर सकते हैं., स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करके....हज़ारों लोगों की जान ले सकते हैं और ऐसा बहुत कुछ कर सकते हैं जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है . साइबर युद्ध में भारत को हराने के लिए दुश्मन देश किसी भी हद तक जा सकते हैं और अगर भारत ने इस दिशा में ज़रूरी कदम नहीं उठाए..तो हमें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी.

NITI आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले साल तक भारत में 73 करोड़ इंटरनेट यूजर्स होंगे . इनमें से 17 करोड़ लोग ऐसे होंगे जो ऑनलाइन शॉपिंग करेंगे . 70 प्रतिशत ऑनलाइन खरीददारी स्मार्टफोन्स के ज़रिए होगी और नए इंटरनेट उपभोक्ताओं में से 75 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग होंगे . यानी अगर भारत के इंटरनेट उपभोक्ता अपना अलग देश बना लें तो जनसंख्या के हिसाब से ये भारत और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश होगा .

फिलहाल भारत के 135 करोड़ लोगों की रक्षा करने के लिए करीब 34 लाख सैनिक मौजूद हैं. इनमें सक्रिय सैनिक.. रिजर्व सैनिक और नौसेना और वायुसेना के सैनिक भी शामिल हैं . यानी भयंकर युद्ध की स्थिति में..390 भारतीयों की रक्षा करने के लिए एक सैनिक उपलब्ध होगा . जबकि भारत के 75 करोड़ डिजिटल नागरिकों की रक्षा के लिए सिर्फ कुछ हज़ार साइबर Experts मौजूद हैं . भारत में अभी कितने साइबर एक्सपर्ट हैं इसे लेकर कोई पुख्ता आंकड़ा उपलब्ध नहीं है . 

लेकिन दुनिया की बड़ी आईटी कंपनी IBM के मुताबिक भारत को तत्काल करीब 30 लाख साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट की ज़रूरत है . यानी फिलहाल भारत के 75 करोड़ डिजिटल नागरिकों और महत्वपूर्ण संस्थानों का डाटा भगवान भरोसे हैं . और हमें इससे बचने के लिए बड़ी संख्या में साबइर सैनिक चाहिए . यानी भारत अपनी सीमा..वायु क्षेत्र और समुद्री सरहदों की रक्षा तो बहुत आसानी से कर सकता है. लेकिन डिजिटल इंडिया में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत के पास पर्याप्त साइबर सैनिक नहीं हैं .